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Class 7 Social Science Chapter 10 Question Answer in Hindi भारत का संविधान एक परिचय
भारत का संविधान एक परिचय Question Answer in Hindi
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 के प्रश्न उत्तर भारत का संविधान एक परिचय
प्रश्न 1.
संविधान क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
संविधान, किसी देश की नियमावली है, जो उत्तम शासन में मदद करती है। यह सरकार की प्रकृति, उसके गठन की प्रक्रिया और उसके कामकाज़ के तंत्र को परिभाषित करती है। संविधान कानून बनाने की प्रक्रिया को निर्धारित करता है और सरकार के तीन अंगों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यो की रूपरेखा बताता है। यह राष्ट्र के मूल्यों को दर्शाता है। जैसे-न्याय, बंधुत्व, समानता, सम्मान, स्वतंत्रता और बहुलवाद।
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प्रश्न 2.
भारतीय संविधान का निर्माण किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
हमारे संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था। जिसका गठन 9 दिसंबर, 1946 को हुआ था। यह एक प्रतिनिधियों वाला निकाय था, जो प्रांतों की विधानसभाओं द्वारा चुने गए थे। ये चुनाव जुलाई 1946 में हुए थे।
शुरुआती चरण में, विधानसभा के 389 सदस्य थे, परंतु विभाजन के पश्चात् 1947 में यह संख्या घटकर 299 रह गई थी। विधानसभा में 15 महिला सदस्य भी थीं। संविधान का मसौदा तैयार करने का कार्य 9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक पूरा हुआ। इसमें 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा और अंत में 26 जनवरीं, 1950 को संविधान लागू हुआ।
प्रश्न 3.
हमारे स्वाधीनता संग्राम और सभ्यता की विरासत ने संविधान को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर:
भारत का संविधान स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और अपनी सभ्यतागत विरासत की समृद्ध विरासत, दोनों से गहराई तक प्रभावित है। स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभव ने संविधान के मूल आदर्शों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सभी के लिए समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे सिद्धांतों को मार्गदर्शक मानते हुए शामिल किया गया है। जिसमें ऐतिहासिकता के साथ संघर्षों की समावेशिता को दर्शाया गया है।
इसके अतिरिक्त भारत के प्राचीन सभ्यता के इतिहास में निहित कई सिद्धांतों को संविधान में स्थान दिया गया है। इसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, महिलाओं के प्रति सम्मान, ज्ञान और सीखने की खोज और ‘वसुधैव कुटुंबकम् ‘ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ आदि प्राचीन अवधारणाएँ संविधान में शामिल की गई हैं। भारतीय संविधान भारत की विभिन्न विचारधाराओं की स्वाकृति और बहुलवादिता को दर्शाता है।
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प्रश्न 4.
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? सत्तर वर्ष से भी पहले लिखा गया संविधान आज भी प्रासंगिक क्यों है?
उत्तर:
भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ-
- भारतीय संविधान सबसे बड़ा लिखित संविधान है। मूलरूप से इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थी, परंतु वर्तमान में 470 से अधिक अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं।
- भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप अपनाया गया है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं।
- संविधान भारत को एक लोकतांत्रिक देश बनाता है और सार्वभौमिक मतदान के अन्तर्गत 18 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों को बिना किसी जाति, धर्म व लिंग के भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है।
- एक स्वतंत्र, एकीकृत और शक्तिशाली न्यायपालिका निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए संविधान द्वारा दी गई है।
- भारत में सरकार के तीन अंग हैं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, जिनकी शक्तियों को ‘शक्ति पृथक्करण’ के सिद्धांत द्वारा अलग-अलग क्षेत्राधिकार प्रदान किए गए हैं।
- संविधान द्वारा सरकार के तीन स्तर-केंद्र, राज्य और स्थानीय वर्गीकृत किए गए हैं। संविधान मूलभूत सिद्धांत और अधिकार प्रदान करता है, जो देश के कामकाज का मार्गदर्शन करती हैं और संशोधनों के माध्यम से आवश्यकतानुसार बदलने की व्यवस्था होने के कारण संविधान आज भी प्रासंगिक है।
पुनरावलोकन करें (पृष्ठ 210)
कक्षा 6 में हमनं ‘संविधान’ शब्द का अर्थ जाना-यह एक ऐसा प्रलंख होंता है जो किसी दंश के मूल सिद्धांतों और कानूनों की नींब रखता है। अब तीन-तीन के छोटे समूहों में बैठकर उन सभी प्रश्नों की सूची बनाइए जो किसी देश के संविधान को लंकर आपकं मन में आते हैं।
उत्तर:
दिए गए प्रश्न से संबंधित हमारे मन में किसी देश के संविधान को लेकर निम्न प्रश्न आए हैं-
- संविधान की भूमिका क्या है?
- क्या हम अपने विद्यालय में भी संविधान बनाकर लागू कर सकते हैं?
- हमें संविधान में से क्या-क्या अवश्य ही सीखना चाहिए?
- हमें स्कूलों में संविधान दिवस कैसे मनाना चाहिए?
- संविधान हमारे लिए क्यों आवश्यक है?
- संविधान को हम कैसे आत्मसात् कर सकते हैं?
- संविधान सरकार पर किस प्रकार नियंत्रण करता है?
- संविधान हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है?
- हम यदि संविधान का पालन नहीं करेंगे, तो देश की व्यवस्था कैसे काम करेगी?
- भारत के संविधान का पालन कौन कराता है।
- क्या संविधान को बदला जा सकता है? यदि हाँ, तो इसकी प्रक्रिया क्या होती है?
- हमारा संविधान कुछ मामलों में लचीला और कुछ में कठोर क्यों है?
- हमारा संविधान अन्य देशों से किन बातों में अलग लगता है?
- हमारा संविधान इतना विस्तृत क्यों है? क्या इसे छोटा किया जा सकता है?
- संविधान से हमें क्या सीखने को मिलता है?
- संविधान में अन्य देशों के संविधान से प्रावधान क्यों लिए गए है?
आइए पता लगाएँ ( पृष्ठ 211-212)
कल्पना कीजिए कि आपके विद्यालय की टीम कबड्डी के राज्य स्तरीय फाइनल मैच में पहुँच गई है। प्रतिद्वंदी टीम बहुत सशक्त है और पिछले दो वर्षों से लगातार विजेता रही है। इस बार वे तीसरी बार जीतकर हैट्रिक बनाना चाहते हैं। खेल आरंभ होता है और आपकी टीम की एक खिलाड़ी सामने वाली टीम के एक खिलाड़ी को आउट कर दंती है, तभी विवाद हो जाता है।
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विरोंधी टीम की खिलाड़ी कहती है कि वह आपकी टीम के खिलाड़ी द्वारा पकड़े जाने से पहले ही अपनी टीम के क्षेत्र में वापस पहुँच गई थी। रेफरी ने देखा कि वह खिलाड़ी वास्तव में आउट थी। स्थिति को सहजता से सुलझाने के लिए रेफरी एक छोटी-सी नियम-पुस्तिका निकालती हैं। दोनों टीमों के कप्तान रेफरी के साथ मिलकर नियमों को देखते हैं और सहमत होते हैं कि वह खिलाड़ी आउट थी। इस प्रकार आपकी टीम राज्य स्तरीय ट्रॉफी जीत जाती है।
प्रश्न 1.
अपने समूह में चर्चा कीजिए कि यदि रेफरी और टीम कप्तानों के पास ऐसी कोई नियम-पुस्तिका नहीं होती तो क्या हो सकता था?
उत्तर:
एक नियम-पुस्तिका के अभाव में मैच के निर्णयों में निरतरता और निष्पक्षता की कमी होगी। इससे बार-बार विवाद और अनुचित अभ्यास हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप व्यवधान और बहसें ही जाती हैं, जिससे मैचों को रद्द करना पड़ सकता है। शक्तिशाली टीमें-खासकर वे टीमें, जिन्हें वहाँ का स्थानीय समर्थन ‘प्राप्त होता है’-अपने पक्ष में निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।
प्रश्न 2.
सभी लोग उस नियम-पुस्तिका का पालन करें, यह सुनिश्चित करने के लिए क्या आवश्यक होता है? अगर टीम कप्तान उस नियम-पुस्तिका को मानने से ही मना कर देते तो क्या होता?
उत्तर:
सभी लोगों को नियम-पुस्तिका का पालन करने के लिए विश्वास. आस्था. सम्मान और सहयोग जैसे मूल्यों की आवश्यकता होती है। यदि दोनों कप्तान नियम-पुस्तिका को मानने से मना कर दे तो मैच के फैसलों में अराजकता फैल जाएगी। जिस से बार-बार लड़ाइयाँ, अनुचित प्रथाएँ और अंततः व्यवधानों के कारण मैच रद्द तक किया जा सकता है।
प्रश्न 3.
किसी ऐसे खेल के बारे में सोचिए जिसे आप प्रायः खेलते हैं और उसमें पालन किए जाने वाले नियमों की सूची बनाइए। फिर प्रत्येक समूह अपनी-अपनी नियमों की सूची कक्षा के शेष विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करेगा। सभी प्रस्तुतियों को ध्यान से सुनिए, नियमों पर चर्चा कीजिए और मिलकर उस खेल के लिए एक साझा नियम तय करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
(सुझावात्मक उत्तर) एक खेल जो अक्सर खेलते हैं, वह बॉस्केट-बॉल है। इसे खेलते हुए निम्न नियमों का पालन किया जाता है-
- प्रत्येक टीम में कोर्ट पर 5 खिलाड़ी होते हैं, और 14 मिनट के बाद पक्ष परिवर्तन होता है। मैच 56 मिनट तक खेला जाता है।
- धक्का देना, गाली-गलौच करना या अन्य फाठल आदि की अनुमति नहीं होती है।
- निर्धारित समय के अंत में उच्चतम स्कोर वाली टीम जीतती है।
- अम्पायर/रेफरी के फैसले अंतिम रूप से मान्य होते हैं।
प्रश्न 4.
सभी की सहमति से नियम बनाने में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? जिससे हर कोई सहमत होकर नियमों का पालन करें।
उत्तर:
नियमों पर आम सहमति के लिए निम्न चुनौतियाँ आ सकती हैं-
- अक्सर कुछ सदस्यों को नियम स्पष्ट नहीं होते हैं, जिससे संशय पैदा हो जाता है।
- सभी के लिए एक समान नियमों को लागू करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि सभी नियमों की व्याख्या अपनी-अपनी तरह से करते हैं।
- बार-बार बहसें और गाली गलौच होना।
- कभौ-कभी हम अपने विवेक को नियंत्रित नहीं कर पाते और मनोस्थिति को सामान्य स्तर पर लाना कठिन होता है।
- इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी बहुत होती है। इसलिए रेफरी पेशेवर खेलों में समस्या को सुलझाते हैं।
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प्रश्न 5.
किसी देश के लिए ऐसी ‘नियम-पुस्तिका’ क्या हो सकती है? उसे कैसे बनाया जाता होगा?
उत्तर:
किसी देश की ‘नियम-पुस्तिका’ उसका संविधान होता है। सामान्यतः यह देश के लोगों की सहमति से संविधान सभा द्वारा बनाया जाता है। एक विशेष समूह का निर्माण किया जाता है। जिसमें अध्यक्ष के साथ संविधान सभा सदस्य अनेक समितियों का निर्माण करते हैं। ये सदस्य चुनाव के द्वारा या सीधे चुने हुए भी हो सकते हैं?
प्रत्येक विचार पर विस्तारपूर्वक मंथन करके चर्चाओं और परिचर्चाओं द्वारा विचार-विमर्श होता है।
समिति सरकार की प्रकृति, सरकार के प्रत्येक अंग की शक्तियों और नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा करती है। उसके बाद मसौदा तैयार किया जाता है इसे फिर प्रकाशित करके संबंधित प्रभावित लोगों, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, जनता और अन्य लोग शामिल हैं, उनसे प्रतिक्रिया ली जाती है।
फिर कोई भी आवश्यक संशोधन किया जाता है और अंतिम संस्करण समिति को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है। जब मसौदा पर सहमति हो जाती है तो संविधान को आधिकारिक रूप से लिखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेखन कार्य पूरा होने के बाद उसे लागू करने का एक आधिकारिक दिन घोषित किया जाता है। जब इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाता है।
प्रश्न 6.
छोटे-छोटे समूहों में मिलकर यह पता लगाने का प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्र से कौन-कौन से व्यक्ति भारतीय संविधान निर्माण में सम्मिलित हुए थे। इसके लिए आप कौन-से स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं? (पृष्ठ 215)
संकेत-अपनं विद्यालय या स्थानांय पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकें दूँढ़। आप अपने शिक्षक, माता-पिता और पड़ोस के वृद्धों से भी पूह सकते हैं।
उत्तर:
संविधान निर्माण में जिन लोगों ने अपना योगदान दिया, उनके संबंधित राज्य निम्न हैं-
- बिहार-डों. राजेंद्र प्रसाद, जगाजीवन राम, अनुग्रह नारायण सिन्हा
- झारखंड-जयपाल सिंह
- गुजरात-वल्लभभाई झावेरभाई पटेल
- तमिलनाडु-टी.टी. कृष्णामचारी
- पश्चिम बंगाल-डॉ. भीमराब आंबेडकर
- महाराष्ट्-के.एम. मुंशी
- असम-सैयद मोहम्मद सादुल्लाह
प्रश्न 7.
नीचे दिए गए उद्धरण को पढ़िए। आपके विचार से यह संविधान के किस अनुच्छेद का संदर्भ दे रहा है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों कहा कि महिलाओं की समानता भारत के लिए कोई नई अवधारणा नहीं है? कक्षा में इस पर चर्चा कीजिए। ( पृष्ठ 221)
“महोदय, भारत की महिलाएँ जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ पूर्ण समानता के अपने वैध अधिकार को लेकर प्रसन्न हैं। मैं यह इसलिए कहती हूँ कि यह कोई नया सिद्धांत नहीं है जिसे विशेष रूप से इस संविधान के लिए प्रस्तावित किया गया है, बल्कि यह एक आदर्श है जिसे भारत ने लंबे समय से सँजोकर रखा है।
यद्यपि कुछ समय तक सामाजिक परिस्थितियों ने दुर्भाग्यवश इसे व्यावहारिक रूप से विफल कर दिया था। यह संविधान उस आदर्श की पुष्टि करता हैं और यह प्रभावी आश्वासन दंता हैं कि भारतीय गणराज्य में महिलाओं के अधिकारों का विधि के अनुसार पूर्ण सम्मान किया जाएगा।”
-बेगम ऐजाज रसूल, 22 नवंबर 1949, संविधान सभा में बहस के दौरान
उत्तर:
यहाँ पर वक्ता संभवतः भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 39 के बारे में बात कर रही है। अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है जिससे महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार सुनिश्चित होते हैं। जबकि अनुच्छेद 39 राज्य को महिलाओं के समान अवसर और कल्याण को सुनिश्चित करने का निर्देश देता है, जिसमें विशेष रूप से रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में समानता प्रमुख है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की समानता भारत के लिए कोई नई अवधारणा नहीं है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से लैंगिक समानता का विचार भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा रहा है। हालाँकि, पितृसत्तात्मक मापदंडों जैसी सामाजिक स्थितियों ने अक्सर इस समानता की पूर्ण प्राप्ति को रोका था। लेकिन भारतीय समाज में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में महिलाओं की एक लम्बी परंपरा रही है।
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इसमें महिला नंता, स्वतंत्रता संनानी और भारत के कुछ हिस्सों में मातृसत्तात्मक प्रणालियों की ऐतिहासिक उपस्थिति शामिल है। इसलिए, संविधान कोई नए विचार का सृजन नहीं कर रहा है, बल्कि लैंगिक समानता में लंबे समय से चले आ रहे विश्वास की पुष्टि कर रहा है।
प्रश्न 8.
क्या आप पता कर सकते हैं कि पिछले दस वर्षों में संविधान में कौन-कौन से संशोधन किए गए हैं? (पृष्ठ 223)
उत्तर:

प्रश्न 9.
प्रस्तावना में उल्लिखित विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। इन्हें दिए गए चित्र में ध्यान से पढ़िए और अपने आस-पास के दैनिक जीवन में इन मूल्यों के पालन के उदाहरण लिखिए। दो उदाहरण दिए गए हैं, जिससे आपको अभ्यास पूर्ण करने में सहायता मिलेगी। ( पृष्ठ 226)

उत्तर:

इसे अनदेखा न करें! (पृष्ठ 212)
प्रश्न 10.
जिस प्रकार आपकी पाठ्यपुस्तक में अनेक खंड और अध्याय होते हैं, उसी प्रकार भारत के संविधान में 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं। प्रत्येक भाग में कई खंड हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जब यह लागू हुआ था, तब इसमें 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। इन्हें आपकों कंठस्थ करने की आवश्यकता नहीं है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि 1950 के बाद ये संख्याएँ क्यों बढ़ी होंगी?
उत्तर:
पिछले 75 वर्षों में भारत के संविधान में बदलते परिवेश व समाज और प्रशासन की आवश्यकताओं के अनुसार नए भागों को जोड़ा या बदलाव किए गए हैं, जिनका प्रमुख उद्देश्य नई चुनौतियों का सामना करना है। वर्तमान दशकों में सूचना प्रौद्योगिकी, भूमण्डलीकरण, जलवायु परिवर्तन आदि नए क्षेत्रों का उदय हुआ है। लोग भी निर्णयों में अपनी अधिक भागीदारी चाहते हैं। जिससे स्थानीय स्वशासन से संबंधित भागों को जोड़े जाने की आवश्यकता पड़ी। जिन्हें 1992 में पंचायती राज संस्थानों और नगर पालिकाओं की स्थापना के लिए जोड़ा गया।
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महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है) लोकसभा (संसद के निचले सदन) और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 % (एक-तिहाई सीट) आरक्षित करता है। इसलिए समय व परिस्थितियों के अनुसार बदलाव के कारण ही यह संख्या बढ़ती गई।
भारत का संविधान एक परिचय Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 10 Question Answer
प्रश्न 1.
‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों’ और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
संविधान सभा में भारत की समृद्ध विविधता की सराहना करने और इस विविधता के जश्न के लिए विविध पृष्ठभूमि के लोगों का होना महत्वपूर्ण था, जिससे समस्त भारत के क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सके। विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों, लिंगों और विशेषज्ञता प्राप्त प्रतिनिधियों ने अपनी विशेषज्ञता और अद्वितीय दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया। संविधान के निष्पक्ष और समावेशी होने के लिए यह परमावश्यक था।
डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व वाली प्रारूप समिति ने संविधान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उल्लेखनीय है कि 15 महिलाओं ने इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया। बेगम ऐजाज रसूल संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला थी, जिन्होंने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया था। इस सभा की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने, की थी। प्रतिनिधियों की इतनी व्यापक भृंखला होने के कारण संविधान को समाज के सभी वर्गों, जिनमें हाशिए पर पड़े और अल्पसंख्यक समूह शामिल हैं, की जरूरतों को संबोधित करने की अनुमति मिली अर्थात समाज के सभी वर्गों का इसमें ध्यान रखा गया।
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं-
(क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोंट डालने के लिए उत्साहित हैं।
(ख) राधा, इमोन और हरप्रीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं।
(ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
(घ) गाँव के कुएँ का उपयांग सभी जाति, धर्म और लिंग के लांग कर सकते हैं।
उत्तर:
(क) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।
(ख) शिक्षा का अधिकार और व्यक्तिगत व सामाजिक विभिन्नता का सम्मान।
(ग) अनुच्छेद 21 ए के तहत शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जो सभी बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा पर जोर देता है।
(घ) अनुच्छेद 14 -समानता का अधिकार। अनुच्छेद 17 -अस्पृश्यता (छूआछूत) का उन्मूलन।
प्रत्येक व्यक्ति को सार्वजनिक सुविधाओं को समान रूप से, बिना किसी भेदभाव के प्रदान किया जाएगा।
प्रश्न 3.
यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तर्कों के साथ उत्तर दीजिए।
उत्तर:
‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं यह कथन भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत गारंटी देने वाला एक मौलिक तथ्य है। यह वर्तमान में प्राप्त छः मौलिक अधिकारों में से एक है। यहाँ समानता के अधिकार का ही एक हिस्सा है, जो भारत के सभी नागरिकों को प्रदान किया गया है।
इसके अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, उसकी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना चाहे वह एक आम नागरिक हो, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हो, कानून की नज़रों में सब समान हैं। कानून, धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। हालाँकि कभी-कभी यह समानता प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।
सामाजिक और आर्थिक कारक जैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य संबा संमाधनों अवसरों और मृचना तक पहुँच अप्रत्यक्ष भंदभाव का कारण बन सकती है। वंचित पृष्ठभूमि व हाशिए पर पड़े समुदायों को अञ्मन उन अधिकारों का पूरी तरह से आनंद लेने से रोकने वाली चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो उन्हें गारंटी के साथ दी गई है।
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प्रश्न 4.
आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया।’ क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर:
भारत ने प्रारम्भिक रूप से ही अपने सभी नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया। यह दूरदर्शी नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्राप्त अनुभव के कारण संभव हुआ। यह संविधान के उन कुछ प्रावधानों में से एक था जिस पर लगभग कोई असहमति नहीं थी, क्योंकि सभी सदस्यों ने अपनी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना, हर वयस्क को वोट देने का अधिकार दृढ़ता के साथ समर्थन किया था।.
नेताओं का मानना था कि एक मजबूत लोकतंत्र समाज के सभी वर्गों, जिनमें सबसे गरीब, हाशिए पर पड़े और महिलाओं को शामिल करके, उनकी भागीदारी की वकालत की जाए। एक लोकतांत्रिक सरकार हमारे संविधान की नींव है, और वोट देने का अधिकार, नागरिकों का एक विशिष्ट अधिकार के रूप में मिला था।
संविधान सभा के सदस्यों को लोगों की सही नेताओं को चुनने की क्षमता पर पूरा विश्वास था, और वे एक ऐसी प्रणाली बनाना चाहते थे, जो विविधता का सम्मान करे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करें।
प्रश्न 5.
स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कैसे प्रेरित किया? भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान की किन प्रमुख विशेषताओं को किस प्रकार प्रेरित किया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत का संविधान बनाने में स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और अपनी सभ्यता की विरासत की समृद्ध विरासत दोनों से गहराई से प्रभावित हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभव ने संविधान के मूल आदर्शों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी के लिए समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे सिद्धांतों को मार्गदर्शक मूल्यों के रूप में शामिल किया गया था।
इसके अलावा, भारत के प्राचीन सभ्यता के इतिहास में निहित कई सिद्धांतों को संविधान में जगह मिली। इनमें शामिल हैं प्रकृति से प्रेम, ज्ञान और अधिगम के प्रति जागरूकता और महिलाओं का सम्मान करना। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (सम्पूर्ण विश्व हमारा परिवार है) और ‘सर्वें भवन्तु सुखिन:’ (सभी की समृद्धि की प्रार्थना) हमारे संविधान में समाहित मूल मंत्र है। हमारा संविधान अलग-अलग विचारों और बहुवाद को भी स्वीकार करता है।
प्रश्न 6.
क्या आपको लगता है कि हम एक समाज के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त कर चुके हैं? यदि नहीं, तो एक नागरिक के रूप में हम में से प्रत्येक क्या कर सकता है जिससे कि हमारा देश इन आदर्शों के और निकट पहुँच सके?
उत्तर:
संविधान ने राष्ट्र और उसके नागरिकों के कल्याण और विकास के लिए कई आदर्श निर्धारित किए हैं। उनमें से कई लक्ष्य प्राप्त किए जा चुके हैं। जंसं-स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, चुनाव लड़ने का अधिकार, कान्न का शासन, स्वतंत्रता का अधिकार, धर्म का अधिकार आदि। हालॉकि चुनौतियाँ अभी भी वर्नी हुई है। हम आर्थिक और मामाजिक असमानताओं, गरीबी, लंगिक भंदभाव, कम साक्षरता दर और जाति आधारित भंदभाव से लड़ रहे हैं।
नागरिकों के रूप में, ह्रम जागरूकता बड़ाकर, गरीबों और हाशिए पर पड़े समुदायों को आगे आने में मद्द करके तथा बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाकर एक सक्रिय भूमिका प्रदान कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ, किसी भी स्थान पर कोई भंदभाव न हो।
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प्रश्न 7.
अगले पृष्ठ पर दी गई शब्द-पहेली को भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए हल कीजिए।
उत्तर:

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