Wednesday, 13 May 2026

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

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Class 8 Social Science Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण Question Answer in Hindi

कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 के प्रश्न उत्तर भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 59)

प्रश्न 1.
दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य की राजनैतिक रणनीतियों की तुलना कीजिए। इनमें क्या समानताएँ और भिन्नताएँ थीं?
उत्तर:
समानताएँ :

  • केंद्रित शक्ति : दोनों में शासक के पास महत्वपूर्ण अधिकार थे। मुगल सम्राटों ने भी अपने साम्राज्य पर मजबूत नियंत्रण बनाए रखा।
  • सैन्य अभियान : दोनों ने अपने क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए सैन्य अभियानों का उपयोग किया।
  • कर प्रणाली : दोनों प्रणालियाँ अपने प्रशासन और सैन्य प्रयासों के लिए करों पर निर्भर थीं। मुगल साम्राज्य ने संसाधनों का प्रबंधन करने के लिए एक विकसित कर प्रणाली लागू की।

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण 1

प्रश्न 2.
विजयनगर साम्राज्य और अहोम साम्राज्य जैसे अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक समय तक पराजित होने से कैसे बच सके? उनकी सफलता में किन भौगोलिक, सैन्य और सामाजिक कारकों का योगदान था?
उत्तर:

  • भौगोलिक लाभ : दोनों साम्राज्य कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित थे। अहोम ने घने जंगलों और नदियों का उपयोग किया, जबकि विजयनगर साम्राज्य के पास पहाड़ों जैसी प्राकृतिक सुरक्षा थी।
  • मजबूत सेना : अहोम साम्राज्य में एक अनूठी पैइक प्रणाली थी. जिसमें हर सक्षम पुरुष सेना में सेवा करता था। इससे उन्हें एक बड़ी और प्रशिक्षित सेना बनाए रखने में मदद मिली।
  • सामरिक गठबंधन : विजयनगर साम्राज्य ने पड़ोसी राज्यों के साथ गठबंधन बनाए, जिससे उनकी स्थिति मज़बूत हुई और दुश्मनों के खिलाफ रक्षा की जा सकी।
  • अनुकूलनशीलता : दोनों साम्राज्यों ने अपनी सैन्य रणनीतियों (गुरिल्ला रणनीति) और शासन को चुनौतियों के अनुसार अनुकूलित किया, जिससे वे बाहरी दबावों का सामना लंबे समय तक कर सके।

प्रश्न 3.
कल्पना कीजिए कि आप अकबर या कृष्णदेवराय के दरबार में एक विद्वान हैं। अपने किसी मित्र को पत्र लिखकर वहाँ की राजनीति, व्यापार, संस्कृति और समाज का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रिय मित्र,
नमस्ते! मैं इस समय विजयनगर साम्राज्य में हूँ, जहाँ कृष्णदेवराय का शासन है। यहाँ की राजनीति बहुत मजबूत है। कृष्देवराय ने अपने साम्राज्य का विस्तार किया है और दक्कन पर प्रभुत्व स्थापित किया है।
व्यापार के लिए यहाँ विदेशी यात्री आते हैं, विशेषकर पुर्तगाली। वे यहाँ घोड़े बेचने आते हैं और राजा उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।
संस्कृति की दृष्टि से, यहाँ कला और साहित्य का बहुत विकास हुआ है। कृष्णदेवराय ने तेलुगु कवियों को संरक्षण दिया है।
समाज में लोग खुशहाल हैं और यहाँ के उद्यान, जलधाराएँ और बाजार बहुत सुंदर हैं।
आपका मित्र,
राम

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

प्रश्न 4.
अकबर, जो अपनी युवावस्था में एक क्रूर विजेता था, कुछ वर्षों बाद कैसे सहिष्णु और दयालु हो गया? ऐसे परिवर्तन का क्या कारण हो सकता है?
उत्तर:

  • राजनैतिक रणनीति : अकबर ने अपने साम्राज्य को स्थिर करने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ विवाह संबंध स्थापित किए और विभिन्न समुदायों के साथ सहिष्णुता की नीति अपनाई।
  • ज्ञान की खोज : अकबर ने फारसी और भारतीय ग्रंथों का अध्ययन किया, जिससे उसे विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों की समझ बढ़ी और वह अधिक दयालु बन गया।
  • सामाजिक सुधार : उसने ‘जजिया’ कर का उन्मूलन किया और सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता की नीति अपनाई, जिससे उसके शासन में शांति और एकता बढ़ी।
  • धार्मिक सहिष्णुता : अकबर ने ‘सुलह-ए-कुल’ (सभी के साथ शांति) की नीति अपनाई, जिससे उसने सभी धर्मों के प्रति सम्मान दिखाया।

प्रश्न 5.
यदि विजयनगर साम्राज्य तालीकोटा का युद्ध जीत जाता तो क्या होता? कल्पना कीजिए और दक्षिण भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास पर उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. राजनीतिक स्थिरता : विजयनगर साम्राज्य की जीत से दक्षिण भारत में राजनीतिक स्थिरता बनी रहती, जिससे अन्य छोटे राज्यों को एकजुट होने का मौका मिलता।
  2. संस्कृति का विकास : विजयनगर साम्राज्य की संस्कृति और कला को बढ़ावा मिलता। मंदिरों, साहित्य और संगीत में और भी समृद्धि होती।
  3. व्यापार में वृद्धि : विजयनगर की विजय से व्यापारिक मार्ग सुरक्षित होते, जिससे दक्षिण भारत में आर्थिक समृद्धि और व्यापारिक संबंधों में वृद्धि होती।

प्रश्न 6.
प्रारंभिक सिख पंथ द्वारा प्रचारित अनेक मूल्य जैसे समानता, सेवा और न्याय आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें से किसी एक मूल्य का चयन कीजिए और चर्चा कीजिए कि यह समकालीन समाज में कैसे प्रासंगिक है?
उत्तर:

  • समानता का सिद्धांत : सिख धर्म में सभी मनुष्यों को समान माना जाता है, चाहे वे किसी भी जाति, लिंग या धर्म के हों। यह विचार आज भी समाज में भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करता है।
  • समुदाय का समर्थन : सिख धर्म में ‘सेवा’ (नि:स्वार्थ सेवा) का अभ्यास दूसरों की मदद् करने पर जोर देता है। यह मूल्य आज के समय में लोगों को स्वयंसेवी कार्य करने और जरूरतमंदों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है।
  • वैश्विक आंदोलन : समानता का सिद्धांत मानव अधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलनों को प्रभावित करता है। कई संगठन और व्यक्ति सिख शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी दुनिया के लिए काम कर रहे हैं।

प्रश्न 7.
कल्पना कीजिए कि आप किसी बंदरगाह नगर (सूरत, कालीकट या हुगली) में एक व्यापारी हैं। वहाँ वस्तुओं, व्यापार करने वाले लोगों, जहाजों की आवा-जाही आदि के संबंध में आप जो दूश्य देखते हैं, उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बाजार मसाले, कपड़े, घोड़े और कीमती धातुओं से भरे होते हैं। व्यापारी कीमतों पर बातचीत करते हैं, जिससे माहौल जीवंत होता है।

  • यहाँ अरबी, फारसी और स्थानीय भारतीय व्यापारी मिलते हैं। वे केवल सामान ही नहीं, बल्कि कहानियाँ और संस्कृतियाँ भी साझा करते हैं।
  • जहाज लगातार आते-जाते रहते हैं, जिनमें घोड़े, विलासिता का सामान और मसाले होते हैं। लहरों की आवाज और नाविकों की चीत्कार से वातावरण गूँजता है।

भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण Class 8 Question Answer in Hindi

Class 8 Samajik Vigyan Chapter 2 Question Answer

महत्वपूर्ण प्रश्न (पृष्ठ 21)

प्रश्न 1.
इस कालखंड में विदेशी आक्रमणों एवं नए राजवंशों के उद्य ने भारत की राजनैतिक सीमाओं को किस प्रकार नया आकार दिया?
उत्तर:
11वीं शताब्दी में तुर्क और अफगान बलों के आक्रमण शुरू हुए।

  • नए राजवंशों का उदय हुआ। उदाहरण के लिए, दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई, जिसने पृथ्वरीराज चौहान को हराकर सत्ता हासिल की।
  • लगातार युद्धों और आक्रमणों के कारण भारत का राजनीतिक मानचित्र बदल गया।
  • विभिन्न राजवंशों के बीच गठबंधन और विज़य ने भी सीमाओं को और अधिक बदल दिया।

प्रश्न 2.
भारतीय समाज ने विदेशी आक्रमणों का सामना किस प्रकार किया? राजनैतिक अस्थिरता के वातावरण में भारतीय अर्थव्यवस्था ने किस प्रकार सामंजस्य स्थापित किया?
उत्तर:

  • भारतीय समाज ने अपने शहरों को फिर से बनाया और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित किया।
  • लोगों ने कला और संस्कृति में स्थानीय और विदेशी तत्वों को मिलाकर नया रूप दिया।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थी।
  • व्यापार में वृद्धि हुईं, भारतीय वस्त्रों का निर्यात बढ़ा और नए व्यापारी समुदाय विकसित हुए।
  • गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 में खालसा की स्थापना की, ताकि मुगलों के अत्याचार का सामना किया जा सके।

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

प्रश्न 3.
इस कालखंड ने लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव डाला?
उत्तर:

  1. विदेशी आक्रमणों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
  2. इस समय में विनाश के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनरुद्धार भी हुआ, जिससे नए कला रूपों का विकास हुआ।
  3. कुछ समुदायों को अत्याचार का सामना करना पड़ा, जबकि अन्य सहिष्णु शासकों के अधीन हुए।
  4. कृषि और व्यापार में वृद्धि हुई. लेकिन आम लोगों को अक्सर संघर्ष करना पड़ा।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 26)

प्रश्न:
चित्र 2.6 को (पाठ्यपुस्तक में) ध्यानपूर्वक देखें। आप क्या सोचते हैं, अलाउद्दीन खिलजी ने स्वयं को ‘द्वितीय सिकंदर’ क्यों कहा?
उत्तर:
अलाउदीन खिलजी ने खुद को ‘द्वितीय सिकंदर’ कहा, क्योंकि :

  • जैसे सिकंदर ने अपने साम्राज्य का विस्तार किया. खिलजी ने भी सैन्य अभियानों के माध्यम से अपने साम्राज्य को बढ़ाने का लक्ष्य रखा।
  • खिलजी ने उत्तर और मध्य भारत के बड़े क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, जो सिकंदर की विजय के समान था।
  • खिलजी ने इतिहास में एक स्थायी विरासत छोड़ने की इच्छा जताई, जैसे सिकंदर ने की थी।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 26)

प्रश्न:
आपके विचार से उन दिनों सेना को बनाए रखने एवं युद्ध संचालन के लिए किन प्रकार के संस्थनों की आवश्यकता होती होगी? समूहों में विभिन्न प्रकार के व्ययों पर चर्चा करें, जैसे- हथियारों या सैनिकों के लिए भोजन से लेकर युद्ध में पशुओं का उपयोग, सड़क निर्माण इत्यादि।
उत्तर:

  • हधियार : सैनिकों के लिए तलवारें, ढालें और तीर बहुत आवश्यक थे।
  • भोजन : सैनिकों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से भोजन की आपूर्ति जरूरी थी।
  • पशु : घोड़े और हाथी परिवहन और युद्ध में उपयोग के लिए महत्वपूर्ण थे।
  • चिकित्सा आपूर्ति : युद्ध के दौरान और बाद में घायल सैनिकों का इलाज करने के लिए चिकित्सा सामग्री की आवश्यकता होती थी।
  • प्रशिक्षण : सैनिकों को युद्ध कौशल में प्रशिक्षित करने के लिए हथियार, कवच आदि जैसे संसाधनों की आवश्यकता होती थी।

आइए विचार करें (पृष्ठ 29)

प्रश्न:
क्या आपको लगता है कि उस समय 75 मुखियाओं को एकजुट करना सरल कार्य रहा होगा?
उत्तर:
14 वीं शताब्दी में 75 मुखियाओं को एकजुट करना वास्तव में सरल नहीं था।

  • उस समय आधुनिक संचार के साधन नहीं थे। नेताओं को संदेशवाहकों पर निर्भर रहना पड़ता था।
  • प्रत्येक मुखिया के अपने स्वार्थ और प्राथमिकताएँ होती थीं। उन्हें एक सामान्य उद्देश्य के लिए एकजुट करना महत्वपूर्ण वार्ता की आवश्यकता थी।

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 31)

प्रश्न:
आपको क्यों लगता है कि मध्यकाल में ऐसे स्थानों को दुर्गों के निर्माण के लिए चुना गया? इसके पक्ष-विपक्ष पर चर्चा कीजिए। (संकेत- रणनीति, सुरक्षा, भेद्यता इत्यादि विषयों पर विचार करें।)
उत्तर:
दुर्गों के स्थान चुनने के कारण :

  • दुर्ग अक्सर पहाड़ियों या नदियों के पास बनाए जाते थे ताकि व्यापार मार्गों और गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके।
  • ऊँची जगहें और खड़ी ढलानें दुश्मनों के हमले को कठिन बनाती थीं।
  • ऊँची जगहों पर होने से रक्षकों को आने वाले खतरों को जल्दी पहचानने का मौका मिलता था।

पक्ष और विपक्ष :
पक्ष :

  • दुगों में बेहतर सुरक्षा मिलती थी।
  • प्राकृतिक अवरोधों के कारण बचाव करना आसान था।
  • आसपास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जा सकता था।

विपक्ष :

  • आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाना कठिन होता था।
  • विस्तार की संभावनाएँ कम होती थीं।
  • घिर जाने पर घेराबंदी का खतरा बना रहता था।

आइए विचार करें (पृष्ठ 32)

प्रश्न:
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इन तीन उपाधियों का क्या अर्थ है?
उत्तर:
उपाधियों का महत्व :

  • नरपति : जिसका अर्थ है ‘मनुष्य का स्वामी’। यह उनकी मानवता और न्याय के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
  • अश्वपति : जिसका अर्थ है ‘घोड़े का स्वामी’। यह उनकी सैन्य शक्ति और घुड़सवारी में कौशल को दर्शाता है।
  • छत्रपति : जिसका अर्थ है ‘छत्र का स्वामी’। यह उनके संरक्षण और साम्राज्य की रक्षा की जिम्मेदारी को दर्शाता है।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 35)

प्रश्न:
चित्र 2.14 में (पाठ्यपुस्तक में) आप कौन-से तत्व देखते हैं? वे उस समय की जीवन-शैली के बारे में क्या बताते हैं? ( संकेत-शस्त्र, जानवर, गतिविधियों को ध्यान से देखें।)
उत्तर:
चित्र में तलवारें, धनुष और ढालें दिखाई देती हैं। यह दर्शाता है कि उस समय युद्ध और लड़ाइयाँ सामान्य थीं।

  • घोड़े और हाथी जैसे जानवरों का उपयोग युद्ध और यात्रा के लिए किया जाता था।
  • चित्र में नृत्य, संगीत और दैनिक जीवन के दृश्य भी हैं। इससे पता चलता है कि कला और संस्कृति उस समय के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थीं।

आइए विचार करें (पृष्ठ 37)

प्रश्न:
भारत के विषय में बाबर के विचारों में आप क्या विशेष पाते हैं? समूहों में चर्चा करें।
उत्तर:

  • भारत की समृद्धि : बाबर ने भारत को समृद्ध देश माना, जहाँ सोने-चाँदी की भरपूरता थी।
  • प्राकृतिक सुंदरता : उसने भारत की जलवायु और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की, विशेषकर वर्षा ॠतु के समय।
  • कला और शिल्प : बाबर ने भारत में विभिन्न शिल्पकारों और कारीगरों की अनगिनत संख्या का उल्लेख किया, जो कला में कुशल थे।

Class 8 SST Chapter 2 Question Answer in Hindi भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

आइए विचार करें (पृष्ठ 40)

प्रश्न:
आपके विचार में अकबर ने साम्राज्य विस्तार हेतु अलग-अलग रणनीतियाँ क्यों अपनाईं, जबकि दिल्ली के पहले शासक प्राय: केवल सैन्य शक्ति पर ही निर्भर थे?
उत्तर:

  • राजनैतिक विवाह : अकबर ने पड़ोसी राज्यों की राजकुमारियों से विवाह कर संबंध स्थापित किए, जिससे साम्राज्य को स्थिरता मिली।
  • सहिष्णुता की नीति : उसने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता दिखाई और ‘सुलह-ए-कुल’ नीति अपनाई, जिससे विभिन्न समुदायों का समर्थन मिला।
  • स्थानीय शक्तियों का समावेश : अकबर ने राजपूतों और अन्य स्थानीय शक्तियों को दरबार में शामिल किया, जिससे उनकी सहायता और सहयोग प्राप्त हुआ।

आइए पता लगाएँ (पूष्ठ 41)

प्रश्न:
चित्र 2.3,2.12 और 2.16 (पाठ्यपुस्तक में) के मानचित्रों की तुलना करें। आप क्या अंतर देखते हैं? इनमें क्या ‘परिवर्तन’ हुए हैं?
उत्तर:
यह मानचित्र दिखाते हैं कि कैसे सदियों में राजाओं के राज्य और उनकी सीमाएँ बदलती रहीं। पहले तुगलक वंश और लोदी वंश जैसे बड़े साम्राज्यों ने इलाकों को एक करने की कोशिश की। बाद में यह बड़े राज्य टूट गए और विजयनगर, बहमनी और राजपूत जैसे छोटे-छोटे राज्य बन गए। फिर मुगलों ने आकर इन छोटे राज्यों को फिर से एक साथ जोड़ा।

आइए विचार करें (पृष्ठ 43)

प्रश्न:
हमने ऊपर देखा कि दिल्ली के सुल्तानों का औसत शासनकाल लगभग नौ वर्ष था। यह आँकड़ा मुगल सम्राटों के विषय में औरंगजेब तक 27 वर्ष का हो जाता है और यदि हम 19 वीं शताब्दी में साम्राज्य के अंत तक के सभी मुगल शासकों को सम्मिलित करें तो 16 वर्ष सभी के शासनकाल का औसत था। शासन के वर्षों की इन संख्याओं से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:

  • स्थिरता बनाम अस्थिरता : दिल्ली के सुल्तानों का औसत शासनकाल लगभग नौ वर्ष था। इसका कारण लगातार सत्ता संघर्ष और हिंसा थी। इसके विपरीत, मुगल सम्राटों जैसे कि औरगजेब का शासनकाल औसतन 27 वर्ष था, जो उनकी नेतृत्व में स्थिरता को दर्शाता है।
  • मजबूत नेतृत्व : मुगल सम्राट, जैसे अकबर और औरंगजेब. मजबूत नेता थे। उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार किया और एक बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा, जिससे वे सुल्तानों की तुलना में लंबे समय तक शासन कर सके।
  • शक्ति में कमी : 19वीं शताब्दी तक सभी मुगल शासकों का औसत शासनकाल 16 वर्ष हो जाता है। यह दिखाता है कि औरंगजेब के बाद साम्राज्य को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे शक्ति और स्थिरता में कमी आई और शासकों का शासनकाल छोटा हो गया।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 45)

प्रश्न:
अपने दो पुत्रों को लिखे गए पत्रों में औरंगजेब ने लिखा है, “मैं अकेला आया था और अकेला जा रहा हूँ। मैं नहीं जानता कि मैं कौन हूँ और क्या कर रहा था… मैंने न देश के लिए और न ही लोगों के लिए अच्छा किया है। भविष्य के लिए भी मेरे पास कोई आशा नहीं है… मैं जीवनभर निराश रहा और दीन-हीन अवस्था में ही जा रहा हूँ।” ये शब्द उनके व्यक्तित्व के कौन-से पक्ष को उजागर करते हैं? आपको उनके बारे में कैसा महसूस होता है?
उत्तर:

  • निराशा और अकेलापन : औरंगजेब ने अपने पत्र में कहा है कि वह अकेला आया और अकेला जा रहा है। यह उनके जीवन में निराशा और अकेलेपन को दर्शाता है।
  • असफलता की भावना : उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने देश और लोगों के लिए कुछ अच्छा नहीं किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें अपनी शासकीय नीतियों और कार्यों में असफलता का अनुभव हुआ।
  • भविष्य के प्रति निराशा : औरंगजेब ने भविष्य के लिए कोई आशा नहीं दिखाई यह उनके समय में मुगल साम्राज्य के पतन की ओर इशारा करता है।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 48)

प्रश्न:
कक्षा में चर्चा करें कि ‘पाइक’ प्रणाली ने अहोम साम्राज्य में लोगों के दैनिक-जीवन को चुनौतियों एवं लाभों के संदर्भ में कैसे प्रभावित किया तथा कैसे राजाओं को सेना और अर्थव्यवस्था दोनों का प्रबंधन करने में सहायता की?
उत्तर:
‘पाइक’ प्रणाली एक ऐसा तंत्र था जिसमें हर सक्षम व्यक्ति को श्रम या सैन्य सेवा के माध्यम से राज्य की सेवा करने के लिए कहा जाता था।
लाभ :

  • सामाजिक संरचना : इस प्रणाली ने समाज में एक प्रकार की जिम्मेदारी का अहसास कराया। लोग अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए प्रेरित हुए. जिससे सामदायिक भावना मजबूत हुई।
  • संस्कृति का समावेश : अहोमों ने स्थानीय संस्कृति को आत्मसात किया और विभिन्न धर्मों को प्रोत्साहित किया, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ी।
  • चुनौतियाँ : सेवा की आवश्यकता कभी-कभी बोझिल हो सकती थी, जिससे पुरुषों को अपने खेतों और परिवारों से दूर जाना पड़ता था।

सेना और अर्थव्यवस्था का प्रबंधन :

  • सैन्य प्रबंघन : शासकों को बिना स्थायी सेना के भी एक मजबूत बल बनाए रखने का मौका मिला। जब आवश्यकता होती, तब पाइक प्रणाली के तहत लोग सेना में शामिल होते थे।
  • आर्थिक विकास : पाइक प्रणाली ने कृषि को बढ़ावा दिया। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ और कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • स्थायी आधारभूत संरचना : इस प्रणाली ने शासकों को सार्वजनिक आधारभूत संरचना का निर्माण करने में मदद की, जैसे सड़कों और पुल्लों का निर्माण।

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आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 49)

प्रश्न:
अहोमों ने असम की नदियों, पहाड़ियों और जंगलों का उपयोग अपने लाभ के लिए कैसे किया? क्या आप उन उपायों के बारे में सोच सकते हैं, जिनसे भूगोल ने उनकी रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने और युद्ध लड़ने में सहायता प्रदान की?
उत्तर:

  • जंगलों का उपयोग : अहोम योद्धाओं ने घने जंगलों का फायदा उठाया। यहाँ छिपकर वे मुगलों पर अचानक हमले कर सकते थे।
  • नदियों का ज्ञान : उन्होंने स्थानीय नदियों का ज्ञान और लगातार गुरिल्ला रणनीति का प्रयोग हमले को विफल करने के लिए किया। इससे वे जलमार्गों का सही उपयोग कर सकते थे और दुश्मनों को रोकने में मदद् मिली।
  • भौगोलिक स्थिति : पहाड़ियों और जंगलों ने उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा दी। दुश्मन की सेना को इन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिससे अहोमों को लड़ाई में बढ़त मिली।

आइए विचार करें (पृष्ठ 52)

प्रश्न 1.
आपको ऐसा क्यों लगता है कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म परिवर्तन करने के स्थान पर यातनाएँ सहन कीं? उन्होंने क्यों सोचा कि उनका बलिदान कोई प्रभाव डालेगा?
उत्तर:
गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए यातनाएँ सहन कीं। उन्होंने सोचा कि उनका बलिदान लोगों को प्रेरित करेगा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस देगा।

प्रश्न 2.
सिख गुरुओं एवं खालसा ने किन मूल्यों को अपनाया?
उत्तर:
सिख गुरुओं और खालसा ने न्याय, समानता, करुणा, विनम्रता और आत्म-नियंत्रण जैसे मूल्यों को अपनाया।

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प्रश्न 3.
वर्तमान विश्व में वे कैसे प्रासंगिक हैं?
उत्तर:
सिख गुरुओं और खालसा ने न्याय, समानता, करुणा, विनम्रता, और आत्म-नियंत्रण जैसे मूल्यों को अपनाया। ये मूल्य सभी के लिए एक समानता का संदेश देते हैं।

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