Monday, 10 February 2025

CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 6 with Solutions

Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective with Solutions Set 6 are designed as per the revised syllabus.

CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 6 with Solutions

निर्धारित समय: 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश

  1. इस प्रश्न पत्र तीन खण्डों – खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ ।
  2. दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  3. तीनों खण्डों के कुल 13 प्रश्न हैं। तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर अनिवार्य है।
  4. यथासंभव तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए।

खण्ड – ‘क’
(अपठित बोध) (18 अंक)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए- (10)

दुर्बलों की शक्ति जब एकाकार हो उठती है, तब वह अपराजेय बन जाती है। तिनकों की परस्पर आबद्ध कर बताई गई रस्सी से हाथी को बाँध लिया जाता है। वस्तुतः एकता की शक्ति महान् प्राकृतिक एवं दैवी वरदान स्वरूप है। यही कारण है कि साधारणतः कोई भी जीव-जन्तु अकेले नहीं रहना चाहता । मनुष्य को इसीलिए सामाजिक प्राणी कहा जाता है। जंगलों और गुफ़ाओं में रहने वाला आदि मानव भी अकेला नहीं रहता था।

भोजन और सुरक्षा की खोज में उसे भी दल बनाकर ही रहना पड़ता था । आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उसे सहयोगियों की आवश्यकता रहती है और यही आवश्यकता उसे अन्य लोगों के साथ हिल-मिलकर रहना सिखलाती है। वह अच्छी तरह जानता है और अनुभव करता है कि ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ । इसी अनुभव एवं आवश्यकता के कारण एकता की भावना का विकास हुआ और हो रहा है। अनेक लोगों का एकमत होकर किसी एक उद्देश्य की प्राप्ति के परस्पर एकमत होकर चेष्टा करना एकता का प्रमुख लक्षण है। प्रत्येक जाति, समाज अथवा राष्ट्र के जीवन में एकता महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। एकता की शक्ति अपराजेय है । वह जिसे प्राप्त हो गई वही अपराजेय बन गया ।

वह एक ऐसा केंद्रीय तत्त्व है जो विभिन्न इकाइयों के बीच दूरी समाप्त कर उनमें संगठन, समन्वय, शक्ति और साहस का संचार करती है। इसके बल पर तुच्छ-से- तुच्छ प्राणी भी बड़े-बड़े कार्य पूरे कर डालता है। साधारण-से तिनके को जब अन्य तिनकों का बल मिल जाता है तब वह एक मस्त मतवाले हाथी को भी अचल कर देता है। जल की अनेकानेक बूँदें जब मिल जाती हैं, तब महासागर का निर्माण कर डालती हैं। छोटी-छोटी चींटियों के दल विषधर भुजंगों को भी चाट जाते हैं। मानव शरीर तो स्वयं एकता का श्रेष्ठ दृष्टांत है।

वह समाज नष्ट हो जाता है जिसके सदस्य आपस में एक नहीं होते। वह राष्ट्र उन्नतिशील नहीं होता जिसके नागरिक मात्र स्वार्थपूर्ति में लगे रहते हैं और जिनकी सामूहिक शक्ति का विकास नहीं होता। समाज में उन परिवारों की दुर्दशा आए दिन देखने को मिलती है। जिसके सदस्य पारस्परिक फूट के कारण पारिवारिक बँटवारा करके अलग-अलग परिवार बसाने लगते हैं। ‘हम तभी खड़े हैं जब तक हम संगठित हैं, जहाँ असंगठित हुए वहीं हम गिरे । जहाँ एकता नहीं विनाश निश्चित है ।

एकता की स्थापना उतनी सहज बात नहीं। यह वहीं स्थापित हो सकती है जहाँ त्याग, क्षमा, सहयोग और सहानुभूति की भावनाएँ होती हैं। अहंकार और स्वार्थ एकता के शत्रु हैं। मनुष्य स्वभाव से भूलें करता है। यदि उन भूलों को क्षमा न किया जाए तो आपसी कटुता, भय और शत्रुता का वातावरण बनता है। ऐसे वातावरण से एकता कभी नहीं फलती-फूलती। यदि हम पारस्परिक स्नेह – भावना का विकास करें और एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें तो एकता की भावना का विकास निश्चय ही होगा ।

(i) मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा जाता है क्योंकि …….।
उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए ।
(क) सामाजिक इकाई का अंग होने के कारण
(ख) समाज में उसके हितों की रक्षा के कारण
(ग) समूह में रहने की इच्छा के कारण
(घ) समाज में रहकर उसके व्यक्तित्व विकास के कारण
उत्तर:
विकल्प (ग) सही है ।
व्याख्या – मनुष्य को सामाजिक प्राणी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह समूह में रहता है

(ii) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A): जो मिला है आके लिए ईश्वर का आभार प्रकट करना है।
कारण (R) : ईश्वर से संवाद करने का सबसे सरल तरीका है अपने को प्रति समर्पित कर देना ।
(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ख) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(ग) कारण (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है ।
(घ) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही सही है।
उत्तर:
विकल्प (घ) सही है।

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(iii) ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ कहावत के विपरीत अर्थ को व्यक्त करने वाला विकल्प है …….. (1)
(क) अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
(ख) संगठन में शक्ति है ।
(ग) अकेले व्यक्ति में कोई सामर्थ्य नहीं
(घ) एकता की भावना
उत्तर:
विकल्प (ख) सही है ।

(iv) एकता का प्रमुख लक्षण क्या है ?
उत्तर:
एकता का प्रमुख लक्षण उद्देश्य प्राप्ति हेतु एकमत होकर चेष्टा करना है।

(v) गद्यांश के आधार पर किसी भी राष्ट्र के पतन के प्रमुख कारक कौन-से हैं ?
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र के पतन के प्रमुख कारक हैं-

  • नागरिकों में स्वार्थपूर्ति की भावना होना ।।
  • सामूहिक शक्ति का विकास न होना ।

(vi) एकता के फलने-फूलने के लिए क्या आवश्यकता है ?
उत्तर:
एकता के फलने-फूलने के लिए पास्परिक स्नेह – भावना और सहभागिता की आवश्यकता होती है ।

(vii) गद्यांश के आधार पर समाज में परिवारों की दुर्दशा का क्या कारण है ?
उत्तर:
गद्यांश के आधार पर समाज में परिवारों की दुर्दशा का कारण पारस्परिक फूट है जिससे पारिवारिक बँटवारा होता है ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए-

बैठे हुए हो व्यर्थ क्यों ? आगे बढ़ो, ऊँचे चढ़ो।
है भाग्य की क्या भावना, अब पाठ पौरुष का पढ़ो।
है सामने का ग्रास भी, सुख में स्वयं जाता नहीं ।
हाँ ध्यान उद्यम का तुम्हें, तो भी कभी आता नहीं ।
जो लोग पीछे थे तुम्हारे बढ़ गए, हैं बढ़ रहे ।
पीछे पड़े तुम, दैव के सिर दोष अपना मढ़ रहे ॥

पर कर्म – तैल बिना कभी विधि- दीप जल सकता नहीं ।
है दैव क्या ? साँचे बिना कुछ आप ढल सकता नहीं ॥
आओ मिलें सब देश-बांधव, हार बनकर देश के ।
साधक बनें सब प्रेम से, सुख-शांतिमय उद्देश्य के
क्या सांप्रदायिक भेद से है ऐक्य मिट सकता अहो
बनती नहीं क्या एक माला विविध सुमनों की कहो ।

(i) काव्यांश में किस प्रकार की जीवन-पद्धतियों की बात की गई है ?
(क) पौरुषहीन और आलस्यहीन
(ख) आलस्यपूर्ण और उद्यमपूर्ण
(ग) निरर्थक और पौरुषहीन
(घ) स्थिर और स्थगित
उत्तर:
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या–काव्यांश में आलस्यपूर्ण और उद्यमपूर्ण जीवन पद्धतियों की बात की गई है।

(ii) ‘सामने का ग्रास भी स्वयं मुख में जाता नहीं’ पंक्ति का भाव है-
(क) बिना हवा चले वृक्ष के पत्ते नहीं गिरते ।
(ख) पका हुआ फल हाथ में लिए बिना मुँह में जाता नहीं ।
(ग) सामने रखा भोजन हाथ से ही मुँह में जाता है।
(घ) परिश्रम किए बिना जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं होता ।
उत्तर:
विकल्प (घ) सही है ।

(iii) काव्यांश के अनुसार पीछे रहने वाले लोग आगे बढ़ रहे हैं। आगे बढ़ने के कारणों वाले कथन है/हैं-
I. भाग्यशाली होने के कारण आगे बढ़ रहे हैं।
II. विशेष शक्ति से पूर्ण होने के कारण आगे बढ़ रहे हैं।
III. उद्यम और परिश्रम करने के कारण आगे बढ़ रहे हैं।
(क) केवल (II)
(ख) केवल (I)
(ग) केवल (III)
(घ) (II) और (III)
उत्तर:
विकल्प (ग) सही है ।

(iv) पीछे रहने वाले लोग अपनी असफलता का दोष किसे देते हैं ? (1)
उत्तर:
पीछे रहने वाले लोग अपनी असफलता का दोष अपने भाग्य को देते हैं।

(v) मनुष्य का भाग्य कब साथ देता है ? (2)
उत्तर:
मनुष्य का भाग्य तब साथ देता है जब कर्म रूपी तेल भाग्य रूपी दीप में पड़ता है ।

(vi) मूर्ति बनाने के लिए किसकी आवश्यकता होती है ? (2)
उत्तर:
मूर्ति बनाने के लिए साँचे की आवश्यकता होती है क्योंकि बिना साँचे के मूर्ति नहीं बन सकती ।

खण्ड – ‘ख’
(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर) (22 अंक)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए- (1 + 2 + 2 = 5)

(क) इंटरनेट पत्रकारिता के अधिक लोकप्रिय होने का क्या कारण है ? (शब्द सीमा – लगभग 20 शब्द) (1)
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता के अधिक लोकप्रिय होने का कारण तीव्र गति से ख़बरों को पहुँचाया जाना है।

(ख) हिंदी की ज़्यादातर साइटें क्यों नहीं खुलतीं ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द)
उत्तर:
हिन्दी की ज्यादातर साइटें डायनमिक फौंट की अनुपलब्धता के कारण नहीं खुलती हैं।

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(ग) बीट किसे कहते हैं ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द)
जनसंचार और सृजनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न
उत्तर:
संवाददाताओं को उनकी रूचि और ज्ञान के आधार पर दिया गया काम बीट कहलाता है। इसमें राजनीति, ब्यबस्था माँसम से सम्बध्ति जानकारी को एकट्टस्रा किया जाता है यह पत्रापादिता की एक होति हैं ।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए – (3 × 2 = 6)

(क) अच्छे समाचार लेखकों में किन गुणों का होना आवश्यक है ? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
अच्छे समाचार लेखकों में निम्न गुणों का होना आवश्यक है—

  • अच्छे समाचार लेखकों को अपनी भाषा पर पूर्ण अधिकार होता है।
  • अच्छे समाचार लेखकों को तकनीकी शब्दावली की पूर्ण जानकारी होती है।
  • अच्छे समाचार के लेखक उल्टा पिरामिड शैली/छ: ककारों से पूरी तरह परिचित होते हैं।
  • अच्छे समाचार के लेखक समाचार लेखन में सहज-सरल भाषा का प्रयोग करते हैं।

(ख) विशेष रिपोर्ट के प्रकार के बारे में बताते हुए इन-डेप्थ रिपोर्ट के बारे में बताइए ।
उत्तर:
विशेष रिपोर्ट के कई प्रकार होते हैं। खोजी रिपोर्ट, इन डेप्थ रिपोर्ट, विवरणात्मक रिपोर्ट इत्यादि । खोजी रिपोर्ट में रिपोर्टर मौलिक शोध और छानबीन के ज़रिए सूचनाएँ सामने लाता है। इन-डेप्थ रिपोर्ट में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध तथ्यों, सूचनाओं और आँकड़ों की गहरी छानबीन की जाती है और उसके आधार पर किसी घटना, समस्या या मुद्दे से जुड़े महत्त्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाया जाता है ।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए-

(क) पुस्तकें पढ़ने की खत्म होती आदत
उत्तर:
पुस्तकें पढ़ने की खत्म होती आदत
आज पुस्तक पढ़ने की आदत खत्म होती जा रही है क्योंकि लोग मोबाइल से अधिक जानकारी किसी भी समय प्राप्त कर लेते हैं लेकिन पुस्तक से किसी भी विषय का अध्ययन करना लाभदायक होता है क्योंकि वह विषय हमें लम्बे समय तक याद रहता है। लेकिन मोबाइल से याद करने में कठिनाई तो होती है। साथ ही उससे निकलने वाली रोशनी से हमारी आँखों पर खराब प्रभाव पड़ता है । आजकल छोटे-छोटे बच्चों की आँखों की रोशनी कम हो रही है जिसके कारण कम उम्र में ही उनको चश्मा लग जाता है। हमें पुस्तकें पढ़ने की आदत को समाप्त नहीं करना चाहिए क्योंकि हम महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं को पुस्तकों में चिह्नित कर सकते हैं। पुस्तक पढ़ने से हमारी आँखों की रोशनी भी जल्दी नहीं जाती है।

(ख) आज़ादी का अमृत महोत्सव
उत्तर:
आज़ादी का अमृत महोत्सव
भारत की संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को मनाने के लिए भारत सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 मार्च 2021 में अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में आज़ादी के अमृत महोत्सव का उद्घाटन किया था क्योंकि इसी दिन गांधी जी ने ‘नमक सत्याग्रह’ आन्दोलन की शुरुआत की थी।

आज़ादी का यह महोत्सव 75 सप्ताह तक मनाया गया। इन सप्ताह में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित किया गया। आज भारत एक परमाणु शक्ति होने के साथ ही बड़ी सैन्य शक्ति भी है। मंगल पर मानव भेजने वाले 5 देशों की सूची में भारत को भी शामिल किया गया है। उत्पादन में के मामले भारत सशक्त होकर उभरा है।

(ग) परिश्रम से जी चुराना
उत्तर:
परिश्रम से जी चुराना
परिश्रम से जी चुराना ठीक बात नहीं है क्योंकि परिश्रम से ही सफलता के पथ पर अग्रसर हुआ जा सकता है। रीना पढ़ाई नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसे पढ़ाई के स्थान पर खेल अधिक प्रिय था। मैं और रीना दोनों ही कक्षा में एक-साथ बैठा करते थे। वह मुझे हमेशा खेलने के लिए कहती थी लेकिन मैं कुछ समय के लिए उसके साथ खेलती फिर पढ़ाई करने लग जाती थी। एक दिन अंग्रेज़ी के अध्यापक ने हमारा कक्षा में टेस्ट लिया। टेस्ट का नाम सुनते ही रीना घबरा गई क्योंकि उसे अध्यापक ने दूरी पर बैठा दिया। रीना ने घबराते हुए प्रश्नों के उत्तर लिखे । अध्यापक ने तुरन्त कॉपी जाँची और बताया कि सबसे अधिक अंक मेरे आए हैं और सबसे कम अंक रीना के आए हैं। रीना परिश्रम से जीन चुराती तो उसके भी अंक अच्छे आते ।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए – (3 × 2 = 6)

(क) बिम्ब और छंद कविता को इंद्रियों से पकड़ने में कैसे सहायक हैं ?
उत्तर:
बिम्ब और छंद ( आंतरिक लय) कविता को इंद्रियों से पकड़ने में सहायक होते हैं । हमारे पास दुनिया को जानने एक मात्र सुलभ साधन इंद्रियाँ हैं। बाह्य सम्बेदनाएँ मन के स्तर पर बिम्ब के रूप में बदल जाती ही हैं। कुछ विशेष शब्दों को सुनकर अनायास मन के भीतर कुछ चित्र कौंध जाते हैं। ये स्मृति चित्र ही शब्दों के सहारे कविता का बिम्ब निर्मित करते हैं । छंद कविता का अनिवार्य तत्त्व है। मुक्त छंद की कविता लिखने के लिए भी अर्थ की लय का निर्वाह ज़रूरी है।

(ख) कविता के कुछ प्रमुख घटकों के बारे में बताइए ।
उत्तर:
कविता के कुछ प्रमुख घटक इस प्रकार हैं-

  • कविता भाषा में होती है, इसलिए भाषा का सम्यक ज्ञान ज़रूरी है।
  • भाषा शब्दों से बनती है । शब्दों का एक विन्यास होता है। छंद के अनुशासन की जानकारी से होकर गुज़रना एक कवि के लिए ज़रूरी है। तभी आंतरिक लय का निर्वाह सम्भव है।
  • कविता समय विशेष की उपज होती है। उसका स्वरूप समय के साथ-साथ बदलता रहता है।
  • कम-से-कम शब्दों में अपनी बात कह देना और कभी-कभी तो शब्दों या दो वाक्यों के बीच कुछ अनकहीं छोड़ देना कवि की ताक़त बन जाती है।

(ग) कहानी के कथानक में पात्रों के चरित्र-चित्रण के लिए किन तरीकों को अपनाया जाता है ?
उत्तर:
कहानी के कथानक में पात्रों के चरित्र-चित्रण के लिए निम्न तरीक़ों को अपनाया जाता है-

  • पात्रों के बारे में स्वयं न बोलकर पात्रों के क्रियाकलापों और संवादों के माध्यम से बताना ।
  • लेखक के द्वारा स्वयं भी पात्रों के बारे में कहा जाना ।
  • दूसरों के द्वारा भी पात्र के बारे में कहलवाकर।
  • पात्रों का चरित्र-चित्रण पात्रों की अभिरुचियों के माध्यम से किया जाता है।

खण्ड- ‘ग’ (40 अंक)
(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल के आधार पर)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-

यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो ।
यह जन है – गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ?
पनडुब्बा – ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ?
यह समिधा – ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा।
यह अद्वितीय – यह मेरा – यह में स्वयं विसर्जित –
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो ।
यह मधु है – स्वयं काल की मौना का युग-संचय,
यह गोरस – जीवन – कामधेनु का अमृत-पूत पय
यह अंकुर – फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,
यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुतः इसको भी
शक्ति को दे दो ।

(i) ‘दीप’ ……… प्रतीक है ?
(क) व्यक्ति
(ख) समाज
(ग) प्रकाश
(घ) परिवार
उत्तर:
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या- ‘दीप’ व्यक्ति का प्रतीक है।

(ii) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढिए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए ।
कथन – है गर्व भरा मदमाता, पर उसको भी पंक्ति दे दो ।
कारण – पंक्ति समष्टि का प्रतीक है।
(क) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(ख) कथन और कारण दोनों सही है।
(ग) कथन सही है किंतु कारण गलत हैं।
(घ) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
उत्तर:
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या—’ पंक्ति’ का प्रतीक समष्टि है।

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(iii) पनडुब्बा से आप क्या समझते हैं ? (1)
(क) पानी में चलने वाली नाव
(ख) पानी पर तैरने वाले पक्षी
(ग) गोताखोर
(घ) बड़ी मछली
उत्तर:
विकल्प (ग) सही है।

(iv) ‘दीप का पंक्ति में विलय’ का भाव है ……. (1)
(क) दीप की सत्ता का सार्वभौमीकरण ।
(ख) दीप के अहंकार के मद को दूर करना ।
(ग) दीप को पंक्ति में स्थान देना ।
(घ) दीप के एकाकीपन को दूर करना ।
उत्तर:
विकल्प (क) सही है ।

(v) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (1)
कथन 1 – दीप जीवन रूपी कामधेनु द्वारा प्रदत्त अमृत तुल्य पवित्र दूध के समान हैं 1
कथन 2- दीप कठिन से कठिन परिस्थितियों पर विजय पा आगे बढ़ने की क्षमता रखता है।
कथन 3 – समाज दीप की प्रशंसा में सुंदर-सुंदर गीतों की रचना करता है ।
(क) केवल कथन 1
(ख) कथन 1 और 2
(ग) केवल कथन 2
(घ) कथन 1 और 3
उत्तर:
विकल्प (ग) सही हैं ।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए-

(क) ‘बारहमासा’ पाठ के आधार पर पूस मास में रानी नागमती की विरह वेदना का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
‘बारहमासा’ पाठ में पूस मास में रानी नागमती की विरह वेदना का वर्णन किया गया है। राजा रत्नसेन की अनुपस्थिति में नागमती अत्यन्त व्यथित हो जाती है। भयंकर सर्दी भी उसे कष्टदायक प्रतीत होती है । वियोग के कारण उसका शरीर दिन रात धीरे-धीरे गलता जा रहा है। उसका रक्त सूख गया है। विरह में नागमती सारस, चकवा – चकवी और कोकिल की भाँति व्यथित है।

(ख) ‘सरोज स्मृति’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए ।
उत्तर:
‘सरोज स्मृति’ एक शोक गीत है । कवि अपनी दिवंगत पुत्री का स्मरण कर व्याकुल हो रहा है। पिता के संघर्ष और विवशता का चित्रण इसमें किया गया है। पिता का पुत्री के प्रति अकर्मण्यता का बोध भी परिलक्षित होता है।

(ग) ‘देवसेना का गीत ‘ कविता से हमें क्या सीख मिलती है ?
उत्तर:
‘देवसेना का गीत ‘ कविता से हमें यह सीख मिलती है कि-

  • जीवन के यथार्थ में विश्वास करना चाहिए ।
  • अत्यधिक विश्वास और कल्पना से बचना चाहिए ।
  • परिणाम की चिंता किए बिना विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रबल इच्छा को जाग्रत करना चाहिए ।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- (6 × 1 = 6)

(क) यह धीरे-धीरे होना
धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय
दृढ़ता से बाँधे है समूचे शहर को
इस तरह कि कुछ भी गिरता नहीं है
कि हिलता नहीं है कुछ भी
कि जो चीज़ जहाँ थी
वहीं पर रखी है
कि गंगा वहीं है
कि वहाँ पर बँधी है नाव
कि वहीं पर रखी है तुलसीदास की खड़ाऊँ
सैकड़ों बरस से
उत्तर:
सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘बनारस’ कविता से अवतरित हैं जिसके रचयिता केदारनाथ सिंह हैं।
प्रसंग- इसमें कवि ने बनारस शहर के विषय में बताया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि यहाँ सभी कार्य धीरे-धीरे होते हैं। यह एक सामूहिक लय है । मज़बूत बंधन के कारण यहाँ कुछ गिरता नहीं है। दृढ़ता ने समूचे शहर को एक सूत्र में बाँध रखा है। कुछ भी हिलता नहीं है जो चीज़ जहाँ थी, वह वहीं रखी है। अर्थात् गंगा वैसी की ही वैसी बनी हुई है। गंगा के किनारों पर नाव बँधी है। लोग आस्था और श्रद्धा भाव से जुड़े हुए हैं। सैंकड़ों वर्षों से तुलसीदास की खड़ाऊँ यहाँ रखी हुईं हैं।

विशेष-

  • एक प्रकार की ध्वन्यात्मकता है।
  • आकर्षक बिम्बों का प्रयोग किया है।

अथवा

(ख) के पतिआ लए जाएत रे मोरा पिअतम पास ।
हिए नहि सहए असह दुःख रे भेल साओन मास ॥
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए ।
सखि अनकर दुःख दारुन रे जग के पति आए ॥
उत्तर:
सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ विद्यापति कृत ‘पदावली’ से अवतरित हैं।
प्रसंग- इसमें कवि ने नायिका की विरहवस्था का चित्रण किया है।
व्याख्या – राधा अपनी सखी से कहती है कि हे सखी ! ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो मेरा पत्र प्रियतम के पास तक ले जाएगा सावन का मास है। मेरा हृदय इस मास में दुःख को सहन नहीं कर पा रहा है। प्रियतम के बिना मुझे इस घर में अकेला नहीं रहा जा रहा है। हे सखी! ऐसा कौन व्यक्ति है जो मेरे कठोर दुःख पर विश्वास कर सके।

विशेष-

  • विरह की तीव्रता का वर्णन
  • भाषा – मैथिली।
  • रस-वियोग श्रृंगार रस

प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)

संवाद पहुँचाने का काम सभी नहीं कर सकते । आदमी भगवान के घर से संवदिया बनकर आता है। संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखना, फिर सुर और स्वर में संवाद सुनाया गया है, ठीक उसी ढंग से जाकर सुनाना सहज काम नहीं। गाँव के लोगों की गलत धारणा है कि निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी ही संवदिया का काम करता है। न आगे नाथ, न पीछे पगहा। बिना मज़दूरी लिए जो गाँव-गाँव संवाद पहुँचावे, उसको और क्या कहेंगे ? औरतों का गुलाम । ज़रा-सी मीठी बोली सुनकर ही नशे में आ जाए, ऐसे मर्द को भी भला मर्द कहेंगे ?

(i) ‘न आगे नाथ, न पीछे पगहा’ कहावत का अर्थ है ………
(क) घर-परिवार से अलग
(ख) जिसका कोई नहीं हो
(ग) बाधाओं से स्वतंत्र
(घ) ज़िम्मेदारियों से मुक्त
उत्तर:
विकल्प (घ) सही है ।

(ii) संवाद पहुँचाने का काम सभी क्यों नहीं कर सकते ?
(क) समय के अभाव के कारण
(ख) समानुभूति की भावना के अभाव के कारण
(ग) संवेदनशील नहीं होने के कारण
(घ) पारिवारिकता के कारण
उत्तर:
विकल्प (ख) सही है ।
व्याख्या – संवाद पहुँचाने का काम सभी इसलिए नहीं कर सकते
क्योंकि समानुभूति की भावना का अभाव होता है।

(iii) निम्नलिखित कथन तथा कारण पर विचार कीजिए और सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए- (1)
कथन: संवदिया को आम लोगों से अलग समझा जाता है।
कारण : संवाद सुनाने की कला में निपुणता के कारण ।
विकल्पः
(क) कथन और कारण दोनों सही है।
(ख) कथन और कारण दोनों गलत है।
(ग) कथन सही है किंतु कारण गलत है।
(घ) कथन गलत है। किंतु कारण सही है।
उत्तर:
विकल्प (क) सही है ।

(iv) संवदिया के प्रति गाँव के लोगों की विपरीत धारणा …… है ?
(क) पैसा कमाने को महत्त्वपूर्ण मानने से
(ख) रोज़गार के अन्य कार्यों को महत्त्वपूर्ण मानने से
(ग) संवदिया के कार्य को नहीं समझने से
(घ) संवाद के महत्त्व को नहीं समझने से
उत्तर:
विकल्प (ग) सही है ।
व्याख्या–संवदिया के प्रति गाँव के लोगों की विपरीत धारणा संवदिया के कार्य को नहीं समझने के कारण है।

(v) ‘संवादर पहुंचाने का काम सभी नहीं कर सकते।’ इस पंक्ति मे किसके विषय में बात हो रही है ? (1)
(क) संवदिया
(ख) माता
(ग) पिता
(घ) बहन
उत्तर:
विकल्प (क) सही है।

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए-

(क) रामचंद्र शुक्ल का हिन्दी के प्रति रुचि उत्पन्न करने में उनके पिताजी के योगदान को रेखांकित कीजिए ।
उत्तर:
रामचन्द्र शुक्ल का हिन्दी के प्रति रुचि उत्पन्न करने में उनके पिताजी का योगदान रहा है। पिता जी फ़ारसी के अच्छे ज्ञाता थे। वह हिन्दी की कविताओं का मिलान करते थे । शुक्ल जी पिता द्वारा ‘रामचरितमानस’ और ‘रामचन्द्रिका’ को घर में सस्वर सुनते थे।

(ख) ‘आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस की तेज़ पिण्ड से।’ ‘ढेले चुन लो’ से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति में व्यंग्य निहित है। लोकविश्वासों में निहित अन्धविश्वासों और मान्यताओं पर चोट की गई है। सामान्य मनुष्य जिसने ग्रहों-उपग्रहों को देखा भी नहीं है, उसका प्रभाव जीवन पर स्वीकार करता है तो मिट्टी के ढेले तो उसकी अपनी आँखों से देखे-परखे हैं। उन पर विश्वास करता है। यह आश्चर्यजनक है।

(ग) संभव अधिक शारीरिक परिश्रम में विश्वास क्यों नहीं करता था ? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर:
संभव अधिक शारीरिक परिश्रम में विश्वास इसलिए नहीं करता था क्योंकि पढ़ाई-लिखाई में वह व्यस्त रहता है। उसे कभी शारीरिक श्रम की आवश्यकता महसूस नहीं होती है। यहाँ श्रम का अभिप्राय केवल मानसिक श्रम से लिया गया है। वह टेबल कुर्सी पर बैठकर पढ़ने के कारण शारीरिक श्रम का महत्त्व नहीं समझता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढकर किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए – (6 × 1 = 6)

(क) घंटे घड़ियाल बजते हैं। मनौतियों के दिये लिए हुए फूलों की छोटी-छोटी किश्तियाँ गंगा की लहरों पर इठलाती हुई आगे बढ़ती हैं। गोताखोर दोने पकड़े, उनमें रखा चढ़ावे का पैसा उठाकर मुँह में दबा लेते हैं। एक औरत ने इक्कीस दोनें तैराएँ हैं। गंगापुत्र जैसे ही एक दोने से पैसा उठाता है, औरत अगला दोना सरका देती हैं। गंगापुत्र उस पर लपकता है कि पहले दौने के दीपक से उसके लँगोट में आग की लपट लग जाती है। पास खड़े लोग हँसने लगते हैं। पर गंगापुत्र हतप्रभ नहीं होता । वह झट गंगाजी में बैठ जाता है। गंगा मैया ही उसकी जीविका और जीवन है ।
उत्तर:
सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ममता कालिया द्वारा रचित कहानी ‘दूसरा देवदास’ से अवतरित है।
प्रसंग—इसमें लेखक ने गंगा तट का वर्णन किया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि घंटे घड़ियाल बजते हैं। गंगा में लोग फूल प्रवाहित करते हैं । गोताखोर दोने पकड़ लेते हैं। उनमें रखा हुआ चढ़ावे का पैसा दोनें में से निकाल लेते हैं। वहाँ पर एक स्त्री ने इक्कीस दोनें तैराएँ हैं। गंगापुत्र एक-एक पैसे के दोनें को उठाता है। जब वह पैसे निकाल रहा होता है तब उसके लंगोट में आग लग जाती है जिसे देखकर लोग हँसने लगते हैं लेकिन गंगापुत्र हतप्रभ नहीं होता। वह झट से गंगा जी में बैठ जाता है क्योंकि गंगा मैया ही उसकी जीविका हैं ।

विशेष-

  • कुछ लोगों का घर गंगा में प्रवाहित किए गए पैसों को इकट्ठा करके चलता है।
  • भाषा सहज, सरल खड़ीबोली हिन्दी है ।

अथवा

(ख) मेरे सहपाठी पं. लक्ष्मीनारायण चौबे, बा. भगवानदास हालना, बा. भगवानदास मास्टर – इन्होंने ‘उर्दू बेगम’ नाम की एक बड़ी ही विनोदपूर्ण पुस्तक लिखी थी, जिसमें उर्दू की उत्पत्ति, प्रचार आदि का वृत्तांत एक कहानी के ढंग पर दिया गया था – इत्यादि कई आदमी गर्मी के दिनों में छत पर बैठे चौधरी साहब से बातचीत कर रहे थे । चौधरी साहब के पास ही एक लैम्प जल रहा था । लैम्प की बत्ती एक बार भभकने लगी। चौधरी साहब नौकरों को आवाज़ देने लगे। मैंने चाहा कि बढ़कर बत्ती नीचे गिरा दूँ, पर लक्ष्मीनारायण ने तमाशा देखने के विचार से मुझे धीरे से रोक लिया। चौधरी साहब कहते जा रहे हैं, “अरे ! जब फूट जाई तबै चलत आवह | ” अंत में चिमनी ग्लोब के सहित चकनाचूर हो गई, पर चौधरी साहब का हाथ लैम्प की तरफ़ न बढ़ा ।
उत्तर:
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘प्रेमघन की छाया स्मृति’ से अवतरित है जिसके लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल है।
प्रसंग – लक्ष्मीनारायण और ‘प्रेमघन’ का वर्णन किया है।
व्याख्या—लेखक बताता है कि उनके सहपाठी पं. लक्ष्मीनारायण चौबे, भगवानदास हालना, भगवानदास मास्टर हैं । इन्होंने मिलकर एक ‘उर्दू बेगम’ नामक एक पुस्तक लिखी थी जिसमें उर्दू की उत्पत्ति और प्रचार से सम्बन्धित वृत्तात एक कहानी के ढंग पर दिया था। गर्मी के दिनों में कई आदमी छत पर बैठे चौधरी साहब से बातचीत कर रहे थे। उनके पास एक लैम्प जल रहा था । जब लैम्प की बत्ती भभकने लगी तभी चौधरी साहब ने नौकरों को आवाज़ दी। चौधरी साहब कहते जा रहे थे कि “ अरे ! जब फूट जाई तबे चलत आवह। ” अंत में चिमनी ग्लोब टूट गई लेकिन चौधरी साहब का हाथ लैम्प की तरफ़ न बढ़ सका।

विशेष –

  • शुक्ल जी ने अपने सहपाठियों के संग व्यतीत किए अनुभवों का वर्णन किया है।
  • भाषा सरल, सहज खड़ीबोली हिन्दी है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए- (5 × 2 = 10)

(क) सूरदास की झोंपड़ी में भैरों ने आग क्यों लगाई थी ? झोंपड़ी जल जाने पर भी सूरदास का किसी से बदला न लेना क्या संकेत करता है ? स्पष्ट कीजिए । (5)
उत्तर:
सूरदास की झोपड़ी में भैरों ने आग इसलिए लगाई थी क्योंकि वह उसे सबक सिखाना चाहता था । भैरों अपनी सामाजिक बदनामी का बदला लेना चाहता था। उसके भीतर ईर्ष्या का भाव विद्यमान हो गया था। भैरों समझता था कि सूरदास ने सुभागी को बहका दिया है इसलिए उसके भीतर बदले का भाव उत्पन्न हो गया है। उसने पैसे की पोठली चुरा ली तथा झोंपड़ी में आग लगा दी। झोंपड़ी जल जाने पर भी सूरदास का किसी से बदला न लेना इस ओर संकेत करता है कि वह गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित था। उसने सकारात्मक सोच को बनाए रखा।

(ख) ‘अपना मालवा – खाऊ – उजाडू सभ्यता में ‘ पाठ के आधार पर लिखिए कि आप पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाने के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहते हैं ? (5)
उत्तर:
‘अपना मालवा – खाऊ- उजाडू सभ्यता में, पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए-

  • नदियों के जल को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए तथा नदियों का महत्त्व समझना चाहिए।
  • वृक्षों को लगाना चाहिए तथा उसे काटने से बचाना चाहिए ।
  • औद्योगिक संस्थान शहर से दूर स्थापित करने चाहिए।
  • कम-से-कम वाहनों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि वाहनों के प्रयोग से वायु प्रदूषण अधिक होता है जिससे मौसम सम्बन्धित परिवर्तन होते हैं।

(ग) बिसनाथ आदि गाँव के बच्चों को आकाश भी अपने गाँव का ही एक टोला क्यों लगता था ? ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर लिखिए । (5)
उत्तर:
बिसनाथ आदि गाँव के बच्चों को आकाश भी अपने गाँव का ही टोला लगता है क्योंकि वे गाँव से बाहर की दुनिया को नहीं समझते हैं। वे केवल गाँव को ही जानते हैं। वे सदैव प्राकृतिक सौन्दर्य को आत्मसात् करना चाहते हैं। वे आकाश की वास्तविकता से परिचित न होते हैं । वे केवल कल्पना में डूबे रहते हैं। गाँव में कई ज्ञात और अज्ञात वनस्पतियों का सजीव वर्णन मिलता है। वे चंदा को मामा कहकर पुकारते हैं। वर्षा सीधे नहीं आती है, पहले बादल गरजते हैं । इस प्रकार उन्हें आकाश अपने गाँव का टोला लगता है ।

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