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Class 9 Hindi संवादहीन Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन Extra Question Answer
NCERT Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Question Answer अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
ताई का घर खंडहर के समान क्यों प्रतीत होता था?
उत्तर:
ताई का घर परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति और सन्नाटे के कारण एक निर्जीव खंडहर के समान प्रतीत होता था।
प्रश्न 2.
मिट्टू को ताई के पास लाने वाला व्यक्ति कौन था?
उत्तर:
मिट्टू को ताई के पास लाने वाला व्यक्ति गनपत था।
प्रश्न 3.
ताई प्रयागराज किस प्रयोजन से गई थीं?
उत्तर:
ताई प्रयागराज कुंभ के पावन अवसर पर गंगा स्नान और पुण्य कमाने के प्रयोजन से गई थीं।
प्रश्न 4.
जगन मास्टर ने मिट्टू को बाहर लाने के लिए क्या किया?
उत्तर:
जगन मास्टर ने मिट्टू को बाहर लाने के लिए दाना बिखेरा।
प्रश्न 5.
मिट्ठू ताई को क्या कहकर आशीर्वाद देता था?
उत्तर:
मिट्टू ताई को ‘सीताराम’ और ‘खुश रहो’ कहकर आशीर्वाद देता था।
प्रश्न 6,
गनपत ने ताई को दुःख से बचाने के लिए क्या सुझाव दिया?
उत्तर:
गनपत ने ताई को दुःख से बचाने के लिए यह सुझाव दिया कि मिट्टू की ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा तोता ले आया जाए।
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प्रश्न 7.
ताई मिट्टू के लिए विशेष रूप से कौन-सा भोजन तैयार करती थी?
उत्तर:
ताई मिट्टू के लिए विशेष रूप से दाल-भात (चावल) तैयार करती थीं।
प्रश्न 8.
मिट्टू के उड़ जाने पर जगन मास्टर की मानसिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर:
मिट्ठू के उड़ जाने पर जगन मास्टर बहुत अधिक दुखी और पश्चात्ताप की अग्नि में जल रहे थे।
प्रश्न 9.
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किस मुख्य समस्या की ओर संकेत करता है?
उत्तर:
यह शीर्षक समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और बातचीत के अभाव की समस्या की ओर संकेत करता है।
प्रश्न 10.
क्या नया तोता ताई की भावनात्मक पुकार का उत्तर दे पाया?
उत्तर:
नहीं, नया तोता केवल इधर-उधर ताकता रहा।
प्रश्न 11.
ताई की दिनचर्या में मिट्टू का क्या महत्व था?
उत्तर:
मिट्टू ताई की दिनचर्या का केंद्र था, जिसके कारण वे अपने जीवन में सक्रिय और खुश रहती थीं।
प्रश्न 12.
गनपत ने ताई को तोता क्यों दिया था?
उत्तर:
गनपत ने ताई का अकेलापन दूर करने और उनका मन बहलाने के लिए उन्हें तोता दिया था।
प्रश्न 13.
जगन मास्टर पेशे से क्या थे?
उत्तर:
जगन मास्टर पेशे से एक अध्यापक थे।
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प्रश्न 14.
कहानी के अंत में ताई की क्या स्थिति हुई?
उत्तर:
कहानी के अंत में ताई बार-बार अपने मिट्ठू की गुहार लगाती रही।
प्रश्न 15.
ताई अपनी संपत्ति के बारे में क्या सोचती थी?
उत्तर:
ताई को दुःख था कि उनकी सारी संपत्ति और रसूख अब पराए हाथों में चला गया है।
संवादहीन Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
ताई ने अपने बेटों और बेटियों के बारे में क्या धारणा बना ली थी?
उत्तर:
ताई को लगता था कि उनके बच्चे अब पूरी तरह पराए हो चुके हैं। बेटे शहर की सुख-सुविधाओं में उन्हें भूल गए हैं और बेटियाँ अपने ससुराल में उलझी हैं। उनके अनुसार, अब इस दुनिया में उनका अपना कोई नहीं बचा।
प्रश्न 2.
मिट्टू के आने से ताई के व्यक्तित्व में क्या सकारात्मक परिवर्तन आए?
उत्तर:
मिट्टू के आने से ताई की उदासी गायब हो गई। जो ताई पहले स्वयं के लिए चूल्हा भी नहीं फूँकती थी, वे अब मिट्टू के लिए चाव से भोजन बनाने लगी और आस-पास की दुनिया में दिलचस्पी लेने लगीं।
प्रश्न 3.
जगन मास्टर के सिद्धातों और उनकी भावनाओं के बीच क्या द्वंद्व था?
उत्तर:
जगन मास्टर सैद्धांतिक रूप से पक्षियों की कैद के खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकाला था, परंतु उसके उड़ जाने के पश्चात उनकी मानवीय भावना ने उन्हें कचोटा कि उन्होंने एक असहाय वृद्धा का एकमात्र सहारा छीन लिया है।
प्रश्न 4.
जगन मास्टर को मिट्ठू को देखकर कैसा लगता था?
उत्तर:
जगन मास्टर स्वतंत्र ख्याल के व्यक्ति थे, वे पक्षियों की आज़ादी के प्रबल समर्थक थे। इसलिए पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बैचेनी होती थी। उन्हें उस पर दया आती थी और वे अपनी पत्नी कि बुद्धि पर तरस खाते और अपने आपको भी दोषी मानते थे।
प्रश्न 5.
कहानी में ‘संवाद’ की कमी को कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर:
कहानी में संवाद की कमी को ताई के बड़े घर के सन्नाटे और उनके बच्चों की अनुपस्थिति के माध्यम से दिखाया गया है। जहाँ बहुत सारे लोग होने चाहिए थे, वहाँ ताई को एक पक्षी से बात करके अपना मन हल्का करना पड़ता था।
Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘संवादहीन’ शीर्षक की सार्थकता पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर:
‘संवादहीन’ शीर्षक इस कहानी की आत्मा है। यह न केवल ताई के जीवन के सन्नाटे को दर्शाता है, बल्कि समाज की उस विसंगति को भी उजागर करता है जहाँ लोग एक-दूसरे के पास होकर भी भावनात्मक रूप से दूर हैं। ताई के जीवन में संवादहीनता तब शुरू हुई जब उनके अपनों ने उनसे बात इ करना बंद कर दिया। मिट्टू ने उस मौन को तोड़कर ताई को न एक नया जीवन दिया। लेकिन जब मिट्ठू उड़ गया और उसकी जगह एक दूसरा तोता आया, तो ताई का संवाद फिर से टूट गया। कहानी के अंत में ताई का मौन हो जाना यह सिद्ध करता है कि बिना सच्ची आत्मीयता के शब्द अर्थहीन होते हैं इसलिए यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 2.
जगन मास्टर का चरित्र चित्रण करते हुए व उनकी विवशता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जगन मास्टर कहानी के एक बहुत ही संवेदनशील और विचारशील पात्र हैं। वे एक आदर्शवादी शिक्षक हैं जो जीवों की स्वतंत्रता के समर्थक हैं। उनका चरित्र दयालुता और कर्तव्यनिष्ठा का मिश्रण है। उनकी विवशता तब सामने आती है। जब वे अनजाने में ताई का मिट्टू खो देते हैं। वे ताई के दुख 5 को अपना दुख समझने लगते हैं और एक झूठ का सहारा लेते हैं। हालाँकि वे जानते थे कि झूठ बोलना गलत है, लेकिन एक
वृद्धा के प्रति उनकी करुणा ने उन्हें ‘एवजी मिट्टू’ लाने पर विवश किया। उनका पश्चात्ताप और नए तोते को सिखाने की उनकी मेहनत चरित्र की गहराई को दर्शाती है।
प्रश्न 3.
समाज में वृद्धों की उपेक्षा की समस्या को कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कहानी आज के एकल परिवारों की समस्या पर चोट करती है। ताई जैसे अनेक वृद्ध आज भी अपने बड़े-बड़े 7 घरों में अपनों के इंतजार में संवादहीन जीवन जी रहे हैं। नई पीढ़ी भौतिकता की दौड़ में बुजुर्गों की भावनात्मक जरूरतों को भूल गई है। ताई का एक पक्षी से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि इंसान को जीवित रहने के लिए संवाद की उतनी ही ज़रूरत है जितनी भोजन की। लेखक ने ताई के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बुजुर्गों को केवल रोटी और छत नहीं, बल्कि हमारा समय और स्नेह भी चाहिए।
प्रश्न 4.
ताई और मिट्टू के संबंधों के भावनात्मक पहलुओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ताई और मिट्टू का रिश्ता मानवीय संवेदनाओं की पराकाष्ठा है। ताई के लिए मिट्टू कोई जानवर नहीं, बल्कि उनके एकांत का मसीहा था। वे उसे अपनी हर छोटी-बड़ी बात बताती थीं, जैसे वह उनकी हर समस्या समझता हो। मिट्टू का ‘सीताराम’ कहना ताई को किसी दैवीय आशीर्वाद जैसा लगता था। उनके बीच का प्रेम इतना गहरा था कि ताई तीर्थ स्थान पर भी उसी की चिंता में डूबी रहती थीं। यह संबंध दिखाता है कि जब इंसान अपनों से निराश होता है, तो वह मूक प्राणियों में अपनी ममता का ठौर ढूँढ़ लेता है।
प्रश्न 5.
कहानी के अंत का ताई के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?
उत्तर:
कहानी का अंत अत्यंत दुःखद है, क्योंकि यह ताई की अंतिम उम्मीद को भी तोड़ देता है। जब ताई को अहसास होता है कि उनके सामने बैठा तोता वह मिट्टू नहीं है, तो उनका बचा खुचा उत्साह भी खत्म हो जाता है। वे फिर से उसी मानसिक अंधकार और मौन में चली जाती हैं। यह स्थिति उनके लिए पहले के अकेलेपन से भी अधिक भयानक है क्योंकि अब उनके पास खोने के लिए भी कुछ नहीं बचा। यह अंत में पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि बनावटी सहारे कभी असली रिश्तों की कमी को पूरा नहीं कर सकते।
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आपकी सोच
प्रश्न 1.
यदि आप जगन मास्टर की जगह होते, तो मिट्टू के उड़ जाने पर क्या करते? क्या आप भी झूठ का सहारा लेते?
उत्तर:
यदि मैं जगन मास्टर की जगह होता, तो मैं भी अत्यधिक अपराधबोध महसूस करता। हालाँकि जगन मास्टर का इरादा नेक था, लेकिन मेरा मानना है कि रिश्तों में पारदर्शिता होनी चाहिए। मैं शायद ताई को सच बता देता और उनसे माफ़ी माँगता। झूठ बोलने से समस्या कुछ समय के लिए टल तो गई, लेकिन अंत में ताई को जो मानसिक चोट लगी, वह सच बोलने से शायद कम होती। मैं ताई को सच बताकर उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए स्वयं उनके साथ अधिक समय बिताने का प्रयास करता।
प्रश्न 2.
क्या पशु-पक्षियों को पिंजरे में पालना सही है? ‘संवादहीन’ कहानी के सदर्भ में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
पक्षियों का असली घर खुला आसमान है। जगन मास्टर की यह सोच बिल्कुल सही थी कि उन्हें कैद करना पाप है। लेकिन कहानी के सदर्भ में देखें, तो मिट्ठू ताई के लिए केवल एक कैदी नहीं बल्कि उनके जीने का आधार था। पिंजरा यहाँ कैद का नहीं, बल्कि सुरक्षा और जुड़ाव का प्रतीक था। मेरे विचार से, यदि कोई पक्षी किसी अकेले व्यक्ति का सहारा है, तो उसे पूरी आज़ादी और देखभाल के साथ रखा जाना चाहिए, लेकिन उन्हें जबरन कैद करना उनकी प्रवृत्ति के विरुद्ध है।
प्रश्न 3.
आज की युवा पीढ़ी को अपने घर के बुजुर्गों के प्रति कैसा व्यवहार रखना चाहिए?
उत्तर:
आज की युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि बुजुर्गों को महँगे उपहारों या सुविधाओं से अधिक ‘समय’ की आवश्यकता होती है। हमें दिन-भर में कम से कम कुछ समय उनके साथ बैठकर बातें करनी चाहिए और उनके अनुभवों को सुनना चाहिए। हमें उन्हें यह अहसास दिलाना चाहिए कि वे हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि हमारी जड़ें हैं। संवादहीनता को खत्म करके ही हम उनके जीवन में फिर से मुस्कान ला सकते हैं।
प्रश्न 4.
कहानी के अंत को सकारात्मक बनाने के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
कहानी के अंत को सकारात्मक कुछ इस तरह बनाया जा सकता है- जगन मास्टर और गनपत द्वारा विचार-विमर्श के पश्चात लाए गए एवजी तोते की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न आने पर ताई धीरे-धीरे यह समझ जाती है कि यह उनका मिट्ठू नहीं है और वह जगन मास्टर के नेक इरादे को भी समझती है। वह मिट्टू के बारे में सोचकर भी खुश होती है कि अब वो किसी बंधन में नहीं हैं, आजाद खुले आसमान में उड़ रहा होगा।
Class 9 Ganga Chapter 3 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
गद्यांश – 1
अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे। ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन भी देखे थे। पूत परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर, क्या नहीं था बड़े घर में! देखते ही देखते क्या से क्या हो गया! बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए। बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं, किसके भरोसे कारबार संभलता । धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया। जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं, पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही, पर सूने घर की भाँय-भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी। (पृष्ठ 46)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
ताई के घर को ‘सूना खंडहर’ क्यों कहा गया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
ताई के घर में अब न तो परिवार की चहल-पहल थी और न ही बच्चों की किलकारियाँ पति की मृत्यु, जायदाद का पराए हाथों में जाना और बेटों का शहर जाकर माँ को भूल जाना, बेटियाँ शादी के बाद अपने गृहस्थी में व्यस्त हो गईं। इन कारणों से वह विशाल घर भावनात्मक रूप से खाली हो गया था। जहाँ केवल सन्नाटा और ताई का एकाकीपन बचा था। इसलिए उसे ‘सूना खंडहर’ कहा गया।
प्रश्न 2.
अतीत में ताई के घर की स्थिति कैसी थी और वर्तमान में क्या बदलाव आया?
उत्तर:
अतीत में घर वैभवशाली था नौकर चाकर थे और घर रौनक से भरा था। वर्तमान में सब शांत हैं। जायदाद पराए हाथों में है और ताई अकेली रह गई हैं।
प्रश्न 3.
बेटों के व्यवहार के बारे में गद्यांश से क्या पता चलता है?
उत्तर:
बेटे स्वार्थी और आधुनिकता की चकाचौंध में डूबे हुए हैं। उन्हें अपनी माँ की ममता और ज़रूरतों की कोई सुध नहीं है।
गद्यांश – 2
भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था, वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी। वह रात-दिन मिट्टू को लेकर ही बेचैन रहने लगीं। जो ताई अपनी खातिर चूल्हा जलाने में आलस्य कर जाती थीं, वही अब नियमपूर्वक मिट्टू के लिए दाल-भात बनातीं। मिट्ठू के वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखतीं। अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चे तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।
कुशाग्रबुद्धि छात्र की तरह मिट्ठू ताई के पढ़ाए पाठ को न केवल हू-ब-हू दुहरा देता बल्कि एक-दो बार सुनकर याद भी रख लेता था और मौके बे-मौके ताई के सवालों का सटीक उत्तर दे देता। बड़े घर का सूनापन धीरे-धीरे मिट्ठू की बातचीत से अब रौनक में बदल गया था, अड़ोस-पड़ोस की बहू-बेटियाँ बच्चों को गोदी में उठाकर मिट्ठू से उनका मन बहलाने के लिए आ जुटती और घर गुलजार हो जाता। (पृष्ठ 46)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
मिट्ठू के आने से ताई के व्यक्तित्व और दिनचर्या में क्या-क्या बदलाव आए?
उत्तर:
ताई जो पहले निरुत्साहित रहती थीं, अब नियम से सुबह उठने लगी, चाव से मिट्टू के लिए खाना बनाने लगी। उनके जीवन में जीने का एक नया मकसद आ गया।
प्रश्न 2.
मिट्टू और ताई के बीच किस प्रकार का संवाद स्थापित हो गया था?
उत्तर:
ताई और मिट्टू के बीच शब्दों से परे भावनाओं का संवाद था। मिट्ठू ताई की बातें सुनकर दोहराता और उनके सवालों के सही जवाब देता था।
प्रश्न 3.
“ताई की ममता उस पक्षी पर बरस रही थी” इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इसका अर्थ है कि ताई के भीतर जो प्रेम और वात्सल्य अपने बच्चों के लिए था, जिसे बेटों ने ठुकरा दिया था, अब वही अटूट प्रेम उस निर्दोष पक्षी के प्रति उमड़ रहा था।
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गद्यांश – 3
ताई को घड़ी-भर के लिए भी मिट्टू का वियोग सहन नहीं हो सकता था। कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी पीते- बुलावे में जाती तो दस बार खिड़की-दरवाजों की सकले टोहकर देखतीं, कंजूस के धन की तरह मिट्टू को छिपाकर रखती और जल्दी लौट आने का दिलासा देकर देहरी से पाँव बाहर निकालतीं। लेकिन एक संयोग आ पड़ा कि लाई धर्म-संकट में पड़ गई। इस लोक में ताई ने बहुत ऊँच-नीच देख लिए थे, अब कभी-कभी परलोक की चिंता भी मन में घर कर जाती गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे, अच्छा साथ बन रहा था। प्रयाग में कुंभ स्नान का लोभ जहाँ उन्हें अपनी ओर खींच रहा था, वहीं मिट्टू की चिंता अपनी ओर खींच रही थी। हँसी-हँसी में किसी ने सलाह दी. “ताई. मिट्टू को भी साथ ले चलो. उसे भी गंगा स्नान करा देना।” किसी दूसरे ने टोक दिया कि रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता बतियाता प्राणी है। ताई पशोपेश में पड़ गई टिकट का पैसा भी वह मिट्टू की खातिर खर्च कर देती लेकिन मेले ठेले, भीड़-भाड़ में उसकी सुरक्षा के बारे में उन्हें पूरा भरोसा नहीं था, अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी। वह ताई के लौटने तक मिट्टू को अपने पास रखने के लिए सहमत हो गई थी विदा के दिन ताई की आँसुओं की धार रुके नहीं सकती थी। बार-बार वह मिट्टू को पुचकारती, जल्दी लौट आने का दिलासा देतीं। मिट्टू भी उनकी बातों के उत्तर में ‘हर हर गंगे’, ‘राम राम सीताराम’ कहकर उन्हें भरोसा देते रहे कि वह जगन मास्टर की घरवाली के साथ प्रेम से रह लेंगे। (पृष्ठ 48)
लघुत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
गई मिट्टू को अपने साथ क्यों नहीं ले जाना चाहती र्थी?
उत्तर:
ताई मिट्टू को इसलिए साथ नहीं ले जाना चाहती थीं क्योंकि मेले की भीड़-भाड़ में उसकी सुरक्षा को लेकर उन्हें चिंता थी।
प्रश्न 2.
कुंभ स्नान के लिए जाने के समय ताई के मन में कौन-कौन सी चिंताएँ थीं?
उत्तर:
ताई के मन में मिट्ठू की सुरक्षा को लेकर चिंता थी, ताई मिट्टू के लिए यात्रा के खर्च भी कर देती, परंतु उन्हें मिट्टू के भीड़-भाड़ में उसके खो जाने जैसी कई चिंताएँ थीं।
प्रश्न 3.
विदा के समय ताई और मिट्टू के बीच क्या भावनात्मक स्थिति थी?
उत्तर:
विदा के समय ताई बहुत भावुक हो गई थीं, उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे और वे मिट्टू को बार-बार पुचकारकर जल्दी लौटने का दिलासा दे रही थीं।
गद्यांश – 4
जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे। उन्होंने अपने कुछ नियम- सिद्धांत बना रखे थे और भरसक कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे। स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। पिंजड़े में बंद मिट्टू को देखकर उन्हें बेचैनी होने लगती। जब-जब मिट्ठू को देखते अपनी पत्नी की बुद्धि पर तरस खाते और अपने आप को भी दोषी अनुभव करते।
जगन मास्टर के लिए जब मिट्ठू की यातना असह्य हो गई, तो उन्होंने एक दिन कमरा बंदकर मिट्टू के पिंजरे को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया, ताकि उसे कुछ देर के लिए ही सही, खुली हवा में आने का मौका देकर अपने पाप का थोड़ा प्रायश्चित कर लें। (पृष्ठ 49)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
जगन मास्टर का स्वभाव और उनके विचार कैसे थे?
उत्तर:
जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों वाले, दयालु और दूसरों को कष्ट न पहुँचाने वाले व्यक्ति थे।
प्रश्न 2.
मिट्टू को पिंजरे में देखकर जगन मास्टर को कैसा महसूस होता था और क्यों?
उत्तर:
मिट्ठू को पिंजरे में देखकर उन्हें बेचैनी होती थी क्योंकि वे स्वतंत्रता के पक्षधर थे।
प्रश्न 3.
जगन मास्टर में मिट्टू के साथ क्या किया और उसके पीछे उनका क्या उद्देश्य था?
उत्तर:
उन्होंने पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया ताकि मिट्टू खुली हवा में रह सके और वे अपने पाप पर प्रायश्चित कर सके।
गद्यांश – 5
ताई के लौटने का दिन निकट आ रहा था। गाँव में सभी के मन में इस अनहोनी घटना ने एक गहरी आशंका को जन्म दे दिया था। ताई के तेज स्वभाव के अतिरिक्त मिट्टू के प्रति उनके लगाव को सभी जानते थे और लौटकर मिट्टू को न पाने पर उनकी क्या दशा हो सकती है, इसका अनुमान वे भली-भाँति लगा सकते थे। बहुत सोच-विचार के बाद आखिर गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत – शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए, ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके और दूसरे दिन सच ही वह तोता लेकर हाजिर हो गया। (पृष्ठ 50)
अब जगन मास्टर की जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ। वह तोते को पिंजरे में रखकर पाठ पढ़ाने लगे, ताकि ताई के आने तक वह भी दो अक्षर सीख ले। यह एक संयोग ही है। कि जगन मास्टर ने अंतिम दिन ताई के मिट्टू को गीता के दो-चार श्लोक रटाने की कल्पना की थी, ताकि गंगा स्नान का पुण्य अर्जन कर लौटी हुई ताई अपने मिट्ठू के मुँह से गीता सुन सकें। (पृष्ठ 50)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
गाँव वालों के मन में किस बात की आशंका थी और क्यों?
उत्तर:
गाँव वालों के मन में इस बात की आशंका थी कि जब ताई वापस आएँगी और अपने प्रिय तोते मिट्टू को नहीं पाएँगी, तो उनकी क्या दशा होगी। ऐसा इसलिए था क्योंकि सभी ताई के तेज स्वभाव और मिट्ठू के प्रति उनके गहरे लगाव से अच्छी तरह परिचित थे।
प्रश्न 2.
मिट्ठू की अनुपस्थिति की समस्या का क्या समाधान निकाला गया?
उत्तर:
बहुत सोच-विचार के बाद यह समाधान निकाला गया कि मिट्टू की ही सूरत – शक्ल का एक दूसरा तोता लाकर पिंजरे में रख दिया जाए, ताकि ताई को धोखे में रखा जा सके और उन्हें सच का पता न चले।
प्रश्न 3.
जगन मास्टर नए तोते को क्या सिखाने का प्रयास कर रहे थे और क्यों?
उत्तर:
जगन मास्टर नए तोते को पिंजरे में रखकर उसे ‘दो अक्षर’ (बोलना) सिखाने का प्रयास कर रहे थे। उनका उद्देश्य यह था कि ताई के आने तक तोता कुछ बोलना सीख जाए, जिससे ताई को जरा भी शक न हो कि यह उनका पुराना मिट्ठू नहीं है।
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Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
कुंभ – स्नान से लौटकर सभी तीर्थयात्री अपने-अपने घरों की ओर चल दिए लेकिन ताई सीधे बड़े घर की ओर न जाकर जगन मास्टर के दरवाजे पहुँचीं। ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा, पिंजड़े में कूद-फाँद मचाकर तूफान खड़ा कर देगा, लेकिन वहाँ बैठे एवजी मिट्टू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की, वह केवल इंधर-उधर ताकता रहा।
ताई अपने मिट्टू को गुहार कर थक गई लेकिन उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा। (पृष्ठ 51)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
कुंभ – स्नान से लौटने के बाद ताई अपने घर न जाकर जगन मास्टर के यहाँ क्यों गईं?
प्रश्न 2.
ताई ने ‘मिट्ठू’ से मिलने पर क्या उम्मीद की थी और वास्तविकता क्या निकली ?
प्रश्न 3.
‘एवजी मिट्टू’ के व्यवहार ने ताई को किस मानसिक स्थिति में डाल दिया?
बहुविकल्पी प्रश्नः
प्रश्न 4.
ताई को देखते ही एवजी मिट्ठू ने क्या प्रतिक्रिया दी?
(क) ‘राम-राम’ चिल्लाने लगा
(ख) पिंजरे में पंख फड़फड़ाने लगा
(ग) वह केवल इधर-उधर ताकता रहा
(घ) डरकर छिप गया
प्रश्न 5.
गद्यांश में ‘आसमान सिर पर उठा लेना’ मुहावरे का क्या अर्थ हो सकता है?
(क) बहुत शोर मचाना
(ख) बहुत भारी काम करना
(ग) आसमान की ओर देखना
(घ) गर्व महसूस करना
प्रश्न 6.
ताई के सूनेपन का साथी’ किसे कहा गया है?
(क) जगन मास्टर को
(ख) तीर्थयात्रियों को
(ग) असली मिट्टू (तोते) को
(घ) गंगा नदी को
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
ताई के घर की वर्तमान स्थिति को लेखक ने किस शब्द से परिभाषित किया?
(क) राजमहल
(ख) छोटा कमरा
(ग) सूना खंडहर
(घ) व्यस्त हवेली
प्रश्न 2.
ताई के बेटों ने गाँव क्यों छोड़ दिया था?
(क) खेती करने के लिए
(ख) तीर्थयात्रा के लिए
(ग) शहर की आधुनिकता और रोज़गार के लिए
(घ) जगन मास्टर के डर से
प्रश्न 3.
मिट्ठू की आँखों की क्या विशेषता बताई गई है?
(क) वे नीली थीं
(ख) वे कुशाग्रबुद्धि का परिचय देने वाली ‘तिरछी’ आँखे थीं
(ग) वे हमेशा बंद रहती थीं
(घ) वे बहुत बड़ी और डरावनी थीं
प्रश्न 4.
जगन मास्टर के अनुसार किसी पक्षी को पिंजरे में कैद करना क्या है?
(क) एक अच्छा काम
(ख) मनोरंजन का साधन
(ग) नैतिक अपराध और पाप
(घ) समय बिताने का तरीका
प्रश्न 5.
ताई की अनुपस्थिति में मिट्ठू के साथ क्या हुआ?
(क) वह बीमार हो गया
(ख) जगन मास्टर ने उसे आज़ाद कर दिया
(ग) वह पिंजरे से खुद भाग गया
(घ) गनपत उसे बेच आया
प्रश्न 6.
‘एवजी’ तोता तैयार करने के लिए जगन मास्टर ने क्या प्रयत्न किए?
(क) उसे बाजार में खुला छोड़ दिया
(ख) उसे पाठ पढ़ाने लगे
(ग) उसे बोलना नहीं सिखाया
(घ) उसे नीले रंग से रंग दिया
प्रश्न 7.
तीर्थयात्रा से लौटने पर ताई को नए तोते में क्या कमी महसूस हुई?
(क) वह ‘सीताराम’ नहीं बोलता था
(ख) उसका रंग हरा नहीं था
(ग) वह कुछ न बोलता था, केवल इधर-उधर ताकता रहता था।
(घ) वह खाना नहीं खाता था
प्रश्न 8.
कहानी में ‘संवादहीनता’ शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
(क) जब लोग बहुत शोर करते हैं
(ख) जब भाषा का ज्ञान न हो
(ग) जब आवाज़ हो, लेकिन बात करने वाला कोई न हो
(घ) जब तोता उड़ जाए
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
ताई के तीर्थ यात्रा पर जाने के बाद मिट्टू की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी?
प्रश्न 2.
जगन मास्टर ने नए तोते को प्रशिक्षण कहाँ और कैसे दिया?
प्रश्न 3.
मिट्ठू ताई को क्या कहकर आशीर्वाद देता था?
प्रश्न 4.
ताई के बेटे शहर की किस चमक-धमक में खो गए थे?
प्रश्न 5.
ताई की संपत्ति और वैभव का अंत कैसे हुआ?
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लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
ताई के व्यक्तित्व में आए ‘निरुत्साह’ और ‘उत्साह’ के क्षणों का वर्णन कीजिए।
प्रश्न 2.
क्या नया तोता ताई की भावनात्मक ज़रूरतों को पूरा कर सका? क्यों?
प्रश्न 3.
“पक्षी को पिंजरे में कैद करना पाप है”- जगन मास्टर के इस विचार पर अपनी टिप्पणी लिखें।
प्रश्न 4.
‘एवजी मिट्टू’ तैयार करने में जगन मास्टर ने क्या-क्या प्रयास किए?
दीर्घ लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
‘संवादहीन’ कहानी मानवीय संवेदनाओं और पशु-पक्षियों के बीच के प्रेम का एक अद्भुत उदाहरण है। विस्तार से
प्रश्न 2.
ताई के घर की ‘विशाल हवेली’ से लेकर ‘सूने खंडहर ‘ तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
प्रश्न 3.
कहानी के उन मोड़ों का उल्लेख कीजिए जहाँ संवाद (बातचीत) होने के बावजूद पात्रों के बीच ‘संवादहीनता’ बनी रही।
सोच पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
वर्तमान युग में मोबाइल और तकनीक के कारण बढ़ रही ‘पारिवारिक संवादहीनता’ को आप कहानी के संदर्भ में कैसे देखते हैं?
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