Tuesday, 31 March 2026

Class 7 SST Chapter 11 Notes in Hindi वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

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From Barter to Money Class 7 Notes in Hindi

वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Class 7 Notes

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 11 नोट्स वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

→ प्रस्तावना

  • वस्तु विनिमय प्रणाली दुनिया-भर में विनिमय का सबसे शुरुआती रूप थी, जिसमें लोग अन्य वस्तुओं या सेवाओं का आदान-प्रदान करते थे।
  • उदाहरण के लिए, विक्रेता घरों का दौरा करते थे और पुराने कपड़ों के बदले नए वर्तन देते थे। इसी तरह, चाय, नमक, तंबाकू, कपड़, मवेशी आदि वस्तुओं का भी आदान-प्रदान किया जाता था।
  • आज हम वस्तुओं को खरीदने और बेचने के लिए सिक्कों और नोटों का प्रयोग करते हैं। लोग इस तरह के लेन-देन के लिए अपने मोबाइल फोन और कंप्यूटर का भी प्रयोग करते हैं।
  • वस्तु विनिमय प्रणाली मूलतः कार्यात्मक थी, फिर भी उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जैसे आवश्यकताओं का द्विसंयोग, मूल्य का समान माप का अभाव, विभाज्यता, सुवाह्यता और स्थायित्व के मुद्दे प्रमुख हैं।
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Class 7 SST Chapter 11 Notes in Hindi वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

→ हमें मुद्रा की आवश्कता क्यों है?

वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाओं के कारण मुद्रा का अविष्कार हुआ। पाठ में वर्णित एक किसान की कहानी में इन चुनौतियों/सीमाओं को दर्शाती है-

  • आवश्यकताओं का द्विसंयोग-ऐसे व्यक्ति को ढूँड़ना जो एक बैल चाहता हो और बदले में जूंते एक स्वंटर और दवाएँ प्रदान करता हो, मिलना मुश्किल है।
  • सामान्य मूल्य माप का अभाव-उचित विनिमय अनुपात (जैसे-कितने गंहूँ एक जाड़ी जूते के बराबर है?) को लंकर मूल्य तय करना. मुश्किल होता है।
  • विभाज्यता और सुवाह्यता-अन्य वस्तुओं/माल के बदले में बैल को अलग-अलग जगहों पर ले जाना व्यावहारिक रूप से सुविधाजनक नहीं है।
  • स्थायित्व-खराब होने वाली वस्तुओं (जैसे-गेहूँ, अनाज) को लंबे समय तक संगृहीत नहीं किया जा सकता है।

इन समस्याओं के समाधान के रूप में मुद्रा का उदय हुआ, जिसने लेन-देन को सरल बनाया और कुशल व्यापार को सक्षम किया।
1. मुद्रा के कार्य: मुद्रा चार मुख्य उद्देश्यों की पूर्ति करती है-

  • विनिमय का माध्यम-वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने/बेचने के लिए सार्वभौमिक रूप से स्वीकार की जाती है। जैसे-दुकानदार को भुगतान करना।
  • मूल्य का भंडार-इसे बचाया जा सकता है और बाद में उपयोग किया जा सकता है, जबकि वस्तुओं को भंडारित करना मुश्किल प्रक्रिया है।
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  • समान मूल्य/कीमत-कीमतों की तुलना करने के लिए एक मानक प्रदान करता है, जैसे-एक किताब की कीमत ₹ 100 /- है।
  • भविष्यगत भुगतान का मानक-भविष्य में भुगतान की अनुमति देता है। जैसे-किसी दुकानदार/फर्म को किश्तों में भुगतान करना।

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2. मुद्रा की यात्रा
सिक्के-सिक्के पैसे का सबसे शुरुआती रूप थे और उन्हें राजाओं द्वारा बनाया (ढाला), जारी और नियंत्रित किया जाता था।

  • शुरुआती सिक्के सोने, चाँदी, ताँबे या मिश्र धातुओं जैसी कीमती धातुओं से बने होते थे, जैसे- बाघ के प्रतीक वाले चोल सिक्के।
  • शासकों, देवताओं या प्रकृति के प्रतीक चित्रित होते थे, जैसे-भगवान विष्णु के अवतारों वाले चालुक्यन सिक्के।
  • सिक्के के दो पक्ष होते हैं, सामने वाले भाग को अग्रभाग या शीर्ष और पीछे वाले भाग को पृष्ठभाग कहते हैं।
  • प्राचीन काल में विभिन्न राजवंशों द्वारा उनकी संस्कृति और उनके राजा-रानी, स्थानीय देवीदेवताओं, प्राकृतिक रूपांकनों जैसे-पहाड़, पेड़ जानवर आदि के आधार पर कई अलग-अलग प्रकार के प्रतीक चिह्न उकेरे गए थे।
  • सिक्कों के आदान-प्रदान ने प्राचीन काल के दौरान भारत के समुद्री व्यापार को विदेशों में फैलाने में भी मदद की।
  • ‘पण’ (प्राचीन भारतीय मुद्रा) शब्द क्षेत्रीय शब्दों से ‘पैसा’ में विकसित हुआ।

कागज़ी मुद्रा

  • सिक्कों के भारीपन की समस्या को दूर करने के लिए चीन में और बाद में भारत में ( 18 वीं शताब्दी) शुरू हुआ।
  • इसे केंद्रीय प्राधिकरण, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सुरक्षा सुविधाओं के साथ (जैसे- दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्पर्श वाली ब्रेल लिपि के समान) जारी किया गया।
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  • बैंक ऑफ बंगाल ने एकमुखी नोट बनाया और बैंक ऑफ बॉम्बे ने दस रुपये का नोट जारी किया।
  • भारत सरकार ने 2010 में ‘₹’ चिह्न को स्वीकृति दी, यह चिह्न देवनागरी लिपि के ‘र’ और रोमन अक्षर ‘ R ‘ का मिश्रण है। यह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के उदय कुमार द्वारा डिजाइन किया गया था।
    मुद्रा के नए रूप-मुद्रा के मूर्त रूप (सिक्के, नोट) के अलावा अमूर्त रूप, जिन्हें हम न छू सकते हैं, न ही महसूस कर सकते हैं। इसे डिजिटल मुद्रा कहते हैं। इसके अंतर्गत डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, यू.पी.आई. (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) द्वारा भी लेन-देन किया जाता है। अमूर्त मुद्रा से भौतिक मुद्रा पर निर्भरता कम होती है।

Class 7 SST Chapter 11 Notes in Hindi वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

मुद्रा का विकास क्रम
(i) वस्तु विनिमय
(ii) सिक्के
(iii) कागज़ी मुद्रा
(iv) डिजिटल मुद्रा

 

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