Teachers recommend Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 10 Notes in Hindi भारत का संविधान एक परिचय for mastering important definitions and key concepts.
The Constitution of India An Introduction Class 7 Notes in Hindi
भारत का संविधान एक परिचय Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 10 नोट्स भारत का संविधान एक परिचय
→ प्रस्तावना
- भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। संविधान को बनाने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा।
- संविधान एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसमें नियम, कानून शामिल हैं और राष्ट्र के बुनियादी सिद्धांतों और ढाँचे को निर्धारित करता है। राप्ट्रपति, प्रधानमंत्री. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायार्धीश के अलावा अन्य अनेक महत्वपूर्ण पदाधिकारी इसी की शपथ और प्रतिज्ञा लेते हैं।

→ रोचक तथ्य
हमारे संविधान की मूल प्रति हीलियम गैस से भरे एक काँच के बने बक्से में, संसद में संरक्षित करके रखी गई है।
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→ संविधान क्या है?
- संविधान वह प्रलेख है, जो किसी देश के मूल सिद्धांतों और कानूनों को स्पष्ट रूप से वर्णित करता है।
- यह सरकार के तीनों अंगों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) की संरचना, भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व को वर्णित करता है।
- एक आम नागरिक से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक के अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लेख इसमें किया गया है।
- यह सरकार के गठन कार्यप्रणाली और शक्तियों की प्रक्रियाओं को परिभाषिन करना है।
- भारत का संविधान भारत को एक संप्रभु समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लॉकतांत्रिक गणराज्य बनाता है।
→ हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?
- संविधान किसी भी देश के लिए कानून की किताब है, जो वहाँ की सत्ता के कार्य, अधिकार क्षेत्र व शक्तियों का उल्लेख करती है।
- संविधान कानून बनाने से लेकर लागू कराने तक की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करता है, जो संरकार के विभिन्न अंगों के बीच शक्ति का पृथक्करण करता है।
- संविधान निर्धारित करता है कि देश में किस प्रकार की सरकार होगी? वह कैसे बनेगी और कैसे काम करेगी?
- इसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के गठन, नियुक्ति नियंत्रणकारी शक्तियों का उल्लेख किया गया है, जो इनकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है, तथा आपसी मंतभेदों को दूर करता है।
- सभी के लिए समानता और न्याय, बंधुत्व, विविधता में एकता और स्वतंत्रता का संरक्षण भी संविधान के द्वारा ही सम्भव होता है।
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→ भारतीय संविधान का निर्माण
- हमारे संविधान के निर्माण का कार्य संविधान सभा को दिया गया, जिसका निर्माण 9 दिसंबर 1946 को किया गया था।

- प्रारंभ में, इसमें 15 महिलाएँ सम्मिलित थीं तथा आज़ादी से पहले के भारत की सदस्य संख्या 389 थी जो विभाजन के बाद घटकर 299 रह गई।- ये सदस्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों, व्यवस्मायों और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते थें।
- डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा एक भारतीय वर्कील, पत्रकार और राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें भारत की संविधान सभा के पहले अस्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना गया।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद को डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के बाद संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष बनाया गया। इसके पश्चात् वह स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति भी चुने गए।
→ हमारा संविधान कैसे बना?
- सबसे पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान निर्माण सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह भारत के पहले राष्ट्रपति बने और 1950 से 1962 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहे।

- जिस समिति ने संविधान का मसौदा तैयार किया, उसकी अध्यक्षता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने की थी, जो एक प्रसिद्ध समाज सुधारक और स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री थे।
- संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 को गठन के साथ ही अपना कार्य शुरू किया और 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के लम्बे परिश्रम के पश्चात् भारत के संविधान के रूप में 26 जनवरी 1950 को अंगीकृत किया गया। इसीलिए हम संविधान लागू होने के उपलक्ष में 26 जनवरी को प्रतिवर्ष ‘गणतंत्र दिवस’ मनाते हैं।

- संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रांतों की विधानसभाओं के माध्यम से किया गया। इन सदस्यों का चुनाव जुलाई 1946 में चुनाव के माध्यम से किया गया था।

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भारतीय संविधान को आकार देने और प्रभावित करने वाले कारक-
(i) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों का प्रभावभारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों के अनेक मुख्य आदर्शों और मूल्यों को सविधान में स्थान दिया गया। जिन आंदोलनों के प्रमुख नंता इस संविधान सभा में सम्मिलित थे।
- सभी के लिए समानता और न्याय, भाई-चारा, भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संविधान को इन आदर्शों की प्राप्ति के एक साधन और उपाय के रूप में देखना, इसका प्रमुख लक्ष्य था।
(ii) भारतीय सभ्यता की विरासत और इतिहास-भारत के एक राष्प्र होने की यह भावना हमारं संविधान में अंतर्निहित है। मतांतरों की सहर्मति, प्रकृति को पवित्र मानना, ज्ञान और शिक्षा की निरंतर ख्रांज महिलाओं कर प्रति सम्मान, ‘वसुर्धव कुटुम्बकम्’ और ‘सवें भवन्तु सुखिन:’ जैसे आदर्शों को हमारे संविधान में समाहित किया गया है।
(iii) विश्व के विभिन्न देशों से मिली सीखहमारा संविधान ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः (सभी दिशाओं के शुभ विचार मेरे पास आएँ) की भाखना के साथ विभिन्न देशों से प्राप्त आदर्श विचारों और नवाचारों को बिना किसी बाधा के स्वीकार करता है।
| देश | भारतीय संविधान में सम्मिलित आदर्श और मूल्य |
| यूनाइटंड किंगडम संयुक्त राज्य अमेरिका आयरलैंड आस्ट्रेलिया फ्रांस |
संसदीय प्रणाली, कानून का शासन मौलिक अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका राज्य के नीति निर्देशक तत्व समवर्ती सूची स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (फ्रांसीसी क्रांति से) |
→ भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ-
(i) विस्तृत एवं लिखित संविधान-भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। मूल रूप से इसमें 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ, 395 अनुच्छेद थे और अब इसमें 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ और 470 से अधिक अनुच्छेद हैं।
(ii) संसदीय व्यवस्था-भारतीय संविधान द्वारा भारत में संसदीय प्रणाली को अपनाया गया है. जिसमें दो सदन-लोकसभा व राज्यसभा हैं. नथा नीन अंग हैं, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के साथ राष्ट्रपति को भी संसद का अंग माना गया है।
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(iii) वयस्क मताधिकार-भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जिसमें 18 वर्ष से अधिक सभी वयस्कों को समान रूप से बिना किसी भेदभाव के मतदान करने का अधिकार दिया गया है।
(iv) स्वतंत्र न्यायपालिका—संविधान द्वारा भारत में एक स्वतंत्र, एकीकृत और शक्तिशाली न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है, जो बिना किसी भेदभाव के निर्णय करने वाली एक सक्षम संस्था है।
(v) शक्ति पृथक्करण-इसका तात्पर्य शक्तियों के विभाजन से है सरकार के तीन अंगों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का कार्य-क्षेत्र और शक्तियाँ अलग-अलग संविधान में विभाजित की गई हैं। जिससे वह एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र को प्रभावित न कर सके।
(vi) मौलिक अधिकार, कर्तव्य व नीति-निर्देशक तत्व का समावेश-संविधान में नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए हैं जो उनके उन्नति और विकास में सहायक हैं, साथ ही संविधान में कुछ मौलिक कर्तव्य भी दिए गए हैं, जिनका पालन नागरिकों को करना अनिवार्य है। साथ ही संविधान में राज्यों को भी निर्देशित किया गया है, कि वह जन-कल्याण व लोकहितकारी नीतियों के साथ-साथ देशहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करे। इन्हें किसी भी अदालत के द्वारा लागू नहीं किया जाता। यह सरकार की ओर से केवल एक नैतिक दायित्व है, कि उन्हें ऐसा करना चाहिए।
(vii) त्रि-स्तरीय शासन व्यवस्था-संविधान में त्रि-स्तरीय शासन व्यवस्था को अपनाया गया है. जिसमें केंद्र सरकार-सम्पूर्ण देश के लिए. राज्य सरकार-सम्पूर्ण राज्य के लिए, स्थानीय सरकार-ग्राम, कस्बा, नगर पंचायत, जिला पंचायत स्तर पर कार्य व रख-रखाव की व्यवस्था के लिए उत्तरदायी है।
(viii) लोक-कल्याणकारी राज्य-संविधान में भारत को एक लोकहितकारी राज्य के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जिसका तात्पर्य राज्य के नागरिकों के हित के लिए कार्य करने की अपेक्षा और सभी के अधिकारों के संरक्षण की व्यवस्था से है।
(ix) एकल नागरिकता-भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति केवल भारत का नागरिक है, न कि किसी विशेष राज्य का।
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→ संविधान एक जीवंत प्रलेख ( दस्तावेज़ ) के रूप में-
- भारत का संविधान एक अपरिवर्तनशील दस्तावेज़ नहीं है. यह एक जीवंत (परिवर्तनशील) दस्तावेज़ है. संविधान निर्माताओं ने देश काल परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनकारी शक्तियों का समावेश इसमें किया है, जिससे समय और परिस्थितियों के अनुसार कानूनों को बदला जा सके।
- कुछ कानूनों को बदलने की आवश्यकता पड़े, तो उनको बदला जा सके। इसलिए संवैधानिक संशोधनों के प्रावधान को शामिल किया।
- ये परिवर्तन केवल संसद द्वारा दोनों सद्नों में बहस, चर्चा और मतदान के बाद, राष्ट्रपति की स्वीकृति से परिवर्तनकारी होते हैं। इनमें महत्वपूर्ण संशोधन 1976 में मौलिक कर्तव्यों का और 1992 में स्थानीय स्वशासन सरकार का जोड़ा जाना है।
→ भारतीय संविधान की उद्देशिका/प्रस्तावना-

- संविधान महत्वपूर्ण मूल्य, नीतियों एवं निर्णयों हेतु दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिनका पालन सरकार द्वारा किया जाना अपेक्षित है। ये मार्गदर्शक मूल्य पूरे संविधान में समाहित हैं, लेकिन उनका सार उद्देशिका में संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत है।
- इसके अनुसार भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकसांत्रिक गणराज्य हैं, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व की गारंटी देता है और राष्ट्र के रूप में व्यक्तिगत गौरव, एकता और अखंडता सुनिश्चित करता है।
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