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Class 7 Social Science Chapter 1 Question Answer in Hindi भारत की भौगोलिक विविधता
भारत की भौगोलिक विविधता Question Answer in Hindi
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 1 के प्रश्न उत्तर भारत की भौगोलिक विविधता
प्रश्न 1.
भारत की कुछ प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं? ( पृष्ठ 1)
उत्तर-
भारत की वुछ प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- हिमालय पर्वत भृंखला
- गंगा का मैदान
- विशाल भारतीय मरुस्थल (थार मरुस्थल)
- प्रायद्वीपीय पठार
- भारत की अद्वितीय तट रेखाएँ
- भारतीय द्वीपसमूह
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प्रश्न 2.
भारत की भौगोलिक विविधताएँ हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? ( पृष्ठ 1)
उत्तर-
भारत की भौगोलिक विशेषताएँ मानव जीवन को निम्न प्रकार से प्रभावित करती हैं-
(i) हिमालय पर्वत शृंखला का प्रभाव-यह पर्वत भृंखला भारत के उत्तर में एक प्राचीर के रूप में खड़ी है। इससे निकलने वाली नदियाँ करोड़ों भारतीयों को पेयजल के साथ कृषि एवं उद्योगों को भी जल उपलब्ध कराती हैं। हिमालय अनेक संस्कृतियों और आस्थाओं का केंद्र भी है। यह भारत को विशिष्ट प्रकार से जलवायु उपलब्ध कराता है तथा मानसूनी वर्षा पवनों को रोककर उत्तर भारत में वर्षा कराने में भी सहायक है। हिमालय शृंखलाएँ पर्यंटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ विविध प्रकार की भाषा एवं संस्कृति पाई जाती है।
(ii) गंगा के मैदान का प्रभाव-इस मैदान का निर्माण गंगा एवं उसकी सहायक नदियों ने किया है। ये नदियाँ इस क्षेत्र की मिट्टी को खनिजों से समृद्ध करती हैं, जिससे ये क्षेत्र अत्याधिक उपजाऊ और कृषि के लिए आदर्श बन जाते हैं। समतल उपजाऊ मैदान, अनुकूल जलवायु तथा पर्याप्त जल की उपलब्धता के कारण भारत की जनसंख्या का एक बड़ा भाग इन मैदानी क्षेत्रों में रहता है।
(iii) विशाल भारतीय मरुस्थल का प्रभाव-यह एक विशाल शुष्क क्षेत्र है। कठोर परिस्थितियों के कारण यह एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है जो मानव और पशु आवागमन को बाधित करता है। अत्याधिक गर्म दिन, ठंडी शुष्क रातें और जल का अभाव यहाँ के लोगों की जीवन-शैली, खान-पान तथा वेशभूषा को प्रभावित करता है। जल की कमी की पूर्ति के लिए यहाँ के लोगों ने जल सरंक्षण के अनेक पारंपरिक उपायों को विकसित किया है।
(iv) प्रायद्वीपीय पठार का प्रभाव-प्रायद्वीपीय पठार पर स्थित घने जंगल प्राय:एतिहासिक काल से ही आदिवासी समुदायों की आवास स्थली रहे हैं। इन जनजातियों की विशिष्ट भाषाएँ, परंपराएँ और जीवन शैलियाँ हैं, जो प्रकृति से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं। पठार खनिजों, वनों तथा उपजाऊ भूमि से समृद्ध हैं, जो इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
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(v) भारतीय तट रेखाओं का प्रभाव-भारतीय तट रेखाओं के साथ नदियों द्वारा निक्षेपित डेल्टा, संकरी खाड़ियाँ तथा एस्चुरी पाए जाते हैं। यह. भूमि कृषि कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। दक्षिण भारत की अधिकांश जनसंख्या तटीय प्रदेशों में निवास करती हैं। पश्चिमी तट पर अनेक महत्वूपर्ण पत्तन एवं नगर स्थित हैं, जो प्राचीन काल से ही भारत की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहे हैं।
(vi) भारतीय द्वीपसमूह का प्रभाव-अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 500 से अधिक द्वीप हैं जिन पर अनेक अद्वितीय वन्यजीव, प्रवाल भित्तियाँ और ज्वालामुखी पाए जाते हैं। अनेक द्वीपों पर प्राचीन जनजातियाँ निवास करती हैं जो आधुनिक सभ्यता से अभी भी अनजान हैं। लक्षद्वीप समूह में 36 द्वीप हैं जो मूँगे (कोरल) से बने हैं। इनमें से 11 द्वीपों पर ही मानव आबादी निवास करती है।
आइए पता लगाएँ ( पृष्ठ 2)
प्रश्न 1.
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र का अवलोकन कीजिए। आपको इसमें क्या-क्या दिखाई दे रहा है? क्या आपको पिछली कक्षा में पढ़ाई गई विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियाँ-पर्वत, पठार और मैदान स्मरण हैं? आप मानचित्र पर कौन-कौन सी भू-आकृतियों को पहचान सकते हैं? मानचित्र पर अलग-अलग रंगों का क्या तात्पर्य है? (संकेत-मानचित्र पर अंकित संकेत सूची प्रत्येक क्षेत्र की ऊँचाई को दर्शाती है।)

उत्तर :
मानचित्र पर निम्नलिखित भू-आकृतियों की पहचान की जा सकती है-
- हिमालय
- गंगा का मैदान
- थार मरुस्थल
- अरावली पर्वत श्रेणी
- पश्चिमी घाट तथा पूर्वी घाट
- दक्कन का पठार
- अरब सागर
- बंगाल की खाड़ी
| रंग | विशेषताएँ |
| 1. भूरा/गहरा भूरा 2. नीला 3. हरा 4. पीला/हल्का भूरा |
पर्वत समुद्र/जलाशय मैदान पठार/मरुस्थल |
प्रश्न 2.
क्या आपको अक्षांश और देशांतर रेखाओं पर अपना पाठ याद है? मानचित्र को देखिए। क्या आप बता सकते हैं कि भारत लगभग किन अक्षांशों और देशांतर रेखाओं के मध्य स्थित है? ( पृष्ठ 3)
उत्तर:
भारत उत्तरी गोलार्ध में 8° 4′ उत्तरी अक्षांश और 37°6′ उत्तरी अक्षांश के मध्य और 68° 7′ पूर्वी देशांतर से 97°25′ पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है।
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प्रश्न 3.
भारत के भौतिक मानचित्र पर उपर्युक्त विशेषताओं की पहचान कीजिए।
उत्तर:
स्वयं कीजिए। (संकेतः मानचित्र में भारत की भौगोलिक विशेषताओं जैसे-हिमालय, गंगा का मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, पूर्वी तथा पश्चिमी तट, द्वीपसमूह आदि की स्थिति ज्ञात कीजिए।)
प्रश्न 4.
क्या आप हिमालय के विभिन्न भागों में स्थित राज्यों के नाम ज्ञात कर सकते हैं? इस
अभ्यास के लिए भौतिक और राजनीतिक दोनों मानचित्रों की सहायता लीजिए। (पृष्ठ 6)
उत्तर:
(1) हिमालय के पश्चिम भाग में स्थित राज्य
- जम्मू और कश्मीर (केंद्रशासित प्रदेश)
- लद्दाख (केंद्रशासित प्रदेश)
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
(2) हिमालय के पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित राज्य
- पश्चिम बंगाल
- अरूणाचल प्रदेश
- मेघालय
- मणिपुर
- सिक्किम
- असम
- नागालैंड
- मिजोरम
- त्रिपुरा
प्रश्न 5.
मैदानी क्षेत्रों में प्रकाश के संकेंद्रण पर ध्यान दीजिए। इस संकेंद्रण का क्या कारण हो सकता है? (पृष्ठ 11)

उत्तर:
उपरोक्त चित्र में प्रकाश की एकाग्रता उच्च जनसंख्या घनत्व और मानव गतिविधि को प्रदर्शित करता है। इसके संभावित कारण निम्न प्रकार हैं-
- सघन जनसंख्या-गंगा के मैदानों के साथ प्रमुख शहरों, आवासीय क्षेत्रों, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र स्थित हैं। ये सभी रात की रोशनी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- उपजाऊ भूमि और कृषि-गंगा के मैदान कृषि के लिए आदर्श है, जो बड़ी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। सघन आबादी विभिन्न उद्योगों और व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए बड़े श्रमबल और उपभोक्ता बाजार प्रदान करती हैं। ये गतिविधियाँ अधिक ऊर्जा का उपभोग करती हैं। अतः उपग्रह चित्र में उज्ज्वल रोशनी घनी आबादी और आर्थिक रूप से सक्रिय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है।
प्रश्न 6.
रेत के टीले का आकार कैसा होता है? पर्वत चट्टानों से बने होते हैं और उनका आकार स्थिर होता है। आपको क्यों लगता है कि रेत के टीलों का आकार भी इनके समान होता है, जबकि वे केवल रेत से बने होते हैं? (पृष्ठ 12)
उत्तर:
रेत के एक ऊँचे ढेर को टीला कहा जाता है। यह अलग-अलग आकार एवं ऊँचाई के होते हैं। इनका आकार तथा आकृति हवा की गति और दिशा से प्रभावित होते हैं। कभी-कभी ये टीले 150 मीटर तक ऊँचे हो जाते हैं। इनकी आकृति पर्वतों की तरह स्थिर न होकर परिवर्तनशील होती हैं।
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प्रश्न 7.
आइए, मानचित्र पर वापस चलते हैं। थार मरुस्थल से पूर्व की ओर धीरे-धीरे अपने रास्ते को देखिए। क्या आपको अरावली की पहाड़ियाँ दिख रही हैं? (पृष्ठ 14)
उत्तर:
भारत के मानचित्र पर थार मरुस्थल से पूर्व दिशा की ओर देखने पर हमें अरावली पर्वत शृंखला दिखाई देती है। यह एक प्राकृतिक प्राचीर के रूप में दिखाई देती है जो मरुस्थल का पूर्व दिशा की ओर विस्तार होने से रोकती है।
प्रश्न 8.
पाठ्यपुस्तक में दिए गए राजनीतिक मानचित्र को देखिए और उन राज्यों की पहचान कीजिए, जिनमें अरावली पर्वत शृंखला फैली हुई है। क्या आप इसमें दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात को देख सकते हैं? (पृष्ठ 15)
उत्तर:
हाँ, हम देख सकते हैं कि अरावली पर्वत भृंखला गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में फैली हुई है।

प्रश्न 9.
पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए और नदियों के प्रवाह की दिशा पर ध्यान दीजिए। ( पृष्ठ 16)
उत्तर:
नदियों के प्रवाह की दिशा के आधार पर भारत की नदियों को मुख्यतः दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
1. अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ
- उत्तर भारत की पाँच प्रमुख नदियाँ-सतलुज नदी, व्यास नदी, रावी नदी, चेनाब नदी और झेलम नदी पश्चिम दिशा की ओर बहते हुए सिंधु नदी में मिलकर अंत में अरब सागर में गिरती है।
- नर्मदा और ताप्ती नदियाँ जिनकी उत्पत्ति प्रायद्वीपीय पठार से होती है, पश्चिम दिशा में बहते हुए अरब सागर में गिरती हैं।
2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ
- उत्तर के मैदान में पूर्व दिशा की ओर बहते हुए गंगा नदी अपनी सभी सहायक नदियों जैसे-यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, महानंदा, दामोदर, सोन आदि के साथ बंगाल की खाड़ी में अपने जल को गिराती है।
- प्रायद्वीपीय भारत की सभी प्रमुख नदियाँ जैसे-कावेरी नदी, कृष्णा नदी, गोदावरी नदी और महानदी, अपनी सहायक नदियों के साथ पूर्व दिशा की ओर बहते हुए अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

प्रश्न 10.
आदिवासी समुदाय मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात राज्यों में बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं। इस पुस्तक के अंत में दिए गए राजनीतिक मानचित्र में इन राज्यों की स्थिति का पता लगाइए और इन्हें भौतिक मानचित्र से जोड़ने का प्रयास कीजिए। (पृष्ठ 17)
उत्तर:
भारत के राजनीतिक मानचित्र में इन राज्यों की स्थिति निम्न प्रकार है-

दिए गए राज्यों का भौतिक मानचित्र से संबंध
- पश्चिम बंगाल राज्य दक्षिण में गंगा डेल्टा से लेकर उत्तर में उत्तर पूर्वी हिमालय में दार्जलिंग की पहाड़ियों तक फैला हुआ है।
- असम राज्य मुख्यतः ब्रह्मपुत्र नदी घाटी में स्थित है।
- उड़ीसा राज्य भारत के पूर्वी तट पर स्थित है।
- तेलंगाना तथा छत्तीसगढ़ राज्य पूर्णतः प्रायद्वीपीय पठार पर स्थित है।
- गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्य भारत के पश्चिमी तट पर स्थित हैं।
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प्रश्न 11.
अपने विद्यालय की मानचित्रावली (स्कूल एटलस) अथवा ‘भित्ति-मानचित्र’ को देखकर बंगाल की खाड़ी की ओर बहने वाली पाँच नदियों के नाम लिखिए। भारत के तटीय राज्यों का पता लगाइए और भारत के पश्चिमी तथा पूर्वी तटीय मैदानों के मध्य क्या-क्या अंतर हैं? इन पर चर्चा कीजिए। ( पृष्ठ 19)
उत्तर:
मानचित्रावली के अनुसार बंगाल की खाड़ी की ओर बहने वाली पाँच प्रमुख नदियाँ निम्न प्रकार हैं-
- गंगा नदी
- महानदी
- गोदावरी नदी
- कृष्णा नदी
- कावेरी नदी
पश्चिमी तट पर स्थित राज्य
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- गोवा
- कर्नाटक
- केरल
पूर्वी तट पर स्थित राज्य
- पश्चिम बंगाल
- उड़ीसा
- आंध्रप्रदेश
- तमिलनाडु
पश्चिमी तट तथा पूर्वी तट में अंतर-
| पश्चिमी तटीय मैदान | पूर्वी तटीय मैदान |
| 1. पश्चिमी तटीय मैदान, पश्चिमी घाट और अरब सागर के मध्य स्थित है। | 1. पूर्वी तट, पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है। |
| 2. पश्चिमी तट गुजरात से केरल राज्य तक विस्तृत है, जो महाराष्ट्र, गोवा तथा कर्नाटक राज्यों से होकर गुजरता है। | 2. पूर्वी तट गंगा नदी के डेल्टा से तमिलनाडु में कन्याकुमारी तक विस्तृत है। |
| 3. पश्चिमी तट पर गिरने वाली नदियाँ एस्चुरी बनाती है। | 3. पूर्वी तट पर गिरने वाली सभी नदियाँ डेल्टा बनाती हैं। |
प्रश्न 12.
क्या आप जानते हैं कि जब ये नदियाँ तटों के निकट अनेक धाराओं में विभाजित हो जाती हैं, तो इन्हें क्या कहा जाता है? कक्षा में अपने शिक्षक के साथ चर्चा करके पता लगाइए। (पृष्ठ 19)
उत्तर:
जब ये नदियाँ तटों के निकट अनेक उपधाराओं में विभाजित हो जाती हैं, तब इन उपधाराओं को उपनदी कहा जाता है। उपनदी, मुख्य नदी के साथ संयुक्त रूप से डेल्टा का निर्माण करती है।
पुनरावलोकन करें ( पृष्ठ 4)
प्रश्न.
हिमालय पर्वत शृंखला आकाश को छूती हुई प्रतीत होती है। वास्तव में, इसकी कई चोटियाँ 8000 मीटर से भी अधिक ऊँची हैं और इन्हें सामूहिक रूप से ‘आठ हजारी’ कहा जाता है। यह पर्वत शृंखला एशिया के छह देशों-भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैली हुई है। क्या आप विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई वाले पर्वत का नाम बता सकते हैं?
उत्तर:
विश्व में सबसे ऊँचा पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 8848 मीटर है। यह सदैव बर्फ से ढका रहता है।
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इसे अनदेखा न करें (पृष्ठ 11)
प्रश्न.
भारत में अधिकांश नदियों के नाम देवियों के नाम पर रखे गए हैं, जैसे-गंगा, यमुना, कावेरी, आदि। जबकि ब्रह्मपुत्र के नाम का अर्थ
है ‘ब्रह्मा का पुत्र’। गर्मियों में सूखने की अपेक्षा इस नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है! क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र एक सदानीरा नदी है जिसके जल का प्रमुख स्रोत हिमालय से पिघलने वाली बर्फ है। यह नदी हिमालय के उत्तर में उसके समानान्तर बहते हुए एक लम्बी दूरी तय करती है जिसके फलस्वरूप गर्मियों में बर्फ के पिघलने से इसमें जल की मात्रा बढ़ जाती है।
भारत की भौगोलिक विविधता Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 1 Question Answer
प्रश्न 1.
आपकी राय में भारत की दो महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं? आपके विचार में वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
हमारी राय में भारत की दो महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
1. प्रायद्वीपीय पठारः भारत का प्रायद्वीपीय पठार गोंडवाना नामक भू-भाग का हिस्सा है जो अफ्रीका महाद्वीप के निकट से उत्तर-पूर्व दिशा में गति करते हुए यूरेशिया नामक भू-भाग से टकराया जिसके फलस्वरूप भारत का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया। यह पठार खनिजों का अथाह भंडार है जो भारत के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास का आधार है।
2. हिमालय पर्वत: प्रायद्वीपीय पठार तथा यूरेशिया भू-भाग की टक्कर के फलस्वरूप उनके मध्य की भूमि मोड़दार पर्वतों के रूप में ऊपर उठी और हिमालय पर्वतों का निर्माण हुआ। हिमालय पर्वत जलवायु विभाजक के रूप में कार्य करते हुए हमें उत्तर एशिया से आने वाली शुष्क शीत पवनों से बचाता है तथा मानसूनी पवनों को रोककर वर्षा कराने में सहायक है।
हिमालय पर्वत एक जल विभाजक के रूप में भी कार्य करता है। इससे निकलने वाली नदियों ने ही उत्तर के मैदान का निर्माण किया तथा उत्तर भारत में जल को उपलब्ध कराकर मानव सभ्यता के विकास में भी सहयोग दिया।
प्रश्न 2.
आपके विचार में यदि हिमालय नहीं होता तो भारत का स्वरूप कैसा होता? अपनी कल्पना को व्यक्त करने के लिए एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए अथवा चित्र द्वारा अभिव्यक्त कीजिए।
उत्तर:
यदि हिमालय नहीं होता तो भारत का भूगोल, जलवायु, जीवन और सभ्यता बिल्कुल भिन्न प्रकार की होती जैसे-
- साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाली बर्फीली ठंडी हवाएँ सीधे भारत तक आती और उत्तर भारत बहुत ठंडा और बंजर होता।
- दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें हिमालय ना होने के कारण भारत को पार करके मध्य अथवा उत्तर एशिया में वर्षा करती अर्थात उत्तर भारत एक शुष्क मरुस्थल होता। कृषि लगभग असंभव होती।
- हिमालय के ना होने पर इस क्षेत्र में पाई जाने वाली जैव-विविधता भी भिन्न प्रकार की होती। इसके बिना भारत में इतनी विविधता वाले जीव-जंतु और वनस्पति प्रकार भी नहीं होते।
- उत्तर भारत में किसी प्राकृतिक सीमा के अभाव में आक्रमण बढ़ जाते जिसके कारण हमारा सांस्कृतिक स्वरूप भी वर्तमान जैसा नहीं होता। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि यदि हिमालय ना होता तो भारत आज एक मरुस्थलीय, ठंडा, कम जनसंख्या वाला प्रदेश होता जो आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से भी बिल्कुल भिन्न प्रकार का होता।
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प्रश्न 3.
अध्याय में दी गई जानकारी के आधार पर बताइए कि भारत को ‘लघु महाद्वीप’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है जो एशिया महाद्वीप का भाग है, परंतु भारत को लघु महाद्वीप भी कहा जाता है क्योंकि-
- उत्तर दिशा में स्थित हिमालय पर्वत एक प्राकृतिक प्राचीर के रूप में भारत को एशिया महाद्वीप से अलग करता है।
- थार मरुस्थल तथा अरब सागर भारत की पश्चिमी सीमा बनाते हैं।
- पूर्व में बंगाल की खाड़ी भारत की प्राकृतिक सीमा बनाती है।
- भारत की जलवायु तथा संस्कृति भी एशिया महाद्वीप के अन्य भागों से भिन्न है।
- भारत में भिन्न प्रकार की जैव-विविधता पाई जाती है।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर भारत को लघु महाद्वीप कहना पूर्णतः उचित है।
प्रश्न 4.
भारत की किसी प्रमुख नदी को मानचित्र 1.13 में देखिए। इसका उद्गम कहाँ है और यह समुद्र में कहाँ मिलती है? इसकी यात्रा के दौरान लोग इस नदी का विभिन्न प्रकार से कैसे उपयोग करते हैं? अपनी कक्षा में इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
- गंगा नदी भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदी है। भागीरथी नदी, गंगा की सहायक नदी है, जो उत्तराखंड राज्य में ‘गोमुख’ नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है।
- गंगा नदी अपनी 2525 कि.मी. लंबी यात्रा पूरी करने के उपरांत बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
- गंगा नदी के विविध उपयोग
- गंगा नदी सम्पूर्ण भारत में धार्मिक आस्था का केंद्र है। आरंभ से अंत तक इसके तटों स्थल हैं।
- गंगा नदी तथा इसकी सहायक नदियों ने मिलकर ही उत्तर भारत के विशाल जलोढ़ मैदान का निर्माण किया है। यह एक
समतल एवं उपजाऊ भू-भाग है। भारत का अधिकांश कृषि उत्पादन इसी मैदान में होता है।
- गंगा नदी कृषि सिंचाई के अतिरिक्त यहाँ रहने वाली विशाल जनसंख्या को पेयजल भी उपलब्ध कराती है।
- गंगा नदी तथा इसकी सहायक नदियों पर निर्मित बाँधों से सम्पूर्ण उत्तर भारत में जलविद्युत की आपूर्ति होती है।
- इसके किनारों पर रहने वाले लोग मछली पकड़कर रोजगार तथा भोजन दोनों की पूर्ति करते हैं।
- गंगा नदी अतःस्थलीय जल परिवहन का भी प्रमुख उदाहरण है।
प्रश्न 5.
भारत के दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारत के दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार कहा जाता है क्योंकि-
- किसी भी स्थलखंड को यदि तीन ओर से जल और चौथी ओर से स्थल घेरे, तो उसे प्रायद्वीप कहते हैं।
- भारत का दक्षिणी भाग पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा है। केवल इसका उत्तरी भाग स्थल से जुड़ा है।
- यह भाग त्रिकोणाकार में समुद्र के भीतर तक फैला है, इस कारण इसे ‘प्रायद्वीप’ अथवा ‘भारतीय प्रायद्वीप’ कहा जाता है।
प्रश्न 6.
इस अध्याय में वर्णित यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त कौन-से धरोहर स्थल आपको अधिक रुचिकर लगे? इसके रोचक तथ्यों का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त स्थलों में से हमें पश्चिमी घाट अधिक रुचिकर लगता है। यूनेस्को ने इसे ‘असाधारण सार्वभौमिक मूल्य’ का क्षेत्र मानते हुए वर्ष 2012 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था क्योंकि-
- पश्चिमी घाट को ‘जैव-विविधता हॉटस्पॉट’ माना जाता है। यहाँ लगभग 7400 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। दुर्लभ वन्यजीव जैसे-शेर-पूँछ मकाक, नीलगिरि तहर, मालाबार सिवेट केवल यहीं पाए जाते हैं।
- यह क्षेत्र सघन वनों, झरनों, पर्वतों और नदियों से भरा है। गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियाँ यहीं से निकलती हैं।
- यह क्षेत्र जलवायु संतुलन, भू-जल संरक्षण और मृदा की उर्वरकता बनाए रखने में भी सहायक है।
- यह क्षेत्र धरती पर सबसे समृद्ध और अद्वितीय पारिस्थितिकी तत्रों में से एक है, जो मानवता और प्रकृति दोनों के लिए ही अमूल्य है।
प्रश्न 7.
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक और राजनीतिक मानचित्रों को देखिए। आप अभी जिस क्षेत्र में हैं, उसकी पहचान कीजिए। आप भारत की किस भौतिक विशेषता का उपयोग इस स्थान का वर्णन करने के लिए करेंगे?
उत्तर:
हम दिल्ली में रहते हैं। भारत के प्राकृतिक तथा राजनीतिक मानचित्रों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि यह क्षेत्र गंगा के मैदान के बिल्कुल पश्चिम में यमुना नदी के तट पर स्थित है। दिल्ली का वर्णन करने के लिए भारत की दो भौतिक विशेषताओं का वर्णन आवश्यक है-
(i) अरावली पर्वत-अरावली दिल्ली को निम्न प्रकार से प्रभावित करता है-
- यह थार मरुस्थल से आने वाली गर्म, शुष्क हवाओं को कुछ हद तक रोककर दिल्ली को अत्याधिक गर्म और शुष्क होने से बचाती है।
- दिल्ली का दक्षिणी भू-भाग अरावली की पहाड़ियों पर या उनके किनारे बसा है। अरावली पर्वत का अंतिम सिरा दिल्ली में यमुना नदी पर बने वजीराबाद पुल के निकट स्थित है।
- अरावली पर्वत, दिल्ली की जलवायु को नियंत्रित करने के साथ वन क्षेत्र, वन्यप्राणी आवास भी उपलब्ध कराता है।
(ii) गंगा का मैदान-
- दिल्ली भौगोलिक रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्र के पश्चिमी छोर पर स्थित है। यह स्थान अरावली की पहाड़ियों और गंगा के मैदान के बीच एक संक्रमणीय क्षेत्र है।
- दिल्ली का समतल भाग मुख्यतः गंगा की सहायक नदी यमुना द्वारा जमा की गई जलोढ़ मिट्टी से बना है। इस क्षेत्र में कृषि (मुख्यतः गेहूँ, चावल, गन्ना) का बहुत विकास हुआ है।
- इस मैदान की उपजाऊ भूमि, नदियों और व्यापारिक मार्गों की उपस्थिति, उपयुक्त जलवायु और घनी आबादी के कारण यह क्षेत्र सदैव राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
(नोट-अन्य जानकारी के लिए पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ सं. 275 में भारत का भौतिक मानचित्र देखें।)
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प्रश्न 8.
भारत में खाद्य संरक्षण वे उपाय जगह-जगह पर भिन्न हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप होते हैं। ‘कक्षा परियोजना’ के अंतर्गत खाद्य संरक्षण के विभिन्न उपायों के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए। ( संकेत-मौसमी ( ॠतु विशेष में उपलब्ध ) सब्जियों को सुखाकर उन्हें अन्य ऋतुओं में उपयोग हेतु सुरक्षित रखना।)
उत्तर:
परियोजना कार्य को कक्षा में अपने विषय अध्यापक की सहायता से पूर्ण कीजिए।
प्रश्न 9.
इतने अलग-अलग भौतिक स्वरूपों (पर्वतीय, मरुस्थलीय, मैदानी, तटीय इत्यादि) के साथ भारत एक विशाल देश है। भारत की भौगोलिक स्थिति ने लोगों को एकजुट रहने में किस प्रकार सहायता की है। इसके बारे में आपका क्या विचार है?
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। भारत की भौगोलिक स्थिति ने लोगों को एकजुट रहने में निम्न प्रकार सहायता की है-
(i) प्राकृतिक सीमाएँ
- उत्तर में हिमालय पर्वत, पूर्व, पश्चिम तथा दक्षिण में समुद्र ने भारत को एक स्वाभाविक भौगोलिक इकाई बनाया है।
- इन प्राकृतिक सीमाओं ने भारत को सुरक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक इकाई की तरह विकसित किया, जिससे यहाँ के निवासी एक साझा पहचान महसूस करने लगे।
(ii) मार्ग और संपर्क
- उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैली पर्वत भृंखलाएँ, घाटियाँ और मैदान प्राकृतिक मार्ग बने।
- गंगा का मैदान और तटीय क्षेत्र व्यापार व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के मार्ग बने, जिससे अलग-अलग समुदाय एक-दूसरे के निकट आए।
(iii) जलवायु और जीवन-शैली
- भारत में जलवायु में विविधता के बावजूद भी एकता के दर्शन होते हैं जो इसे मानसूनी जलवायु प्रदेश के रूप में पहचान दिलाती है।
- इस विविधता ने भिन्न-भिन्न जीवन शैलियों, भाषाओं और परंपराओं को जन्म दिया, लेकिन भौगोलिक एकता ने इन्हें एक ढाँचे में जोड़े रखा।
(iv) धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र
- हिमालय, गंगा, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी आदि नदियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक एकता के केंद्र बनीं।
- उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक तीर्थ यात्राओं और मेलों ने लोगों को जोड़कर ‘सांस्कृतिक एकता’ की भावना पैदा की।
इस प्रकार भारत की भौगोलिक स्थिति ने लोगों को जीविका संसाधन, साझा सीमाएँ और सांस्कृतिक केंद्र प्रदान किए। इन्हीं कारणों से भौगोलिक विविधता के बावजूद भी भारत के लोग एकजुट होकर एक साझा सभ्यता और पहचान बना सके।
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