Friday, 27 March 2026

Class 7 SST Chapter 2 Notes in Hindi मौसम को समझना

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Understanding the Weather Class 7 Notes in Hindi

मौसम को समझना Class 7 Notes

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 नोट्स मौसम को समझना

मौसम

→ किसी स्थान विशेष पर किसी निश्चित समय पर पृथ्वी की वायुमंडलीय दशाओं को मौसम कहते हैं।
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→ वायुमंडल-वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है, जो पृथ्वी के चारों ओर काफी ऊँचाई तक एक आवरण की तरह फैला है। यह वायुमंडल पृथ्वी पर समान रूप से सर्वत्र व्याप्त है।

→ वायु विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है, जिसमें ठोस और तरल पदार्थों के कण असमान मात्राओं में उपस्थित रहते हैं।
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→ मौसम का वर्णन करने के लिए हम अनेक शब्दों का उपयोग करते हैं, जैसे-गर्म, ठंडा, वर्षा, मेघाच्छादित, आर्द्र, बर्फीला, तूफानी इत्यादि।

मौसम के तत्व

  • मौसम के अनेक तत्व हैं, जैसे-तापमान, वर्षण, वायुमंडलीय दबाव, पवन और आर्द्रता।
  • मौसम समय और स्थान के अनुसार निरंतर परिवर्तनशील है।
  • प्राचीनकाल से ही मानव ने प्रकृति का ध्यानपूर्वक अवलोकन करते हुए मौसम के पूर्वानुमान के लिए इसके संकेतों को पढ़ना सीखा है।
  • आज भी भारत के लोग मौसम का पूर्वानुमान, विशेषकर मानसून के आगमन के लिए अनेक पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके लगाते हैं।

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मौसम मापन के उपकरण

→  पिछली कुछ शताब्दियों में वैज्ञानिकों ने मौसम के तत्वों को बहुत ही सटीकता के साथ मापने और निरीक्षण करने के तरीकों पर कार्य किया है। यह आधुनिक उपकरणों से अनुमान लगाने का प्रयास करते हैं कि मौसम किसी क्षेत्र विशेष में कुछ घंटों, कुछ दिन अथवा कुछ सप्ताह बाद कैसा होगा।

(i) तापमान का मापन

  • किसी स्थान के तापमान को मापने के लिए थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है।
  • थर्मामीटर कई प्रकार के होते हैं। कुछ सामान्य तापमान को नापने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं जबकि अन्य से दिन के अधिकतम और न्यूनतम तापमान को नापते हैं।
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  • थर्मामीटर (तापमापी) प्रायः रंगीन द्रव का उपयोग करते हैं, जो तापमान बढ़ने पर फैलता है।
  • वर्तमान में ज्यादा सटीक मापन के लिए अंकीय (डिजिटल) थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है।
  • थर्मामीटर द्वारा तापमान को मापने में प्रायः दो प्रदार के पैमानों का उपयोग किया जाता है, जैसे-सेल्सियस पैमाना और फॉरेनहाइट पैमाना।

(ii) वर्षण

  • वायुमंडल से जल का किसी भी रूप में धरातल पर गिरना वर्षण कहलाता है।
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  • फुहार, वर्षा, बौछार, हिमपात, ओलावृष्टि आदि इसके विभिन्न रूप हैं।
  • वर्षा की मात्रा को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है उसे वर्षामापी यंत्र कहते हैं।
  • वर्षा की मात्रा को सेंटीमीटर अथवा मिलीमीटर में मापा जाता है।

(iii) वायुमंडलीय दाब

  • वायु में भार होता है और वह पृथ्वी की सतह पर दबाव डालती है।
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  • धरातल पर या सागर तल पर क्षेत्रफल की प्रति इकाई जैसे-एक वर्ग से.मी. पर वायुमंडल की सभी परतों के पड़ने वाले कुल भार को वायुदाब कहा जाता है।
  • वायुदाब को मापने के लिए उपयोग में आने वाले उपकरण को वायुदाबमापी (बैरोमीटर) कहा जाता है।
  • वायुदाब को मापने वाली इकाई मिलीबार (mb) है। एक मिलीबार, एक वर्ग से.मी. क्षेत्रफल पर एक ग्राम भार के बल के बराबर होता है।
  • समुद्रतल पर औसतन सामान्य वायुमंडलीय दाब लगभग 1013 मिलीबार होता है।

(iv) पवन

  • वायुदाब में परिवर्तन के कारण वायु की क्षैतिज दिशा में होने वाली गति को पवन कहते हैं। यह उच्च वायुदाब वाले क्षेत्रों से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों की ओर गति करती है।
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  • पवन, मौसम का एक महत्वपूर्ण तत्व है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने में इसकी गति और दिशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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  • पवन की गति और दिशा को मापने का सबसे सरल उपकरण पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) है।
  • पवन की गति को किलोमीटर प्रति घंटा में मापा जाता है।
  • वायुमंडल में वायु की ऊधर्वाधर गति भी पाई जाती है। वायु के धरातल से ऊपर की ओर अथवा ऊपर से नीचे की ओर गतिशील होने को वायुधारा कहा जाता है।

(v) आर्द्रता

  • वायु में उपस्थित जलवाष्प को आर्द्रता कहा जाता है।
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  • वायु में जलवाष्प की मात्रा तापमान, पवन और वायुदाब जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
  • आर्द्रता के संघनित रूप धारण करने से बादल बनते हैं और बादलों से वर्षण होता है।
  • आर्द्रता को मापने के लिए आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है।

मौसम केंद्र

  • मौसम केंद्र से अभिप्राय उस स्थान/भवन/प्रयोगशाला से है जहाँ मौसम को मापने के लिए आवश्यक सभी उपकरण लगे होते हैं।
  • मौसम केंद्र, मौसम की निगरानी और आकलन का कार्य करते हैं।
  • मौसम केंद्र, मौसम के मानचित्रण और पूर्वानुमान में भी सहायक होते हैं।

मौसम का पूर्वानुमान

  • मौसम विज्ञानी लंबे समय तक मौसम केंद्रों पर उपकरणों का उपयोग करके प्राप्त आँकड़ों के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाते हैं।
  • मौसम का सटीक पूर्वानुमान हमें सूखा, बाढ़, चक्रवात, भारी वर्षा आदि मौसमी घटनाओं/आपदाओं से बचाने में सहायक होता है।

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