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Class 7 Social Science Chapter 3 Question Answer in Hindi भारत की जलवायु
भारत की जलवायु Question Answer in Hindi
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 के प्रश्न उत्तर भारत की जलवायु
प्रश्न 1.
भारतीय जलवायु को कौन-कौन से तत्व विविध बनाते हैं? ( पृष्ठ 45)
उत्तर:
भारत की जलवायु को विविध बनाने वाले प्रमुख कारक निम्न प्रकार हैं-
(i) अक्षांश-भूमध्य रेखा (0°) पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं जबकि ध्रुवों पर तिरछी पड़ती हैं, परिणामस्वरूप ध्रुवीय क्षेत्रों को भूमध्य रेखीय क्षेत्रों की तुलना में कम ताप मिलता है। इस कारण से भारत में कन्याकुमारी और निकोबार द्वीप समूह लगभग पूरे वर्ष गर्म रहते हैं जबकि उत्तर में स्थित भाग बहुत ठंडे होते हैं।
(ii) ऊँचाई-ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान में कमी आती है। इसलिए हिमालय तथा दक्षिण की पहाड़ियों में स्थित पर्यटन केंद्र भारत के मैदानी भागों की तुलना में ठंडे होते हैं।
(iii) समुद्र से निकटता-स्थल समीर एवं समुद्र समीर के कारण समुद्र अपने निकटवर्ती स्थानों के तापमान को नियंत्रित करता है जिसके कारण वहाँ दिन एवं रात के तापमान में अंतर कम होता है। यहाँ वार्षिक तापांतर भी कम होता है। समुद्र से दूर जाने पर तापांतर बढ़ जाता है। इसी कारण मुंबई और नागपुर के एक समान अक्षांश पर होने के बावजूद भी मौसम में काफी अंतर देखने को मिलता है।
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(iv) पवनें-पवनें ठंडी तथा गर्म वायुराशियों को संचालित करती हैं। पवनें न केवल तापमान को प्रभावित करती हैं, बल्कि आर्द्रता और वर्षण को भी प्रभावित करती हैं। मरुस्थलों से चलने वाली पवनें शुष्क होती हैं जबकि समुद्रों से चलने वाली पवनें धरातल पर नमी लेकर आती हैं।
(v) स्थलाकृति-स्थलाकृति भी भारत की जलवायु को विविधता प्रदान करती है। हिमालय पर्वत हमें मध्य एशिया से आने वाली ठंडी पवनों| से बचाता है। मरुस्थल की समतल स्थलाकृति के कारण अरब के रेगिस्तान से चलकर आने वाली शुष्क और गर्म पवनें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश तक ग्रीष्मकाल में भयंकर ताप लहर का कारण बनती हैं।
प्रश्न 2.
मानसून क्या है? यह कैसे बनता है? (पृष्ठ 45)
उत्तर:
मानसून-मानसून शब्द अरबी भाषा के ‘मौसिम’ से आया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ॠतु। मानसून से अभिप्राय ऐसी ऋतु से है, जिसमें पवनें अपनी दिशा के विपरीत बहना शुरू कर देती हैं।
मानसून की उत्पत्ति-
(i) मई के महीने में उत्तर-पश्चिम मैदानों में तापमान के तेजी से बढ़ने के कारण निम्न वायुदाब की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जून माह में यह निम्न वायुदाब इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह हिंद महासागर से आने वाली दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित कर लेता है।

(ii) भूमध्य रेखा पार करके इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम हो जाती है। इसी कारण इसे इन पवनों को दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें कहा जाता है। ये पवनें पूरे भारत में जून से सितंबर तक वर्षा करती हैं।
प्रश्न 3.
जलवायु का समाज, संस्कृति और आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
(i) जलवायु का समाज पर प्रभाव-जलवायु का मानव समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यह हमारे मकानों की संरचना, हमारे कपड़े, हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों के साथ-साथ हमारे खान-पान को भी प्रभावित करता है।
(ii) सांस्कृतिक प्रभाव-अधिकांश भारतीय त्योहार जैसे-पोंगल, बैसाखी, होली, दीवाली आदि सभी का प्रत्यक्ष संबंध मौसमी परिवर्तन एवं कृषि ऋतुओं से है।
(iii) आर्थिक प्रभाव-
- कृषि प्रधान देश होने के कारण हमारी फसलों का उत्पादन प्रत्यक्ष रूप से मानसूनी वर्षा पर आधारित होता है। मानसूनी वर्षा में कमी के कारण श्रमिकों के पलायन, कृषि उत्पादों में महाँगाई, मुद्रा स्फीति के रूप में दिखाई देती है।
- अनेक जलवायु जनित आपदाएँ जैसेचक्रवात, बाढ़ एवं भूस्खलन आदि, बड़े पैमाने पर जन और धन की हानि का कारण बनती है।
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प्रश्न 4.
जलवायु की समझ हमें प्राकृतिक आपदा के लिए तैयार रहने में किस प्रकार सहायता करती है? ( पृष्ठ 45)
उत्तर:
जलवायु का अध्ययन हमें मौसम के दीर्घकालीन पैटर्न (प्रणाली), तापमान, वर्षा तथा वायुमंडलीय स्थितियों की जानकारी देता है। यह जानकारी हमें आपदाओं से निपटने में निम्न प्रकार सहायता करती हैं-
- समय रहते चेतावनी-चक्रवात, भारी वर्षा या हीट वेव की पूर्व जानकारी प्राप्त होने पर लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकते हैं, जिससे नुकसान कम होता है।
- जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान-जलवायु के पैटर्न की जानकारी से ज्ञात किया जा सकता है कि किन क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना है, कौन-से क्षेत्र चक्रवात के मार्ग में आ सकते हैं। किन क्षेत्रों में वर्षा की संभावना कम है।
- कृषि योजना और खाद्य सुरक्षा-जलवायु की समझ से किसानों को पता चलता है कि कब वर्षा होगी, किस क्षेत्र में किस फसल की खेती सुरक्षित है।
- आपदा प्रबंधन योजनाएँ एवं संरचनात्मक तैयारी-प्राप्त जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एन.डी.आर.एफ.) को तैयार किया जा सकता है। जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयास संभव हैं। समुद्र तटों पर चक्रवात रोधी आश्रयों का निर्माण, बाँधों एवं तटबंधों का निर्माण करके नुकसान को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही जन जागरूकता अभियान चलाकर भी आपदा के जोखिम को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 5.
जलवायु परिवर्तन क्या है? इसके परिणाम क्या-क्या होते हैं? ( पृष्ठ 45)
उत्तर:
(i) जलवायु परिवर्तन-पृथ्वी की जलवायु में होने वाले दीर्घकालीन बदलावों (वैश्विक तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन, समुद्र तल में परिवर्तन, शीतलहर अथवा हीट वेव की तीव्रता) को ही जलवायु परिवर्तन कहते हैं।
(ii) जलवायु परिवर्तन के कारण
- जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग
- वनों की कटाई
- औद्योगिक उत्सर्जन
- अत्यधिक कृषि एवं पशुपालन
- ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि
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(iii) जलवायु परिवर्तन के परिणाम
- वैश्विक तापमान में वृद्धि
- समुद्र के स्तर में वृद्धि
- अनियमित और चरम मौसमी परिस्थितियाँ
- कृषि पर नकारात्मक प्रभाव
- जैव विविधता पर संकट
- स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव।
आइए पता लगाएँ ( पृष्ठ 47)
प्रश्न 1.
आपकी प्रिय ऋतुएँ कौन-सी हैं? अपने कारणों सहित इस पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए।
उत्तर:
मेरी प्रिय ऋतु-प्रकृति ने हमें अनेक ॠतुएँ दी हैं। प्रत्येक ॠतु की अपनी विशेषताएँ होती हैं, परंतु मेरी प्रिय ॠतु, वसंत ॠतु है। वसंत को ॠतुओं का राजा भी कहा जाता है क्योंकि इस समय प्रकृति सबसे अधिक सुंदर, शांत और मनमोहक दिखाई देती है।
वसंत ॠतु में चारों ओर हरियाली छा जाती है। पेड़ों पर नई कोपलें निकल आती हैं, फूल खिलते हैं और वातावरण सुगंधित हो जाता है। यह ॠतु न बहुत गर्म होती है और न बहुत ठंडी, इसलिए मौसम मन को प्रसन्न और शरीर को आरामदायक लगता है। वसंत ऋतु के समय खेतों में सरसों, गेहूँ और अन्य फसलों की लहरें ग्रामीण क्षेत्रों के सौंदर्य को और भी बढ़ा देती है।
इस ऋतु को नई ऊर्जा और आशा का प्रतीक भी माना जाता है। वसंत के समय वसंत पंचमी का त्योहार भी मनाया जाता है। जिसमें ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस प्रकार वसंत ॠतु मानव जीवन में खुशियाँ, स्वास्थ्य, सौंदर्य और नई उमंग लेकर आती है। यही कारण है कि वसंत मेरी प्रिय ॠतु है।
प्रश्न 2.
आपके क्षेत्र में ऋतुओं से जुड़ी विशेष घटनाओं का पता लगाने के लिए तीन या चार विद्यार्थियों के समूह में चर्चा कीजिए। इनसे संबंधित गीत, उत्सवों से संबंधित भोजन, विभिन्न ऋतुओं से संबंधित प्रचलित प्रथाएँ आदि को लिखिए और कक्षा के साथ साझा कीजिए। (पृष्ठ 47)
उत्तर:
(सुझावात्मक उत्तर)
(i) मकर संक्रांति-हमने मकर संक्रांति पर चर्चा की। मकर संक्रांति प्रतिवर्ष जनवरी माह में 14 जनवरी को मनाया जाने वाला प्रसिद्ध त्योहार है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है। इस परिवर्तन से दिन लम्बे और प्रकाश की मात्रा अधिक होने लगती है।
इसलिए यह त्योहार नए आरंभ, उज्ज्वल भविष्य और आशा का प्रतीक है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। तिल और गुड़ का सेवन विशेष रूप से किया जाता है। यह त्योहार हमें प्रकृति के परिवर्तन को स्वीकार करने, सूर्य के महत्व को समझने तथा खुशियों को सबके साथ बाँटने की प्रेरणा देता है। यह त्योहार पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है जैसे-
- उत्तर भारत – मकर संक्रांति
- पंजाब – लोहड़ी
- गुजरात तथा राजस्थान – उत्तरायण तथा पतंगोत्सव
- असम – माघ बिहु
- बंगाल – पौष संक्रांति
(ii) वसंत पंचमी-यह वसंत ॠतु के आगमन का त्योहार है। इस दिन सरस्वती देवी की उपासना की जाती है। उन्हें ज्ञान और संगीत की देवी माना जाता है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले व्यंजन बनाते हैं। प्रकृति में नई ताजगी और हरियाली दिखाई देती है। विद्यालयों में पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह त्योहार आनंद, ज्ञान और नई शुरुआत का संदेश देता है।
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प्रश्न 3.
क्या आप जानते हैं कि आपके क्षेत्र में कौन-सा वृक्ष शीत ॠतु के आगमन से पूर्व अपना रंग बदलते हैं? क्या ऐसे वृक्ष हैं, जो इस समय अपने पत्ते गिरा देते हैं? आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? इन वृक्षों के स्थानीय नामों का पता लगाइए और उनके विषय में लिखिए। (पृष्ठ 47)
उत्तर:
हमारे क्षेत्र में साल, शीशम, नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, बेल इत्यादि वृक्ष अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
इन वृक्षों की पत्तियाँ मुख्य रूप से सर्दी के मौसम या ग्रीष्म ॠतु की शुरुआत में गिरती हैं जिससे कि-
- पानी की बचत हो सके
- वाष्पोत्सर्जन कम हो
- कठोर जलवायु परिस्थिति में जीवित रह सकें।
पत्तियों के झड़ने से वृक्ष अपनी ऊर्जा और नमी को बचाकर रखते हैं और नई ऋतु आने पर फिर से नई पत्तियाँ निकल आती हैं।
प्रश्न 4.
उधगमंडलम ( ऊटी) एवं कोयंबटूर लगभग समान अक्षांशों पर स्थित हैं। ऊटी में गर्मी का तापमान 10-25 डिग्री सेल्सियस जबकि कोयंबटूर में 25-38 डिग्री सेल्सियस होता है। इन दो स्थानों पर तापमान में यह अंतर क्यों है? इस बारे में आप क्या सोचते हैं? (पृष्ठ 51)
उत्तर:
समान अक्षांश पर स्थित होने के बावजूद भी ऊटी और कोयंबटूर के तापमान में भौगोलिक स्थिति और ऊँचाई के कारण अंतर पाया जाता है। इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है-
- ऊँचाई-ऊटी की ऊँचाई लगभग 2200 मीटर है जबकि कोयंबटूर की ऊँचाई केवल 400 मीटर है। जैसा कि हम जानते हैं कि प्रति 1000 मी. की ऊँचाई पर तापमान 6.5° से. कम हो जाता है। इसलिए ऊटी का तापमान कम होता है।
- स्थलाकृति-ऊटी एक पहाड़ी क्षेत्र है जहाँ चारों ओर पहाड़ियाँ तथा वन स्थित हैं जबकि कोयंबटूर मैदानी क्षेत्र है जहाँ शहरी और कृषि क्षेत्र पाया जाता है, जिससे यहाँ तापमान अधिक होता है।
प्रश्न 5.
भारत में मानसूनी वर्षा का पूर्वानुमान सदैव से ही जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। हमारें पूर्वजों ने अपने आस-पास की प्रकृति के संकेतों को ध्यान से देखा और अपने अनुभवों से स्थानीय पारंपरिक ज्ञान विकसित किया। यह पारंपरिक ज्ञान एक महत्वपूर्ण विरासत है, जिसे हमें संरक्षित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कोंकण तट पर मछुआरे मानसून के आगमन की भविष्यवाणी करते हैं, जब जल के नीचे रहने वाली मछलियाँ सतह पर दिखाई देने लगती हैं।
दक्षिण भारत के कुछ भागों में यह माना जाता है कि मानसून गोल्डन शॉवर ट्री या अमलतास (कैसिया फिस्टुला) के खिलने के 50 दिनों के भीतर आ जाता है। कुछ समुदायों का यह भी मानना है कि जब कौए अपने घोंसले पेड़ की चोटी पर बनाते हैं तो यह कम वर्षा का संकेत देता है, जबकि अगर घोंसले नीचे हैं तो भारी वर्षा होने की संभावना होती है। अपने क्षेत्र में वर्षा, कोहरे, हिम या सहिमवृष्टि के बारे में ऐसे स्थानीय ज्ञान की एक सूची बनाइए। (पृष्ठ 56)
उत्तर:
हमारे क्षेत्र में लोगों ने प्रकृति के संकेतों को देखकर मौसम का अनुमान लगाने के लिए बहुत-सा पारंपरिक स्थानीय ज्ञान विकसित किया है, जैसे-
- मान्यतानुसार यदि चींटियाँ अपना टीला ऊँचा बनाती हैं या अपने अंडों को लेकर ऊँचे स्थान पर जाती हैं, तो भारी वर्षा की संभावना होती है।
- कुछ समुदाय यह भी मानते हैं कि कोयल का ऊँचे पेड़ पर घोंसला बनाना कम वर्षा का संकेत है।
- आम के पेड़ों पर बहुत अधिक फूल आना, वर्षा के समय पर आने का संकेत माना जाता है।
- मेंढकों का तेज़ आवाज़ में टर-टर्राना भी वर्षा के आगमन का सूचक माना जाता है।
प्रश्न 6.
अपने दादाजी-दादीजी या पड़ोस के वृद्धजनों से संपर्क कीजिए।उनसे उनके बचपन और युवावस्था में मनाए जाने वाले पारंपरिक त्योहारों और नृत्यों के बारे में पूछिए, जो उन्हें याद हैं विशेषकर जो कृषि और वर्षा से संबंधित थे।वे किन रीति-रिवाजों में भाग लेते थे? फिर अपने साथियों के साथ एक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कीजिए।आप अपने वयोवृद्धों द्वारा साझा किए गए कुछ नृत्यों, गीतों और गतिविधियों को वहाँ प्रदर्शित कर सकते हैं-चाहे वह फसल की रस्म हो या वर्षा के देवताओं की प्रार्थना के बारे में एक सरल कहानी या कोई नृत्य हो। अपने सहपाठियों के लिए इन परंपराओं को जीवंत करने का प्रयास कीजिए।(पृष्ठ 56)
उत्तर:
मैंने अपने दादा-दादी और पड़ोस के बुजुर्ग लोगों से कृषि और वर्षा से जुड़े पारंपरिक त्योहारों और नृत्यों पर चर्चा की। उन्होंने मुझे बैसाखी और मकर संक्रांति जैसे त्योहारों के बारे में बताया, जिनमें लोग फसल कटाई का उत्सव मनाते थे और वर्षा के लिए प्रार्थना करते थे।
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गरबा और भाँगड़ा जैसे नृत्य किए जाते थे, और वर्षा देवता की पूजा जैसे अनुष्ठान भी आम थे। ये त्योहार आज भी मनाए जाते हैं, लेकिन इनकी परंपराओं में कुछ बदलाव आ गए हैं।
उपरोक्त जानकारी इकट्ठा करने के बाद, मेरे दोस्तों और मैंने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें हमने नृत्य किया, गीत गाए और इन परंपराओं को साझा किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक ये रीति-रिवाज़ जीवित रह सकें।
प्रश्न 7.
क्या आपने कभी बाढ़ देखी है अथवा इसके विषय में पढ़ा है? भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए। समूह में चर्चा कीजिए कि बताए गए राज्यों में बाढ़ क्यों आती है? ( पृष्ठ 60)
उत्तर:
भारत में असम, पश्चिम बंगाल और बिहार राज्य सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में से हैं। इसका मुख्य कारण मानसून वर्षा की तीव्रता, चक्रवातीय वर्षा, तथा मानवीय क्रियाकलापों, अंधाधुंध वन कटाव, अवैज्ञानिक कृषि पद्धतियाँ, प्राकृतिक अपवाह तंत्रों का अवरूद्ध होना तथा नदी तल और बाढ़कृत मैदानों पर मानव बसाव आदि हैं।

प्रश्न 8.
चित्र 3.14 को देखिए। आपदा के प्रकार को पहचानिए और लोगों, पेड़-पौधों, जानवरों और आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए। ( पृष्ठ 62)

उत्तर:
दिए गए चित्र में चार प्रकार की आपदाओं (चक्रवात, भूस्खलन, दावानल, बाढ़) को दर्शाया गया है। इनके लोगों, पेड़ पौधों, जानवरों और आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को निम्न प्रकार वर्णित किया जा सकता है-
(i) चक्रवात के प्रभाव-चक्रवात के फलस्वरूप समुद्री जल तटीय क्षेत्रों में घुस जाता है। वायु की गति अत्यधिक तेज़ होती है और भारी वर्षा होती है। इससे तटीय क्षेत्रों में बस्तियाँ, खेत पानी में डूब जाते हैं। पेड़-पौधे उखड़ जाते हैं; फसलों और मानवकृत ढाँचों का विनाश होता है।
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(ii) भूस्खलन के प्रभाव-इसके कारण पर्वतों का पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भी घट रहा है। इसके कारण जलस्रोत सूख जाते हैं। नदियों में बाढ़ आ जाती है। मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। परिवहन व्यवस्था ठप हो जाती है। प्रतिवर्ष अनेक लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बन जाते हैं। गाँव के गाँव नष्ट हो जाते हैं।
(iii) दावानल के प्रभाव-दावानल (जंगल की आग) जंगलों में तीव्र गति से फैलती है। आग जंगल के बड़े क्षेत्रों को नष्ट करने के अलावा, वन्य जीवों, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाती है। हवा की गुणवत्ता को खराब करती है और स्थानीय समुदायों, वन्य जीवों को विस्थापित होने पर विवश करती है। इसलिए इसके परिणाम पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों होते हैं।
(iv) बाढ़ के प्रभाव-नदियों में आई बाढ़ का प्रभाव मानव, पशु एवं वन्य जीव-जंतुओं सभी पर पड़ता है। बाढ़ से लोग बेघर हो जाते हैं। मकान गिर जाते हैं। उद्योग धंधे चौपट हो जाते हैं। फसलें पानी में डूब जाती हैं। निरिह बेजुबान पालतू पशु और वन्य जीव मारे जाते हैं। बाढ़ से मानव के साथ सबसे अधिक नुकसान खड़ी फसलों, मकानों और सार्वजनिक संपत्ति को होता है।
प्रश्न 9.
चार या पाँच के समूहों में ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों की पहचान कीजिए। अपने निष्कर्षों की तुलना कीजिए। (पृष्ठ 62)
उत्तर:
ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(i) बाढ़ के कारण
- प्राकृतिक कारण-भारी वर्षा, नदियों में अवसादों का जमा होना, चक्रवात, बर्फ के पिघलने से नदियों में बाढ़, झीलों में पानी का बढ़ जाना, भूकंप से उत्पन्न होने वाली लहरें तथा नदियों के मार्ग परिवर्तन बाढ़ आने के प्रमुख प्राकृतिक कारण हैं।
- मानवीय कारक-वनों का बड़े पैमाने पर विनाश, बाढ़ क्षेत्र में मानव निर्माणों के कारण प्राकृतिक अपवाह तंत्रों का अवरुद्ध होना, मानव निर्मित बाँधों अथवा तटबंधों का टूटना आदि बाढ़ के प्रमुख मानवीय कारक हैं।
(ii) चक्रवात के कारण
- प्राकृतिक कारण-समुद्र की सतह के गर्म होने के कारण निम्न वायुदाब क्षेत्र का बनना, पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न बल तथा क्षोभमंडल में अस्थिरता आदि चक्रवात के विकसित होने के प्रमुख कारण हैं।
पड़ता है। बाढ़ से लोग बेघर हो जाते हैं। मकान गिर जाते हैं। उद्योग धंधे चौपट हो जाते हैं। फसलें पानी में डूब जाती हैं। निरिह बेजुबान पालतू पशु और वन्य जीव मारे जाते हैं। बाढ़ से मानव के साथ सबसे अधिक नुकसान खड़ी फसलों, मकानों और सार्वजनिक संपत्ति को होता है।
प्रश्न 9.
चार या पाँच के समूहों में ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों की पहचान कीजिए। अपने निष्कर्षों की तुलना कीजिए। ( पृष्ठ 62)
उत्तर:
ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(i) बाढ़ के कारण
- प्राकृतिक कारण-भारी वर्षा, नदियों में अवसादों का जमा होना, चक्रवात, बर्फ के पिघलने से नदियों में बाढ़, झीलों में पानी का बढ़ जाना, भूकंप से उत्पन्न होने वाली लहरें तथा नदियों के मार्ग परिवर्तन बाढ़ आने के प्रमुख प्राकृतिक कारण हैं।
- मानवीय कारक-वनों का बड़े पैमाने पर विनाश, बाढ़ क्षेत्र में मानव निर्माणों के कारण प्राकृतिक अपवाह तंत्रों का अवरुद्ध होना, मानव निर्मित बाँधों अथवा तटबंधों का टूटना आदि बाढ़ के प्रमुख्त्र मानवीय कारक हैं।
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(ii) चक्रवात के कारण
- प्राकृतिक कारण-समुद्र की सतह के गर्म होने के कारण निम्न वायुदाब क्षेत्र का बनना, पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न बल तथा क्षोभमंडल में अस्थिरता आदि चक्रवात के विकसित होने के प्रमुख कारण हैं।
- चक्रवात पूर्णतः एक प्राकृतिक घटना है जिसके विकसित होने में कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता है।
(iii) भूस्खलन के कारण
- प्राकृतिक कारण-प्रायः भूकम्प, ज्वालामुखी सक्रियता अथवा भारी वर्षा भूस्खलन के प्रमुख प्राकृतिक कारण हैं।
- मानवीय कारण-वनों की अनियंत्रित कटाई, दोषपूर्ण कृषि पद्धति, पर्वतीय ढालों पर अवैध निर्माण, प्राकृतिक जल प्रवाह को अवरुद्ध करना अथवा नियंत्रित या परिवर्तित करना, पशु चराई के कारण वन आवरण का नष्ट होना, खनन कार्य एवं सड़क निर्माण आदि भूस्खलन के लिए उत्तरदायी कुछ प्रमुख मानवीय कारण हैं।
(iv) दावानल के कारण-दावानल सामान्यत: शुष्क जलवायु जन्य परिस्थितियों का परिणाम होती है। परंतु वर्तमान में मानवीय स्वार्थ एवं लापरवाही भी इसका प्रमुख कारण है।
प्रश्न 10.
इन्हीं समूहों में उन उपायों पर भी चर्चा कीजिए जो उपर्युक्त आपदाओं से बचने में सहायता कर सकते हैं। ( पृष्ठ 62)
उत्तर:
ऊपर वर्णित प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के कुछ प्रमुख उपाय निम्न प्रकार हैं-
(i) दावानल से बचाव-प्राकृतिक रूप से होने वाली दावानल की घटनाओं पर नियंत्रण तो प्रायः असंभव है परंतु मानवीय हस्तक्षेप को कम करके कुछ घटनाओं को रोका जा सकता है। दावानल को रोकने के लिए जन जागरूकता, आग बुझाने की नवीनतम तकनीकों, हैलिकाप्टरों के उपयोग और एन.डी.आर.एफ. को समय रहते सूचना प्रदान करने के लिए दूर सवेंदन प्रणाली के उपयोग द्वारा इस पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
(ii) भूस्खलन से बचाव-
- वृक्षारोपण को प्रोत्साहन
- सड़क निर्माण में नवीनतम तकनीकों का उपयोग
- खनन कार्यों पर पर्याप्त नियंत्रण एवं निगरानी
- बागानी कृषि को प्रोत्साहन
- आवास निर्माण पर नियंत्रण एवं सुरक्षित स्थानों का चयन
- पशुचारण को नियंत्रित करना
(iii) बाढ़ से बचाव-
- नदी मार्गों में जल संग्रहण जलाशयों का निर्माण
- प्राकृतिक अपवाह तंत्र की पुनर्स्थापना
- नदी तल तथा बाढ़कृत मैदानों में आवास निर्माण पर रोक
- वृक्षारोपण
- तटबंधों का निर्माण
- चैकडैम का निर्माण
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(iv) चक्रवात से बचाव-चक्रवातों को रोकना मनुष्य की सीमा से बाहर है, परंतु उसके दुष्प्रभावों को सीमित किया जा सकता है-
- नियमित मौसम संबंधी जानकारियों को प्राप्त करना
- चक्रवात की सूचना मिलने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाना
- समुद्र तथा मानव आवासों के बीच वृक्षों की कतारें लगाना
- आपातकालीन वस्तुओं की किट तैयार रखना।
भारत की जलवायु Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 3 Question Answer
प्रश्न 1.
जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए- (पृष्ठ 65-66)

उत्तर:
| अ | ब |
| 1. अक्षांश | (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। |
| 2. ऊँचाई | (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। |
| 3. समुद्र से निकटता | (घ) तापमान को प्रभावित करता है। |
| 4. मानसूनी पवन | (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। |
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए-
(क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है?
(ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है?
(ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है?
(घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?
उत्तर:
(क) मौसम तथा जलवायु में अंतर-

(ख) समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों का तापमान सम होता है। इसके विपरीत समुद्र तट से दूर के स्थानों पर तापमान विषम होता है। क्योंकि जल, स्थल की अपेक्षा देर से गरम होता है और देर से ही ठंडा होता है। परिणामस्वरूप गर्मियों में जल, स्थल से ठंडा होता है। इसके विपरीत सर्दियों में जल, स्थल की अपेक्षा गरम होता है। अतः समुद्र से दूरी के अनुसार तापमान में विषमता बढ़ती जाती है।
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(ग) भारत की जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की भूमिका
- मानसूनी पवन सम्पूर्ण देश में वर्षा प्रदान करती है।
- मानसूनी पवन तापमान को नियंत्रित करती है।
- मानसूनी पवन ऋतु चक्र को पूर्णता प्रदान करती है।
- विभिन्न भागों में जलवायु की विविधता उत्पन्न करती है।
- भारतीय कृषि और जल संसाधन पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
(घ) चेन्नई का पूरे वर्ष गरम रहने का कारण
- समुद्र के किनारे पर स्थित होने के कारण तापमान पूरे वर्ष संतुलित (सम) रहता है।
- चेन्नई लगभग 13° उत्तरी अक्षांश पर स्थित है, यहाँ सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। इसलिए तापमान पूरे वर्ष अधिक रहता है।
- समुद्र तल से चेन्नई की ऊँचाई $6-10$ मीटर है। कम ऊँचाई पर हवा अधिक सघन और गरम रहती है। इसलिए भी तापमान अधिक होता है।
- समुद्री नमी भी वातावरण में उमस और चिपचिपापन महसूस कराती है।
लेह का पूरे वर्ष ठंडा रहने का कारण
- लेह समुद्र तल से लगभग 3500 मीटर की ऊँचाई पर है। ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता जाता है।
- लेह वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित है अत: यहाँ वर्षा कम होती है। यहाँ आर्द्रता बहुत कम होती है। इसलिए दिन थोड़ा गर्म परंतु रातें बहुत ठंडी होती हैं।
- लेह के 34° उत्तरी अक्षांश पर स्थित होने के कारण सूर्य की किरणें यहाँ तिरछी पड़ती हैं। इसलिए यहाँ उष्मा कम मिलती है।
- समुद्र से बहुत दूर होने के कारण भी यहाँ महाद्वीपीय प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
प्रश्न 3.
चित्र 3.15 में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए।
- क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं?
- ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:

(i) लेह-
- जलवायु-लेह में अत्यन्त शुष्क शीत मरुस्थलीय जलवायु पाई जाती है। यहाँ वर्षा बहुत कम ( 10 से 20 से.मी. प्रति वर्ष) होती है। यहाँ गर्मियों में रात का तापमान 5° से. तथा सर्दियों में -20° से. से -40° से. तक गिर जाता है।
- स्थिति-यह भारत के उत्तर में कराकोरम और लद्दाख पर्वत श्रेणियों के बीच लगभग 3500 मी. की ऊँचाई पर लेह घाटी में स्थित है।
- जलवायु पर प्रभाव-कम वर्षा, अधिक ऊँचाई, साफ आसमान, कम आर्द्रता और महाद्वीपीय स्थिति के कारण यहाँ की जलवायु अत्यंत शुष्क और ठंडी होती है। यहाँ वर्ष-भर तापमान कम और दिन-रात में अधिक अंतर पाया जाता है।
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(ii) चेन्नई-
- जलवायु-चेन्नई में उष्णकटिबंधीय समुद्री जलवायु पाई जाती है।
- स्थिति-चेन्नई भारत के पूर्वी तट (कोरोमंडल तट) पर 6 से 10 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक समतल और तटीय शहर है।
- जलवायु पर प्रभाव-कम ऊँचाई और उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण चेन्नई वर्ष-भर गरम रहता है। बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित होने के कारण यहाँ तापमान पूरे वर्ष संतुलित (ना बहुत गर्म ना बहुत ठंडा) रहता है।
(iii) दिल्ली-
- जलवायु-दिल्ली के समुद्र से दूर स्थित होने के कारण यहाँ महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है।
- स्थिति-दिल्ली लगभग 29° उत्तरी अक्षांश पर समुद्र तल से लगभग 200 मीटर की ऊँचाई पर यमुना नदी के किनारे स्थित है।
- जलवायु पर प्रभाव-महाद्वीपीय जलवायु होने के कारण यहाँ गर्मियाँ अधिक गर्म और सर्दियाँ बहुत ठंडी होती हैं। वर्षा मुख्यत: दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है।
(iv) पणजी-
- जलवायु-पणजी की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है।
- स्थिति-पणजी भारत के पश्चिमी में गोवा राज्य में मांडवी नदी के मुहाने के पास समुद्र तल से 7 मीटर ऊँचाई पर अरब सागर के तट पर स्थित है। यह लगभग 15.5° उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।
- जलवायु पर प्रभाव-अरब सागर के पास होने से यहाँ का मौसम वर्ष-भर नम और संतुलित बना रहता है।
समुद्र के कारण तापमान में बहुत अंतर नहीं होता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण जून से सितंबर तक बहुत अधिक वर्षा होती है। शीत ऋतु में मौसम साफ और सुहावना रहता है।
प्रश्न 4.
भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए।
- गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए।
- मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए।
उत्तर:
भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी का मानसून चक्र-


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प्रश्न 5.
भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसे-बैसाखी, ओणम ) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।
उत्तर:

प्रश्न 6.
कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
भारत में एक किसान के रूप में बरसात के मौसम के लिए निम्न प्रकार तैयारी करूँगा। भारत में यह खरीफ फसलों की बुवाई का समय होता है, इसलिए-
- खेत की जुताई और समतलीकरण-मानसून आने से पूर्व मैं अपने खेत की जुताई करने और खरपतवार हटाने के काम को पूरा करूँगा तथा खेत को समतल भी करूँगा जिससे पानी सही ढंग से फैल सके।
- बीजों की तैयारी-मानसून की भविष्यवाणी के आधार पर मैं फसल का चयन करूँगा (जैसे-धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन आदि)।
- खाद और उर्वरक की व्यवस्था-फसल का चुनाव करने के उपरांत मैं उसके लिए आवश्यक, मात्रा में गोबर खाद, कम्पोस्ट या रासायनिक उर्वरकों की व्यवस्था करूँगा।
- उपकरणों को तैयार रखना-हल, ट्रैक्टर, पाइप, बीज बोने की मशीन आदि उपकरणों की मरम्मत और तैयारी करूँगा।
- बारिश का पूर्वानुमान-मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार सही समय पर बीजों की बुआई आरम्भ करूँगा। पहली अच्छी बारिश के बाद आमतौर पर बुआई शुरू होती है।
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प्रश्न 7.
किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे-चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
उत्तर:
चक्रवात पर निबंध-चक्रवात समुद्र में बनने वाली तीव्र घूर्णन वाली आँधी है, जो कम वायुदाब के कारण उत्पन्न होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, जलवाष्प ऊपर उठती है और चक्रवात बनता है। चक्रवात तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएँ, भारी वर्षा और बाढ़ लाता है। चक्रवात से घर, पेड़, फसलें और बिजली-संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचता है। लोग बेघर हो जाते हैं और जन-धन की भी हानि होती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए मौसम विभाग की अग्रिम चेतावनी, चक्रवात आश्रय गृह, मैग्रोव वन, मजबूत घर और आपदा प्रबंधन दल की तैयारी बहुत जरूरी है। जागरूकता और समय पर बचाव कार्य ही चक्रवात से सुरक्षा का सर्वोत्तम उपाय है।
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