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NCERT Class 7th Hindi Chapter 3 फूल और काँटा Question Answer
फूल और काँटा Class 7 Question Answer
कक्षा 7 हिंदी पाठ 3 प्रश्न उत्तर – Class 7 Hindi फूल और काँटा Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है ? उनके सामने तारा (★) बनाइए । कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?
- काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
- काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है। काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
- काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।

उत्तर:
- काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। (★)
प्रश्न 2.
कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?
- फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का ।
- फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
- फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
- फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
उत्तर:
- फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं। (★)
- फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं। (★)
प्रश्न 3.
कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है ?
- व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
- व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
- कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
- यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।

उत्तर:
- व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं। (★)
- यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है। (★)
प्रश्न 4.
कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है ?
- धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
- कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
- बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
- कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।

उत्तर:
- बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है। (★)
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-
अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर:
(1) कविता में काँटे के नकारात्मक स्वभाव का वर्णन है, इसी कारण इस विकल्प का चयन किया गया है।
(2) मेरे अनुसार इस प्रश्न के दो विकल्प चुनने का कारण है कि फूल और काँटा दोनों एक ही समान पालन-पोषण प्राप्त करने के बाद भी अलग-अलग प्रवृत्ति अपनाते हैं। फूल हम सभी को प्यारे लगते हैं किंतु काँटा जब हमें चुभता है तो हमें उस पर क्रोध ही आता है।
(3) मेरे द्वारा इस प्रश्न के भी दो विकल्पों का चयन किया गया क्योंकि मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने द्वारा किए अच्छे कार्यों तथा अपने उदार स्वभाव से ही पहचाना जाता है और इसी कारण उसके परिवार या कुल का मान बढ़ता है। अन्यथा कुछ ऐसे भी लोग हैं जो उच्च कुल में जन्म लेने के पश्चात अपने बुरे कार्यों से अपने वंश का नाश करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
(4) मेरे अनुसार ‘बड़प्पन’ का अर्थ व्यक्ति के द्वारा किए अच्छे कर्मों, दूसरों के प्रति उसके स्वभाव तथा उसके भीतर छिपे गुणों से है जो दूसरों की मौलिकता का हनन न करके उन्हें अपने साथ लेकर चलते हैं। ऐसे व्यक्ति जग में प्रसिद्धि पाते हैं क्योंकि उनका स्वभाव छल-कपट से रहित होता है तथा वे दूसरों के लिए भी हितकारी होते हैं।
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।)
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-
(क) “मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।’
उत्तर:
प्रकृति की परिस्थितियाँ जैसे बादल का बरसना, हवाओं का बहना आदि सभी परिस्थितियाँ फूल और काँटे के लिए समान होती हैं, फिर भी इनमें स्वभावगत अंतर होता है। ठीक इसी तरह से हालात समान होने पर भी व्यक्ति स्वभाव या व्यवहार में भिन्न हो सकते हैं। फूल और काँटे का प्रतीकात्मक प्रयोग कर कवि ने हमें अप्रत्यक्ष रूप से यह समझाने का प्रयास किया है कि व्यक्ति के स्वभाव और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि वह फूल की तरह सुख दे या काँटे के समान दुख ।

(ख) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर । ”
उत्तर:
उच्च कुल में जन्म लेना ही मात्र किसी की विशेषता या गुण नहीं है, जब तक कि व्यक्ति के व्यवहार में विनम्रता, दया, परोपकारिता आदि का भाव विद्यमान न हो। यदि किसी व्यक्ति के भीतर गुणों की कमी हो, उसके व्यवहार या चरित्र में महानता न हो, तो एक श्रेष्ठ कुल या ऊँचे परिवार में उसका जन्म लेना व्यर्थ हो जाता है।
कहने का अभिप्राय यह है कि व्यक्ति स्वयं अपने आचरण तथा गुणों से अपने कुल का नाम ऊँचा करता है तथा उसे सार्थक बनाता है। इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि रावण, जो कि परम ज्ञानी तथा शक्तिशाली था, वह उच्च कुल में जन्मा था, किंतु अहंकार और अधर्म के कारण उसका नाश हुआ। वहीं दूसरी ओर राम भी श्रेष्ठ कुल से संबंधित थे, किंतु अपने व्यवहार, सहिष्णुता एवं धर्म का पालन करने के कारण उन्होंने श्रेष्ठता अर्जित की और महान बने ।
अतः व्यक्ति को इस बात का घमंड नहीं करना चाहिए कि वह किस कुल में जन्मा है, अपितु वह अपने आचरण से समाज को क्या दे रहा है, यह उसके लिए आवश्यक होना चाहिए।
मिलकर करें मिलान
• इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ के उदाहरण द्वारा लोगों के स्वभावों के अंतर और समानताओं की ओर संकेत किया गया है। दूसरे शब्दों में, ‘फूल’ और ‘काँटा’ प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए कि फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। इन्हें उपयुक्त प्रतीकों से जोड़िए-

उत्तर:

• विद्यार्थी अपने साथियों के साथ मिलकर इनको अन्य प्रतीक के रूप में भी बता सकते हैं; जैसे-
फूल – विनम्रता, सौम्यता, सज्जनता, त्याग, सेवा आदि ।
काँटा – अहंकारिता, क्रूरता, दुर्गुण, कटुता, आत्म- केंद्रिकता आदि ।
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो सभी पौधों पर समान रूप से लागू होती हैं?
उत्तर:
सभी पौधों पर समान रूप से लागू होने वाली समानताएँ, जिनका उल्लेख कविता में किया गया है। वे हैं-
- एक ही धरती पर जन्म लेना ।
- रात में चाँद की चाँदनी समान रूप से पड़ना ।
- बादलों का समान रूप से बरसना ।
- हवा का समान रूप से मिलना।
(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन – सा अंतर दिखाई दिया?
उत्तर:
फूल कोमल, सुखदायी, सुगंध देने वाला तथा प्रेमपूर्वक व्यवहार करने वाला है किंतु इसके विपरीत काँटा कठोर, कष्टदायी तथा अहंकारी प्रवृत्ति वाला है।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता में मुख्य रूप से यह बात कही गई है कि व्यक्ति का स्वभाव ही उसे महानता या हीनता की ओर अग्रसर करता है। हमें फूल की भाँति विनम्र, सेवा-भाव से युक्त तथा दूसरों को आनंद देने वाला होना चाहिए, न कि काँटे जैसा जो दूसरों को पीड़ा और दुख ही प्रदान करता है। कुल, जाति या परिस्थितियाँ नहीं, अपितु व्यक्ति का आचरण, उसका अच्छा स्वभाव तथा उसके कर्म ही उसकी असली पहचान बनते हैं।
(घ) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर ।” उदाहरण देकर समझाइए |
उत्तर:
इस पंक्ति में यह बताया गया है कि कुल की प्रतिष्ठा तब तक कोई मायने नहीं रखती जब तक कि व्यक्ति के स्वभाव या उसके कर्मों से बड़प्पन न दिखे। इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि दुर्योधन जो धृतराष्ट्र का पुत्र और कुरु वंश का राजकुमार था, वह अपने अहंकार, द्वेष और अधर्म के कारण निंदनीय बना।
(ङ) “ है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर । ” लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
उत्तर:
लोग ऐसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं जो फूल की भाँति विनम्र, हितकारी, दयालु तथा सुखदायी हों और ऐसे स्वभाव वाले लोगों से दूर रहना पसंद करते हैं जो काँटे की भाँति कठोरता रखने वाले, स्वार्थी तथा अहित कर हों।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
चाँदनी के बिना पौधे अंधकार में रहेंगे, वे मुरझाने लगेंगे, क्योंकि उन्हें रात में चंद्रमा की शीतलता प्राप्त नहीं हो सकेगी। हवा के बिना बाकी पौधे ठीक से बड़े नहीं हो पाएँगे, कुम्हलाने लगेंगे। उनकी पत्तियाँ सूखने व गिरने लगेंगी। मेघ के जल के बिना अन्य पौधे प्यासे रह जाएँगे, उनका जीवन खत्म हो जाएगा, क्योंकि उनकी मिट्टी सूख जाएगी। इन सबके बिना बाकी पौधे मुरझाए हुए लगेंगे तथा उनकी जीवन-शक्ति खत्म – सी हो जाएगी।
(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती ?
उत्तर:
यदि सभी पौधे एक जैसे होते जो दुनिया में सब जगह एक ही आकार की पत्तियों, रंग तथा सुगंध वाले फूल होते । इस एकरूपता से दुनिया नीरस और उबाऊ लगती। कहीं कोई नयापन, विविधता नहीं होती। मनुष्य को प्रकृति से किसी प्रकार की प्रेरणा नहीं मिलती तथा वह प्रेरणा रहित हो जाता।

(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
उत्तर:
काँटे पौधों के सुरक्षा कवच होते हैं। यदि हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो फूलों की रक्षा करने वाला कोई नहीं होता । पशु-पक्षी उनको आसानी से खराब कर देते। कई स्थानों पर विशेष कर रेगिस्तानी और कठोर जलवायु वाले क्षेत्रों में पौधों का अस्तित्व संकट में पड़ जाता क्योंकि बिना काँटों के वे जीवित नहीं रह पाते।
(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा ?
उत्तर:
तितली का काँटे से संवाद कुछ इस प्रकार का होगा-
तितली – काँटे भैया! आज तो बहुत चमचमाती धूप है, पर तुम अब भी पहले जैसे ही दिख रहे हो।
काँटा – तितली बहन मैं तो ऐसा ही हूँ । तुम्हारी तरह रंग-बिरंगी और मुलायम होना मेरे नसीब में नहीं!
तितली – अरे नहीं भैया! तुम अपने को कम मत समझो। तुम्हारे बिना तो फूलों की रक्षा ही नहीं होती।
काँटा – (आश्चर्य से) क्या सच में? मुझे तो सब दूर से देखकर डरते हैं।
तितली – (हँसते हुए) तुम बाहर से कठोर हो, लेकिन तुम्हारे अंदर भी जीवन के लिए प्रेम है। तुम तो फूलों के रक्षा कवच हो ।
काँटा – (मुसकराकर) शुक्रिया तितली बहन, तुम्हारी बातें सुनकर अच्छा लगा। चलो, आज से हम अच्छे दोस्त हुए !
तितली – हाँ-हाँ, क्यों नहीं। आज से हम पक्के दोस्त हैं।
(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए ।
उत्तर:
मैं काँटे और फूल दोनों के गुणों को अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि फूल हमें कोमलता, मधुरता, प्रेम, करुणा आदि की बात, सिखाते हैं। वहीं दूसरी ओर काँटे से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें कठिन परिस्थितियों में कैसे टिके रहना है। ये हमें शक्तिशाली बनने तथा कठिनाइयों का सामना करने की सीख देते हैं।
शब्द से जुड़े शब्द
• नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘बड़प्पन’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

उत्तर:

(विद्यार्थी समूह में चर्चा कर अन्य शब्द भी लिख सकते हैं।)
बड़प्पन
‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ होता है— बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्व, गौरव। इसका उपयोग मुख्य रूप से व्यक्तित्व, गुण और चरित्र की ऊँचाई या महानता बताने के लिए किया जाता है, जैसे उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया।
• नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं जो किसी भाव को व्यक्त करते हैं। इनमें से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव को व्यक्त करते हैं, उन पर एक गोला बनाइए, जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते हैं, उनके नीचे रेखा खींचिए ।

उत्तर:

कविता की रचना

“फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला ।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली का जी खिला।”
इस पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस शब्द को पहले कहीं पढ़ा है? यह शब्द है – ‘और’। कविता में ‘र’ वर्ण नहीं लिखा गया है। कई बार बोलते हुए हम शब्द की अंतिम ध्वनि उच्चरित नहीं करते हैं । कवि भी कविता की लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते हैं। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे- ‘प्यार में डूबी तितलियों’ के स्थान पर ‘प्यार- डूबी तितलियों’ का प्रयोग किया गया है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी ‘तुकांत’ है आदि।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
भाषायी विशेषताओं की सूची निम्नलिखित रूप से बनाई जा सकती है-
- कविता की गेयता बनाए रखने के लिए पदक्रम का अनूठा प्रयोग देखने को मिलता है; जैसे- ‘ हैं जनम लेते जगह में एक ही’।
- तुकांता शब्दों की वजह से संगीतात्मकता प्रभावी रूप से व्यक्त हुई है; जैसे— पालता – डालता, बही- नहीं आदि।
- कविता में लाक्षणिता का उपयोग किया गया है; जैसे- ‘फूल लेकर तितलियों की गोद में ‘ ।
- कविता में उपमा अलंकार का सुंदर और स्वाभाविक प्रयोग दिखता है; जैसे- ‘जीवन एक फूल की तरह है और कठिनाइयाँ काँटों की तरह ।
(नीचे दी गई विशेषताओं की सूची को भी सूची में शामिल कर सकते हैं।)
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं । विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए। आप कविता की पंक्तियों में एक से अधिक विशेषताएँ भी ढूँढ़ सकते हैं।

उत्तर:
1. – 2, 4
2. – 4, 5
3. – 1
4. – 2, 6
5. – 4
कविता का सौंदर्य
(क) आगे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं, उन पर घेरा बनाइए ।

उत्तर:
1.

2.

(ख) अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए, कि कौन-सा शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है और क्यों?
उत्तर:
कविता की इन पंक्तियों में सबसे अधिक वही शब्द जँच रहे हैं जिनका प्रयोग कवि द्वारा किया गया है। इनके अतिरिक्त कुछ और शब्द भी चिह्नित किए गए हैं; जो कि जँच रहे हैं। कारण यह है कि तत्सम शब्दों के तत्सम शब्द ; देशज शब्दों के साथ देशज शब्द तथा तद्भव शब्दों साथ तद्भव शब्दों का प्रयोग अच्छा लगता है।
विशेषण

“भौंर का है बेध देता श्याम तन।”
‘श्याम तन’ का अर्थ है- काला शरीर । यहाँ ‘श्याम’ शब्द भँवरे के ‘शरीर’ की विशेषता बता रहा है, अर्थात् ‘श्याम’ ‘विशेषण’ है। ‘तन’ एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् ‘तन’ ‘विशेष्य’ शब्द है ।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए-

उत्तर:

(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए-

उत्तर:
1. सुंदर, रंग-बिरंगे
2. मोटा, नुकीला
3. घना, काला
4. आधा, पूरा
5. अँधेरी, डरावनी
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों ?
उत्तर:
मैं फूल को चुनूँगा / चुनूँगी क्योंकि वह दूसरों को खुशियाँ बाँटता है। लोगों के जीवन में सुगंध और सुंदरता भर देता है। फूल की भाँति हम भी लोगों में प्रेम, खुशियाँ आदि बाँटने का कार्य कर सकते हैं।
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता और आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
क्या-क्या करते हैं- मैं अपने परिवार के सदस्यों के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए बड़ों की सभी बातों का पालन करता/करती हूँ, घर के छोटे-छोटे कामों में अपनी माँ का हाथ बँटाता/बँटाती हूँ; जैसे- चीज़ों को सही जगह पर रखना आदि ।
मित्रों के जीवन में प्रसन्नता लाने के लिए मैं उन्हें हँसाता/हँसाती हूँ। उनसे ईर्ष्या नहीं करता/करती। अपना सामान साझा करता / करती हूँ ।
क्या – क्या कर सकते हैं- परिवार के सदस्यों व मित्रों से हम अपनी गलती के लिए क्षमा माँग सकते हैं। एक अच्छा श्रोता बनकर उनकी बात सुन सकते हैं। बड़ों के साथ बैठकर बातें कर सकते हैं। मित्रों को सरप्राइज़ दे सकते हैं। खुले दिल से सराहना कर सकते हैं। दादा-दादी / नाना-नानी के साथ समय बिता सकते हैं।
(ग) ‘फूल’ और ‘काँटे’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं। फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए ।
(संकेत – वस्तुएँ, जैसे- नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे- शांत और क्रोधी; स्वाद, जैसे- खट्टा-मीठा; रंग, जैसे- काला- सफेद, अनुभव, जैसे- सुख-दुख आदि)
उत्तर:
- वस्तुएँ – आग – पानी
- स्वभाव – दयालु, निर्दयी
- स्वाद – फ़ीका – चटपटा
- रंग – श्वेत – श्याम
- अनुभव – आशा – निराशा
(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन। ” आप अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए, जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए |
उत्तर:
मेरे आस-पास की एक समस्या जो काँटे के समान चुभती है, वह है- कठोर भाषा में की गई ‘शब्दों की चोट ‘ ।
कई बार लोग गुस्से में या मज़ाक में ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं जो हमारे मन को गहरी चोट पहुँचाते हैं। जैसे काँटा उँगली में चुभता है, वैसे ही ये कठोर या अपमानजनक शब्द हमारे हृदय में भीतर तक चुभते हैं।
काँटे जैसी इस समस्या का समाधान- शब्दों में बहुत ताकत होती है, इसलिए पहले रुककर सोचें, क्या कह रहे हैं और फिर बोलें। हर व्यक्ति के भीतर भावनाएँ होती हैं। हमें सीखना चाहिए कि दूसरों की भावनाओं की कद्र कैसे करें। अगर गलती से कुछ कठोर कह दिया हो, तो माफ़ी माँगें और सुधार लाएँ। इससे संबंधों में मज़बूती आती है और हम खुद भी बेहतर बनते हैं।
सृजन
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनीत रंग भर सकते हैं। आप बिना रंगों या केवल उपलब्ध रंगों की सहायता से भी चित्र बना सकते हैं। चित्र बिलकुल मौलिक लगे इसकी चिंता करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप अपनी कल्पना को जैसे मन करे, वैसे साकार कर सकते हैं।
उत्तर:
(विद्यार्थी अपनी कल्पना को उड़ान देते हुए इस कविता पर आधारित चित्र बनाएँगे।)
(ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से लिखिए । संवाद का विषय निम्नलिखित हो सकता है-

- उनके गुणों और विशेषताओं पर चर्चा ।
- यह समझाना कि उनका जीवन में क्या योगदान है।
उदाहरण-
फूल – मैं दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ।
काँटा – और मैं संघर्ष की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए आया हूँ।
उत्तर:
फूल – (मुसकराते हुए) नमस्ते काँटे भाई ! लोग मुझे देखकर खुश होते हैं, मेरी खुशबू से महकते हैं। कहते हैं कि मैं सुंदरता और प्रेम का प्रतीक हूँ।
काँटा – (थोड़ा गंभीर होकर) नमस्ते फूल भाई ! तुम्हारी कोमलता और महक सचमुच मन को भाती है। लेकिन क्या तुम जानते हो कि अगर मैं न होता, तो तुम्हारी यह सुंदरता कोई भी आसानी से छीन लेता ।
फूल – (चौंकते हुए) बिलकुल सही कहा ! तुम तो मेरी रक्षा करते हो। जब भी कोई मुझे तोड़ने आता है, उसका पहले तुमसे सामना होता है।
काँटा – (गर्व से) हाँ, मैं भले ही कठोर हूँ, पर मेरा उद्देश्य सिर्फ़ सुरक्षा है। मैं संघर्ष और सहनशीलता का प्रतीक हूँ। जीवन में हर चीज़ कोमल नहीं होती, कभी-कभी कठोरता भी ज़रूरी होती है।
फूल – (सोचते हुए) सच है । मैं तो सभी को सौंदर्य, प्रेम और शांति देता हूँ, लेकिन तुम्हारे बिना मेरी पहचान अधूरी है। अगर तुम न हो, तो मैं सुरक्षित नहीं।
काँटा – और मैं, जिसे लोग नापसंद करते हैं, दरअसल उन्हें यह सिखाता हूँ कि जीवन में हर सुंदर चीज़ के साथ कुछ कठिनाइयाँ भी होती हैं, जैसे तुम्हारे साथ मैं हूँ।
फूल – (मुसकराकर) तुम्हारी बातों से तो आज मुझे भी नई सीख मिली। कोमलता और कठोरता, दोनों मिलकर ही जीवन को संतुलित बनाते हैं।
काँटा – हाँ, और इसी से हमारी पहचान है कि एक प्रेम और सौंदर्य देता है, दूसरा साहस और सुरक्षा । दोनों की बराबर ज़रूरत है।
वाद-विवाद
विभिन्न समूह बनाकर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है— ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है’।
कक्षा में वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन करने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-

- आपकी कक्षा में पहले से सात-आठ समूह बने होंगे। आधे समूह ‘फूल’ के पक्ष में तर्क देंगे। आधे समूह ‘काँटे’ के पक्ष में तर्क देंगे।
- एक समूह निर्णायक मंडल की भूमिका निभाएगा। निर्णायक मंडल का काम होगा—
- तर्कों को ध्यान से सुनना।
- प्रस्तुति शैली और तर्कों की गहराई के आधार पर अंकों का निर्धारण करना।
- प्रत्येक समूह को तैयारी के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा ताकि वे अपने तर्क तैयार कर सकें। सभी समूह अपने-अपने तर्क मिलकर सोचेंगे और लिखेंगे।
- प्रत्येक समूह को अपने पक्ष में बोलने के लिए तीन-चार मिनट का समय मिलेगा। दूसरा समूह पहले समूह के तर्कों पर एक-दो मिनट में उत्तर देगा या उनसे प्रश्न पूछेगा।
- सभी प्रतिभागियों को एक-दूसरे की बात ध्यान से सुननी होगी। बीच में टोकने की अनुमति किसी को नहीं होगी।
- सभी समूहों का क्रम तय किया जाएगा। वाद-विवाद के लिए क्रम इस प्रकार हो सकता है—
- समूह 1 (फूल के पक्ष में)
- समूह 2 (काँटे के पक्ष में)
- समूह 3 (फूल के पक्ष में)
- समूह 4 (काँटे के पक्ष में)
- जो और इसी क्रम से आगे बढ़ें।
समूह निर्णायक मंडल का कार्य कर रहा है, वह वाद-विवाद के अंतराल में तर्क, भाषा कौशल और प्रस्तुति शैली के आधार पर अंकों का निर्धारण करेगा। - निर्णायक मंडल अंकों के आधार पर विजेता समूह का निर्णय करेगा।
- समूहों के प्रयासों के लिए तालियाँ बजाएँ और उनकी प्रशंसा करें। संभव हो तो विजेता समूह को कोई पुरस्कार या प्रमाणपत्र दिया जा सकता है।
- विद्यार्थी वाद-विवाद गतिविधि के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।

उत्तर:
- कक्षा में विद्यार्थियों के विभिन्न समूह बनाकर इस वाद – विवाद गतिविधि का आयोजन किया जाएगा तथा पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या-38 पर दिए गए सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर समूह अपनी प्रस्तुति देंगें।
आज की पहेली
• नीचे कुछ ऐसे पेड़-पौधों के चित्र दिए गए हैं, जिनमें फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते हैं। चित्रों को सही नामों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए-

उत्तर:

खोजबीन के लिए
- रंग-बिरंगे फूलों से
https://www.youtube.com/watch?v=rIXpoQy4sHc - फूलों की घाटी में – कवित
https://www.youtube.com/watch?v=yyrbxCtbgWg
उत्तर:
(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ संख्या – 40 पद दिए गए लिंक पर ‘रंग-बिरंगे फूलों से’ तथा ‘फूलों की घाटी में – कविता’ पढ़ेंगे।)
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 3 हिमालय की बेटियां (Old Syllabus)
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
लेख से
प्रश्न 1.
नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफ़ी पुरानी है। लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
उत्तर
नदियों को माँ स्वरूप तो माना हो गया है लेकिन लेखक नागार्जुन ने उन्हें बेटियों, प्रेयसी व बहन के रूप में भी देखा है।
प्रश्न 2.
सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
उत्तर-
सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय से निकलने वाली प्रमुख और बड़ी नदियाँ हैं। इन दो नदियों के बीच से अन्य दो छोटी-बड़ी नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ दयालु हिमालय के पिघले दिल की एक-एक बूंद इकट्ठा होकर ये नदी बनी हैं। ये नदियाँ सुंदर एवं लुभावनी लगती हैं।
प्रश्न 3.
काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
उत्तर-
जल ही जीवन है। ये नदियाँ हमें जल प्रदान कर जीवनदान देती हैं। ये नदियाँ लोगों के लिए कल्याणी एवं माता के समान पवित्र हैं। इन नदियों के किनारे ही लोगों ने अपनी पहली बस्ती बसाई और खेती बाड़ी करना शुरू किया। इसके अलावे ये नदियाँ गाँवों और शहरों की गंदगी भी अपने साथ बहाकर ले जाती रही हैं। इनका जल भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में विशेष भूमिका निभाता है। मानव के आधुनिकीकरण में जैसे-बिजली बनाना, सिंचाई के नवीन साधनों आदि में इन्होंने पूरा सहयोग दिया है। मनुष्य के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधों आदि के लिए बहुत जरूरी है। इस प्रकार नदियाँ हमारे लिए कल्याणकारी हैं। यही कारण है कि काका कालेलकर ने उन्हें लोकमाता कहा है।
प्रश्न 4.
हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है?
उत्तर-
हिमालय की यात्रा में लेखक ने नदियों, पर्वतों, बर्फीली पहाड़ियों, हरी-भरी घाटियों तथा महासागरों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
लेख से आगे
प्रश्न 1.
नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित नदियों के वर्णन से कीजिए।
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं पुस्तकालय की सहायता से करें।
प्रश्न 2.
गोपालसिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘हिमालय’ तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ‘हिमालय के आँगन में’ पढ़िए और तुलना कीजिए।
उत्तर-
हिमालय
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
साकार, दिव्य गौरव विराट,
पौरुष के पूंजीभूत ज्वाल!
मेरे जननी के हिम-किरीट!
मेरे भारत के दिव्य भाल?
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
युग-युग अजेय, निबंध, मुक्त,
युग-युग गर्वोन्नत, नित महान,
निस्सीम व्योम में तान रहा।
युग से किस महिमा का वितान?
कैसी अखंड यह चिर समाधि?
यतिवर! कैसा यह अमर ध्यान ?
तू महाशून्य में खोज रहा
किस जटिल समस्या का निदान ?
उलझन का कैसा विषम जाल?
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
ओ, मौन, तपस्या-लीन यती।
पलभर को तो कर दृगुन्मेष।
रे ज्वालाओं से दग्ध, विकल
है तड़प रहा पद पर स्वदेश।
सुखसिंधु, पंचनद, ब्रह्मपुत्र,
गंगा, यमुना की अमिय-धारे
जिस पुष्प भूमि की ओर बही
तेरी विगलित करुणा उदार
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
-रामधारी सिंह दिनकर
उपरोक्त कविता की तुलना यदि नागार्जुन द्वारा लिखित निबंध से करें तो हम पाते हैं कि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कविता में हिमालय की विशालता का वर्णन किया है। इस कविता में दर्शाया गया है कि हिमालय का भारतवासियों से प्राचीन काल से अत्यंत अनिष्ठ संबंध है। भारत धरती का मुकुट हिमालय पर्वत अपनी जड़ों को पाताल तक ले जाए हुए। है। उसके धवल शिखर आकाश का चुंबन करते हैं। यहाँ कवि दिनकर ने हिमालय को प्राचीन काल से समाधि में लीन होकर किसी समस्या का हल ढूँढ़ने का प्रयास किया है। वहीं लेखक नागार्जुन ने अपने निबंध में हिमालय का वर्णन नदियों के पिता के रूप में किया है जो अपनी बेटियों के लिए परेशान है।
प्रश्न 3.
यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं?
उत्तर-
1947 के बाद से आजतक नदियाँ उसी प्रकार हिमालय से बह रही हैं, लेकिन अब हिमालय से निकलने वाली नदियाँ प्रदूषण का शिकार हो चुकी हैं। अब जनसंख्या वृधि औद्योगिक क्रांति, मानवीय तथा प्रशासकीय उपेक्षा के कारण नदी के जल की गुणवत्ता में भी भारी कमी आई है। निरंतर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह बाँध बनाने के कारण जल-प्रवाह में न्यूनता हो गई जो कि मानव अहितकारी है। गंगा जल की पवित्रता समाप्त हो चुकी है।
प्रश्न 4.
अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?
उत्तर-
हिमालय पर्वत पर देवताओं का वास माना जाता है। ऋषि-मुनि यहाँ तपस्या करते हैं इसलिए कालिदास ने हिमालय को देवात्मा कहा।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1.
लेखक ने हिमालय से निकलनेवाली नदियों को ममता भरी आँखों से देखते हुए उन्हें हिमालय की बेटियाँ कहा है। आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे? नदियों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कार्य हो रहे हैं? जानकारी प्राप्त करें और अपना सुझाव दें।
उत्तर-
लेखक ने नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहा है, क्योंकि वह नदियों का उद्गम स्थल है। पर हम उन्हें माँ समान ही कहना चाहेंगे, क्योंकि वे हमें तथा धरती को जल प्रदान करती हैं। हमारी प्यास बुझाने के साथ-साथ खेतों की भी प्यास बुझाती हैं। एक सच्चे माँ एवं मित्र के रूप में नदियाँ हमारी सदैव हितैषी रही हैं और उन्होंने भलाई की है।
नदियों की सुरक्षा के लिए सरकार प्रयास तो कर रही है, पर वे अपर्याप्त हैं। उनमें दिखावा अधिक है वास्तविकता कम है। अभी तक उनमें गिरने वाले कारखाने के कचरे को रोका नहीं जा सका है। फिर भी नदियों की सुरक्षा के लिए हमारे देश में कई योजनाएँ बनाई जाती रही हैं, जो निम्न हैं
नदियों के जल को प्रदूषण से बचाना, बहाव को सही दिशा देना, अधिक नहरों के निर्माण पर रोक लगाना, जल का कटाव रोकना। नदियों की सफाई की उचित व्यवस्था करना आदि है, परंतु आज इस बात की आवश्यकता है कि शीघ्रता से इन योजनाओं को लागू कर दिया जाए। नदियों के सफ़ाई की उचित व्यवस्था की जाए। उनमें कचरे फेंकने पर रोक लगाई जाए, कल-कारखानों से निकलने वाले दूषित जल, रसायन तथा शव प्रवाहित करने पर रोक लगाई जाए। अतः नदियों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जन-चेतना जगानी होगी। सरकार को भी कड़े उपाय करने होंगे।
प्रश्न 2.
नदियों से होनेवाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों को एक निबंध लिखिए।
उत्तर
सभी विद्यार्थी मिलकर चर्चा कीजिए। चर्चा हेतु संकेत बिंदु
- जल प्राप्ति
- बाँध बनाना
- वर्षा में सहायक
- सिंचाई में सहायक
- आवागमन हेतु सहायक
- बिजली बनाना।
नदियाँ हमारे जीवन का आधार हैं। बर्फीले पहाड़ों से अस्तित्व पाकर धरती के धरातल पर बहती हुई नदियाँ अपना सुधा रस रूपी जल असंख्य प्राणियों को प्रदान करती हैं। प्राणी मात्र की प्यास बुझाने के अतिरिक्त नदियाँ धरती को उपजाऊ बनाती है। आवागमन का साधन हैं। इन पर बाँध बनाकर बिजली उत्पन्न की जाती है। हमारे अधिकतर तीर्थस्थल भी नदियों के किनारे बसे हैं इसी कारण नदियाँ पूजनीय भी हैं। नदियों से हमें धरती हेतु उपजाऊ पदार्थ प्राप्त होते हैं। ये वनों को सींचती हैं। वर्षा लाने में सहायक होती हैं। अनगिनत जीव इनसे जीवन पाते हैं। नदियों के किनारे गाँवों का बसेरा पाया जाता है। गाँव के लोग अपनी छोटी-बड़ी सभी आवश्यकताएँ जैसे सिंचाई करने, पानी पीने, कपड़े धोने, नहाने, जानवरों हेतु नदियों का जल ही प्रयोग करते हैं।
अंत में यही कहा जा सकता है कि नदियाँ हमारी संस्कृति की पहचान हैं। इन्हें दूषित नहीं करना चाहिए क्योंकि हमारा जीवन इन्हीं पर निर्भर है।
भाषा की बात
प्रश्न 1.
अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण
(क) संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।
(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।
• अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।
उत्तर-
(अन्य पाठों से)
- लाल किरण-सी चोंच खोल, चुगते तारक अनार के दाने।
- उन्होंने संदूक खोलकर एक चमकती-सी चीज़ निकाली।
- सागर की हिलोरों की भाँति उसका यह मादक स्वर गलीभर के मकानों में उस ओर तक लहराता हुआ पहुँचता और खिलौने वाला आगे बढ़ जाता है।
- इन्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है मानो बहुत-सी छोर्टी-छोटी बालूशाही रख दी गई हो।
- यह स्थिति चित्रा जैसी अभिमानिनी माजोरी के लिए ही कही जाएगी।
प्रश्न 2.
निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएँ भी मानो जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे
(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।
(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।
• पाठ से इसी तरह के और उदाहरण हूँढ़िए।
उत्तर-
पाठ से अन्य उदाहरण
- संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थी।
- इनका उछलना और कूदना, खिलखिलाकर हँसते जाना, इनकी भाव-भंगी यह उल्लास कहाँ गायब हो जाता है।
- माँ-बाप की गोद में नंग-धडंग होकर खेलने वाली इन बालिकाओं को रूप
- पिता का विराट प्रेम पाकर भी अगर इनका मन अतृप्त ही है तो कौन होगा जो इनकी प्यास मिटा सकेगा।
- बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं।
- हिमालय को ससुर और समुद्र को उसका दामाद कहने में कुछ भी झिझक नहीं होती है।
प्रश्न 3.
पिछली कक्षा में आप विशेषण और उसके भेदों से परिचय प्राप्त कर चुके हैं। नीचे दिए गए विशेषण और विशेष्य (संज्ञा) का मिलान कीजिए
| विशेषण | विशेष्य | विशेषण | विशेष्य |
| संभ्रांत | वर्षा | चंचल | जंगल |
| समतल | महिला | घना | नदियाँ |
| मूसलाधार | आँगन |
उत्तर-
| विशेषण | विशेष्य | विशेषण | विशेष्य |
| संभ्रांत | महिला | चंचल | नदियाँ |
| समतल | आँगन | घना | जंगल |
| मूसलाधार | वर्षा |
प्रश्न 4.
द्वंद्व समास के दोनों पद प्रधान होते हैं। इस समास में ‘और’ शब्द का लोप हो जाता है, जैसे- राजा-रानी द्वंद्व समास है जिसका अर्थ है राजा और रानी। पाठ में कई स्थानों पर द्वंद्व समासों का प्रयोग किया गया है। इन्हें खोजकर वर्णमाला क्रम (शब्दकोश-शैली) में लिखिए।
उत्तर
छोटी – बड़ी
भाव – भंगी
माँ – बाप
प्रश्न 5.
नदी को उलटा लिखने से दीन होता है जिसका अर्थ होता है गरीब। आप भी पाँच ऐसे शब्द लिखिए जिसे उलटा लिखने पर सार्थक शब्द बन जाए। प्रत्येक शब्द के आगे संज्ञा का नाम भी लिखिए, जैसे-नदी-दीन ( भाववाचक संज्ञा )।
उत्तर-
रात-तार, जाता-ताजा, भला-लाभ, राही-हीरा, नव-वन, नमी-मीन, नशा-शान, लाल-लला
प्रश्न 6.
समय के साथ भाषा बदलती है, शब्द बदलते हैं और उनके रूप बदलते हैं, जैसे-बेतवा नदी के नाम का दूसरा रूप ‘वेत्रवती’ है। नीचे दिए गए शब्दों में से ढूँढ़कर इन नामों के अन्य रूप लिखिए सतलुज, रोपड़, झेलम, चिनाब, अजमेर, बनारस
उत्तर-
सतलुज शतद्रुम
रोपड़ रूपपुर ।
झेलम वितस्ता
चिनाब विपाशा
अजमेर अजयमेरु
बनारस वाराणसी
प्रश्न 7.
‘उनके खयाल में शायद ही यह बात आ सके कि बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं।’
• उपर्युक्त पंक्ति में ‘ही’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। ‘ही’ वाला वाक्य नकारात्मक अर्थ दे रहा है। इसीलिए ‘ही’ वाले वाक्य में कही गई बात को हम ऐसे भी कह सकते हैं-उनके खयाल में शायद यह बात न आ सके।
• इसी प्रकार नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य कई बार ‘नहीं’ के अर्थ में इस्तेमाल नहीं होते हैं, जैसे-महात्मा गांधी को कौन नहीं जानता? दोनों प्रकार के वाक्यों के समान तीन-तीन उदाहरण सोचिए और इस दृष्टि से उनका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर-
| वाक्य | विश्लेषण |
| (क) बापू को कौन नहीं जानता। | हर कोई बापू को जानता है। |
| (ख) उन्हें शायद ही इस घटना की जानकारी हो। | शायद उन्हें घटना की जानकारी न हो। |
| (ग) वह शायद ही तुम्हें देख सके। | शायद उन्हें घटना की जानकारी न हो। |
| (घ) वे लोग शायद ही उधर खेलें । | वे लोग शायद इधरे न खेलें। |
अन्य पाठेतर हल प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
(क) गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम इनमें से कौन-सा है?
(i) दादी माँ-शिवप्रसाद सिंह
(ii) हिमालय की बेटियाँ-नागार्जुन
(iii) फूले कदंब-नागार्जुन
(iv) कठपुतली-भवानी प्रसाद मिश्र
(ख) लेखक ने किन्हें दूर से देखा था?
(i) हिमालय पर्वत को
(ii) हिमालय की चोटियों को
(iii) हिमालय से निकलने वाली नदियों को
(iv) हिमालय के समतल मैदानों को
(ग) नदियों की बाल लीला कहाँ देखी जा सकती है?
(i) घाटियों में ।
(ii) नंगी पहाड़ियों पर
(iii) उपत्यकाओं में
(iv) उपर्युक्त सभी
(घ) निम्नलिखित में से किस नदी का नाम पाठ में नहीं आया है?
(i) रांची
(ii) सतलुज
(iii) गोदावरी
(iv) कोसी
(ङ) बेतवा नदी को किसकी प्रेयसी के रूप चित्रित किया गया है?
(i) यक्ष की
(ii) कालिदास की
(iii) मेघदूत की
(iv) हिमालय की
(च) लेखक को नदियाँ कहाँ अठखेलियाँ करती हुई दिखाई पड़ती हैं?
(i) हिमालय के मैदानी इलाकों में
(ii) हिमालय की गोद में
(iii) सागर की गोद में
(iv) घाटियों की गोद में
(छ) लेखक ने नदियों और हिमालय का क्या रिश्ता कहा है?
(i) पिता-पुत्र का
(ii) पिता-पुत्रियों का
(ii) माँ-बेटे का
(iv) भाई-बहन का
(ज) लेखक किस नदी के किनारे बैठा था?
(i) गोदावरी
(ii) सतलुज
(iii) गंगा
(iv) यमुना
उत्तर
(क) (ii)
(ख) (iii)
(ग) (iv)
(घ) (iii)
(ङ) (iii)
(च) (ii)
(छ) (ii)
(ज) (ii)
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
(क) लेखक ने हिमालय की बेटियाँ किसे कहा है और क्यों?
उत्तर-
लेखक ने नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहा है, क्योंकि उसकी उत्पत्ति हिमालय के बर्फ पिघलने से हुई है।
(ख) लेखक के मन में नदियों के प्रति कैसे भाव थे?
उत्तर-
लेखक के मन में नदियों के प्रति आदर और श्रद्धा के भाव थे।
(ग) दूर से देखने पर नदियाँ लेखक को कैसी लगती थीं?
उत्तर-
दूर से देखने पर लेखक को नदियाँ गंभीर, शांत और अपने आप में खोई हुई, किसी शिष्ट महिला की भाँति प्रतीत होती थी।
(घ) नदियों की बाल-लीला कहाँ देखने को मिलती है?
उत्तर-
नदियों की बाल-लीला हिमालय की पहाड़ियों, हरी-भरी घाटियों तथा गुफाओं में देखने को मिलती है।
(ङ) समुद्र को सौभाग्यशाली क्यों कहा गया है?
उत्तर-
समुद्र को सौभाग्यशाली इसलिए कहा गया है, क्योंकि हिमालय के हृदय से निकली उसकी दो प्रिय पुत्रियाँ सिंधु और ब्रह्मपुत्र को धारण करने का सौभाग्य समुद्र को ही प्राप्त हुआ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) नदियों की धाराओं में डुबकियाँ लगाना लेखक को कैसा लगता था?
उत्तर-
नदियों की धाराओं में डुबकियाँ लगाने पर उसे माँ, दादी, मौसी या मामी की गोद जैसा ममत्व प्रतीत होता था।
(ख) सिंधु और ब्रह्मपुत्र के उद्गम के बारे में लेखक का क्या विचार है?
उत्तर-
लेखक को सिंधु और बह्मपुत्र के उद्गम के बारे में विचार है कि सिंधु और ब्रह्मपुत्र के उद्गम के कोई विशेष स्थान नहीं थे तो हिमालय के हृदय से निकली, करुणा की बूंदों से निर्मित ऐसी दो धाराएँ हैं जो बूंद-बूंद के एकत्रित होने पर महानदी के रूप में परिवर्तित हुई हैं।
(ग) हिमालय अपना सिर क्यों धुनता है?
उत्तर-
हिमालय की स्थिति वृद्ध पिता के समान है जो अपने नटखट बेटियों को घर छोड़कर जाता हुआ देखता है और उसे कुछ भी नहीं बोल पाता है, इसलिए वह अपना सिर धुनता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(क) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
उत्तर-
मानव जाति के विकास में नदियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। यह जल प्रदान कर सदियों से पूजनीय व मनुष्य हेतु कल्याणकारी रही हैं। नदियाँ लोगों के द्वारा दूषित किया गया जल जैसे-कपड़े धोना, पशु नहलाना व अन्य कूड़ा-करकट भी अपने साथ ही लेकर जाती हैं। फिर भी नदियाँ हमारे लिए कल्याण ही करती हैं। मानव के आधुनिकीकरण में जैसेबिजली बनाना, सिंचाई के नवीन साधनों आदि में इन्होंने पूरा सहयोग दिया है। मानव ही नहीं अपितु पशु-पक्षी, पेड़-पौधों आदि के लिए जल भी उपलब्ध कराया है। इसलिए हम कह सकते हैं कि काका कालेलकर का नदियों को लोकमाता की संज्ञा देना कोई अतिशयोक्ति नहीं।
(ख) लेखक ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
उत्तर-
लेखक ने सिंधु और ब्रहमपुत्र की विशेषताएँ बतायी हैं कि ये दोनों नदियाँ ऐसी हैं कि जो दयालु हिमालय के पिघले हुए दिल की एक-एक बूंद से बनी हैं। इनका स्वरूप विशाल और वृहत है। इनकी सुंदरता इतनी लुभावनी है कि समुद्र भी पर्वतराज की इन दोनों बेटियों का हाथ सँभालने में सौभाग्यशाली समझते हैं।
(ग) हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियों के नाम लिखिए तथा बताइए कि लेखक ने उनके अस्तित्व के विषय में क्या विचार किया है?
उत्तर-
हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियों के नाम हैं-सिंधु, ब्रह्मपुत्र, रावी, सतलुज, व्यास, चेनाब, झेलम, काबुल, कपिशा, गंगा, यमुना, सरयू, गंडक, कोसी आदि। लेखक का विचार है कि इन नदियों का अपना कोई अस्तित्व नहीं है। ये वास्तव में हिमालय के कृपा पात्र हैं जिसके पिघले हुए दिल की बूंदें है, वे बँदे एकत्रित होकर नदी का आकार ले लिया है और समुद्र की ओर बहती हुई समुद्र में जाकर मिलती हैं। निष्कर्ष में लेखक का विचार है कि हिमालय पर जमी बर्फ के पिघलने से ही इन नदियों का उद्गम होता है। इसलिए हिमालय के बिना नदियों का कोई अस्तित्व नहीं है।
(घ) इस पाठ का उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
इस पाठ का उद्देश्य लेखक ने हिमालय से निकलने वाली नदियों के नाम, उद्गम स्थल, उनके सदैव परिवर्तन होने वाले पल के रूप से परिचित करवाना है। हिमालय को पिता, नदियों को पुत्रियाँ व सागर को उनका प्रेमी माना गया है। लेखक ने यह बताना चाहा है कि सिंधु और ब्रह्मपुत्र ऐसी वृहत नदियाँ हैं जो हिमालय के हृदय से पिघली बूंदों से अपना अस्तित्व पाती हैं। इसे महानदी भी कहते हैं।
मूल्यपरक प्रश्न
(क) आप नदियों को किस रूप में देखते हैं? उनकी सफ़ाई के लिए क्या प्रयास करते हैं या कर सकते हैं?
उत्तर-
हम नदियों को माँ की तरह कल्याणकारी रूप में देखते हैं, ये सदैव पूजनीय हैं। नदियाँ हमारी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं। अतः हमें इनके जल को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। इसके लिए हम यह प्रयास करते हैं कि नदियों में किसी भी प्रकार की गंदगी न फेंकें या डालें । हम नदी के किनारे कपड़े धोने, मूर्तियों को प्रवाहित करने तथा नालों के गंदे पानी डालने का सख्त विरोध करते हैं। हम सदैव नदी की स्वच्छता अभियान में सक्रिय रूप से भागीदार होते हैं।
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