Saturday, 1 August 2026

Varn Vichar in Sanskrit Class 7 with Answers

Students rely on Deepakam Class 7 Solutions and Varn Vichar in Sanskrit Class 7 with Answers संस्कृत वर्ण विचार कक्षा 7 to clarify their doubts after class.

Varn Viched in Sanskrit Class 7

Varn Sanyojan in Sanskrit Class 7

Sanskrit Mein Varn Vichar Class 7 – Varn Vichar Class 7 Sanskrit

भाषा ध्वनि एवं प्रतीकों की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से हम अपने मन के भावों अथवा विचारों को दूसरों के समक्ष प्रकट करने तथा दूसरों के भावों या विचारों को जानने में सक्षम (समर्थ) होते हैं । भाषा शब्द ‘भाष्’ धातु से बना है। भाष् धातु का अर्थ है- बोलना। दूसरों के भावों को समझने का प्रयास ही भाषा कहलाता है।

संस्कृत भाषा

संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत को लिखने की लिपि (प्रणाली) ‘देवनागरी’ लिपि है। संस्कृत भाषा के व्याकरण को समझने के लिए उसके वर्णों/अक्षरों का ज्ञान होना आवश्यक है।

वर्ण

मुख से उच्चारण की जाने वाली सबसे छोटी ध्वनि वर्ण कहलाती है। इनके टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं; जैसे-अ, इ, च्, ग् आदि। वर्णों के समूह को वर्णमाला कहते हैं। संस्कृत भाषा में अड़तालीस (48) वर्णों का प्रयोग होता है।

वर्णों के प्रकार
संस्कृत भाषा में प्रयोग में आने वाले वर्ण तीन प्रकार के होते हैं

1. स्वर वर्ण जिन वर्णों का उच्चारण स्वतन्त्र रूप से किया जाता है। अर्थात् जिनके उच्चारण में किसी अन्य वर्ण की सहायता न लेनी पड़े, वे स्वर वर्ण अथवा अच् कहे जाते हैं। ये संख्या में तेरह (13) होते हैं; जैसे—अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लृ, ए, ऐ, ओ, औ ।

स्वर के भेद

स्वर तीन प्रकार के होते हैं

(i) ह्रस्व स्वर ह्रस्व स्वर वह है, जो कम समय में अर्थात् एक मात्रा के समय में बोले जाते हैं। यह संख्या में पाँच होते हैं। इन पाँच स्वरों को ‘मूल स्वर’ अथवा ‘एकमात्रिक’ भी कहते हैं। इसमें लृ का प्रयोग केवल संस्कृत में ही होता है । ये स्वर निम्न हैं

  • अ, इ, उ, ऋ, लृ ।

(ii) दीर्घ स्वर जो स्वर अधिक समय में (दो मात्रा के समय में) बोले जाते हैं, दीर्घ स्वर होते हैं। दो स्वरों के मेल से बनने के कारण इन्हें सन्धि स्वर तथा द्विमात्रिक स्वर भी कहते हैं। ये संख्या में आठ होते हैं।
जैसे –

  • आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ ।
  • अ + अ = आ
  • उ + उ = ऊ
  • अ + इ = ए
  • अ + ओ = औ
  • इ + इ = ई
  • ऋ + ऋ = ॠ
  • अ + उ = ऐ

(iii) प्लुत स्वर इनके उच्चारण में तीन मात्राओं का समय लगता है। इसलिए इन्हें त्रिमात्रिक स्वर भी कहते हैं। इनका प्रयोग वैदिक मंत्रों में होता है।
जैसे—

  • ओ३म्

नोट सामान्यतः स्वरों की संख्या 13 होती है किंतु ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत आदि भेदों के कारण इनकी संख्या 22 हो जाती है।

2. व्यंजन वर्ण व्यंजन वर्ण वे वर्ण हैं, वे वर्ण जिनमें उच्चारण की सरलता के लिए स्वर वर्णों का प्रयो किया जाता है।
जैसे – क् + अ = क । स्वर रहित व्यंजन के नीचे हलन्त का चिह्न (्) लगाया जाता है। व्यंजन वर्ण अर्द्धमात्रिक कहलाते हैं। व्यंजन के भेद
व्यंजन तीन प्रकार के होते हैं

(i) स्पर्श व्यंजन जिन वर्णों के उच्चारण में हमारी जिह्वा मुख के किसी भी भाग; जैसे – कण्ठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ आदि स्वर तंत्रियों का स्पर्श करती है, वे स्पर्श व्यंजन कहे जाते हैं। ये संख्या में पच्चीस (25) होते हैं;
जैसे—

  • क वर्ग — क्, ख्, ग्, घ्, ङ्।
  • च वर्ग — च्, छ्, ज्, झ्, ञ्।
  • ट वर्ग—ट्, ठ्, ड्, दू, ण्।
  • त वर्ग–त्, थ्, द्, ध्, न्।
  • पवर्ग — प्, फ्, ब्, भ्, म्।

नोट उपरोक्त सभी वर्गों के अंतिम वर्ण ड्, ञ्, ण्, न् और म् ‘अनुनासिक वर्ण’ कहलाते हैं।

(ii) अन्तःस्थ व्यंजन जिन वर्णों के उच्चारण में हमारी जिह्वा,
कण्ठ आदि स्वर तन्त्रियों का थोड़ा स्पर्श करती हैं, वे अन्तःस्थ व्यंजन कहे जाते हैं। ये संख्या में चार (4) होते हैं;
जैसे—य् व्, र्, ल्।

(iii) ऊष्म वर्ण जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर तंत्रियों से ऊष्म वायु रगड़कर बाहर निकलती है, वे ऊष्म वर्ण कहे जाते हैं। ये संख्या में चार (4) होते हैं; जैसे- श्, ष्, स्, ह्। इस प्रकार व्यंजनों की संख्या 33 होती है। स्वर और व्यंजनों को मिलाकर ही संस्कृत वर्णमाला का निर्माण होता है। इस वर्णमाला में वर्णों की संख्या (13+33) 46 मानी गई है।

3. अयोगवाह जिन वर्णों का प्रयोग पृथक् रूप से नहीं किया जा सकता, उन्हें अयोगवाह कहते हैं। इनके प्रयोग से ध्वनियों में भी परिवर्तन आ जाता है। ये वर्ण अनुस्वार और विसर्ग के रूप में भी जाने जाते हैं।
नोट महाभाष्य के अनुसार अयोगवाहों की संख्या 9 है।

  1. अनुस्वार नासिका से उच्चारित होने वाले वर्ण अनुस्वार कहे जाते हैं। इनका चिह्न अ (ं) होता है; जैसे—
    • पंखा, गंगा आदि ।
  2. अनुनासिक इसका प्रयोग स्वर के बाद होता है; जैसे –
    • धुँआ, चाँदनी आदि ।
  3. विसर्ग स्वर वर्णों के बाद लगने वाला चिह्न (:) विसर्ग कहलाता है। इसके उच्चारण में ‘ह’ की ध्वनि होती है; जैसे –
    • राम:, मोहन:, सिंहः आदि ।

संयुक्त वर्ण

जब कोई स्वर रहित वर्ण दूसरे वर्ण से जुड़ जाता है, तो इनके मेल से संयुक्त वर्ण बन जाता है । जैसे-

  • त् + र = त्र = त्रिशूल:, त्रयस्वः ।
  • श् + र = श्र = परिश्रमः, विश्रामः ।
  • द् + य = द्य = नद्यः, विद्यालयः ।
  • प् + र = प्र = प्रातः, प्रकाशः ।
  • क् + ष = क्ष = क्षत्रियः, क्षेत्र ।
  • ज् + ञ = ज्ञ = ज्ञानी, ज्ञातः ।

(i) वर्णसंयोग स्वर या व्यंजन वर्णों के संयोग से नए शब्दों का निर्माण होता है। स्वर व्यंजन के साथ जुड़कर मात्रा के रूप में दिखाई देता है।
जैसे-

  • र् + अ + म् + ए + श् + अ: = रमेश:
  • क् + अ + म् + अ + ल् + अ = कमल
  • अ + व् + अ + स् + अ + र् + अ = अवसर

(ii) वर्ण-विन्यास जब किसी शब्द में आए हुए वर्गों को अलग-अलग कर देते हैं, तो वह वर्ण विन्यास या वर्ण-विच्छेद कहलाता है।
जैसे –

  • फलम् = फ् + अ + ल् + अ + म्
  • रामः = र् + आ + म् + अ:
  • प्रतिष्ठा = प् + र् + अ + त् + इ + ष् + ठ् + आ।

वर्ण विन्यास के माध्यम से मात्रा गणना को भी समझा जा सकता है; जैसे—
Varn Vichar in Sanskrit Class 7 with Answers 3

उच्चारण स्थानानि

पाणिनी के द्वारा आठ उच्चारण स्थान बताए गए हैं। ये आठ उच्चारण स्थान हैं—उर (हृदय), कण्ठ, मूर्धा तालु, दाँत, औष्ठ, जिह्वा, नासिका। हृदय को छोड़कर अन्य सात उच्चारण स्थानों से ग्याहर (11) उच्चारण स्थानों का निर्माण होता है। इनमें नासिका का प्रयोग दो बार होता है ।

उच्चारण स्थानों की सहायता से उच्चारित किए जाने वाले वर्ण निम्नलिखित हैं

  • अ, कवर्ग, ह, विसर्ग – कण्ठः
  • इ, चवर्ग, य्, श् – तालु:
  • ऋ, टवर्ग, र्, ष् – मूर्धा:
  • लृ, तवर्ग, ल्, स् – दन्त्य
  • उ, पवर्ग – ओष्ठौ
  • ङ्, ञ्, ण्, न्, म् – नासिका
  • अनुस्वार (ं) – नासिका
  • ‘व्’ कार – दन्तौष्ठ
  • ए, ऐ – कंठ, तालु
  • ओ, औ – कण्ठौष्ठम्
  • क्, ख् – जिह्वामूलम्

Varn Vichar Sanskrit Class 7

अभ्यास प्रश्ना:

बहुविकल्पीय वं वर्णनात्मक प्रश्नोत्तर

1. अधोलिखितानां प्रश्नानां कृते सम्यक् विकल्पं चिनुत । (निम्नलिखित प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनिए ।)

(i) स्पर्श व्यंजनों की संख्या है।
(अ) 15
(ब) 21
(स) 25
(द) 26
उत्तर:
(स) 25

(ii) य्, श् वर्गों का उच्चारण स्थान है।
(अ) दन्ता:
(ब) तालुः
(स) कण्ठः
(द) मूर्धा:
उत्तर:
(ब) तालुः

(iii) ‘लृ’ वर्ण का उच्चारण स्थान है।
(अ) तालुः
(ब) कण्ठ:
(स) मूर्धा:
(द) दन्ताः
उत्तर:
(द) दन्ताः

(iv) ‘अनुस्वार’ का उच्चारण स्थान है।
(अ) दन्ता:
(ब) नासिका
(स) कण्ठः
(द) मूर्धा:
उत्तर:
(ब) नासिका

(v) दन्तोष्ठम् उच्चारण स्थान है।
(अ) व
(ब) ख
(स) च
(द) य
उत्तर:
(अ) व

(vi) ओ, औ वर्णों का उच्चारण स्थान है।
(अ) मूर्धा:
(ब) कण्ठोष्ठम्
(स) कण्ठतालु
(द) दन्तोष्ठम्
उत्तर:
(ब) कण्ठोष्ठम्

(vii) ‘विसर्ग’ का उच्चारण स्थान होता है।
(अ) नासिका
(ब) मूर्धा:
(स) कण्ठः
(द) तालुः
उत्तर:
(स) कण्ठः

2. अधोलिखितानां प्रश्नानां कृते सम्यक् विकल्पं चिनुत । (निम्नलिखित प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनिए ।)

(i) क वर्गस्य वर्णाः के सन्ति?
(अ) क् ख् ग् घ् ङ्
(ब) क ख ग घ ङ
(स) प् भ् म् य्
(द) च् छ ज झ
उत्तर:
(अ) क् ख् ग् घ् ङ्

(ii) ऊष्मवर्णाः श् ष् ……. ह् च भवन्ति ।
(अ) र्
(ब) स्
(स) ॠ
(द) लृ
उत्तर:
(ब) स्

(iii) व्यंजन वर्णाः ……. अपि कथ्यन्ते ।
(अ) अच्
(ब) हल्
(स) यण्
(द) एच्
उत्तर:
(ब) हल्

(iv) स्पर्श व्यंजना: कति सन्ति?
(अ) त्रिशंत्
(ब) विशंति:
(स) पञ्चविंशतिः
(द) त्रयोदश:
उत्तर:
(स) पञ्चविंशतिः

(v) वर्णानां समूहः …….. कथ्यते।
(अ) फूलमाला
(ब) करमाला
(स) वर्णमाला
(द) हारमाला
उत्तर:
(स) वर्णमाला

3. अधोलिखितानां पदानां वर्ण विच्छेदं कुरुतं । (निम्नलिखित पदों का वर्ण विच्छेद कीजिए ।)

  1. कपोतः = क् + …… + …… + ओ + त् + ……..
  2. स्वागतः = स् + …….. + …….. + …….. + …….. + त् + ……..
  3. राधिका = र् + …….. + …….. + …….. + ……..
  4. अहं = अ + ……. + ……. + ……. + …….
  5. कुत्र = …… + …….. + ….. + ……..
  6. कदापि = …. + ……. + …… + आ + …… + ……
  7. श्यामः = श् + ……. + ……. + …….. + …….

उत्तर:

  1. क् + अ + प् + ओ + त् + अ:
  2. स् + व् + आ + ग् + अ + त् + अ:
  3. र् + आ + ध् + इ + क् + आ
  4. अ + ह् + अ + म्
  5. क् + उ + त् + र् + अ
  6. क् + अ + द् + आ + प् + इ
  7. श् + य् + आ + म् + अ:

4. अधोलिखितानां शब्दानां वर्णसंयोगं कृत्वा लिखत । (निम्नलिखित शब्दों का वर्णसंयोग करके लिखिए।)

(क)

  1. क् + अ + म् + अ + ल् + आ + न् + इ
  2. स् + उ + न् + द् + अ + र् + अ + म्
  3. ग् + अ + च् + छ् + आ + म् + इ
  4. आ + ग् + अ + त् + य् + अ
  5. प् + अ + र् + अ + म् + ए + श् + व् + अ + र् + अः

उत्तर:

  1. कमलानि
  2. सुन्दरम्
  3. गच्छामि
  4. आगत्य
  5. परमेश्वरः

(ख)

  1. अहम् + अपि
  2. त्वम् + अपि
  3. अहम् + एव
  4. राम + एव
  5. राम + अवतारः

उत्तर:

  1. अहमपि,
  2. त्वमपि,
  3. अहमेव,
  4. रामेव
  5. रामावतार:

५. अधोलिखितानां स्पर्श व्यञ्जनानां वर्णक्रमे रिक्तस्थानानि पूरयत- (निम्नलिखित स्पर्श व्यंजनों के वर्णक्रम में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।)

  1. क् ……. …… ……. ङ्
  2. ……. …… ज् ….. ……..
  3. …..ठ् ….. …… ……
  4. ….. ….. ….. …… न्
  5. प् …… …….. …. म्

उत्तर:

  1. क् ख् ग् घ् ङ्
  2. च् छ् ज् झ् ञ्
  3. ट् ठ् ड् ढ् ण्
  4. त् थ् द् ध् न्
  5. प् फ् ब् भ् म्

६. कोष्ठकात् उचितं उत्तरं चित्वा लिखत । (कोष्ठक से उचित उत्तर चुनकर लिखिए।)

  1. य्, र्, ल्, व् (अन्तस्थः/अयोगवाहः)
  2. श्, ष्, स्, ह् (स्पर्श:/ऊष्मः)
  3. ई, ऊ, ओ, औ (दीर्घ स्वराः/ ह्रस्व स्वराः)
  4. छ्, ज् (कवर्ग/चवर्ग)
  5. ङ्, ञ्, ण्, न्, म् (स्पर्श: /अनुनासिक)
  6. त्, थ्, द् (अन्तस्थः / स्पर्शः)
  7. ट्, व्, ड्, द् (टवर्ग/पवर्ग)

उत्तर:

  1. अन्तस्थ:
  2. ऊष्मः
  3. दीर्घ स्वराः
  4. चवर्ग
  5. अनुनासिक
  6. स्पर्श:
  7. टवर्ग

७. कोष्ठकात् उचितं उत्तरं चित्वा लिखत । (कोष्ठक से उचित उच्चारण स्थान का चयन कीजिए।)

  1. कवर्ग (कण्ठ:/मूर्धा:)
  2. उ, पवर्ग (कण्ठ:/औष्ठौः)
  3. ण्, न्ं अनुस्वार ( तालव्य / नासिका)
  4. तवर्ग, लृ वर्ण (दन्त्य / नासिका)

उत्तर:

  1. कण्ठः
  2. औष्ठौ:
  3. नासिका
  4. दन्त्य

८. स्पर्शवर्णात् चिनुत । (स्पर्श वर्णों को चुनिए ।)

(i) च्, छ्, ज्, झ्, य्, र्, श, छ्, त्।
स्पर्श = (i) ….. (ii) …. (iii) …… (iv) …… (v) …… (vi) ……
(ii) दीर्घवर्णात् चिनुत्। (दीर्घ वर्णों को चुनिए ।)
ए, ओ, अ, आ, इ, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लृ
दीर्घ = (i) ……. (ii) …… (iii) …… (iv) ……. (v) ….. (vi) …..
उत्तर:
(i) च्, छ्, ज्, झ्, छ्, त्।
(ii) ए, ओ, ॠ लृ, आ, ऊ।

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