To prepare smartly, include Kaushal Bodh Class 7 NCERT Solutions in Hindi Project 5 पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना Question Answer in your study plan.
Kaushal Bodh Class 7 Chapter 5 Solutions in Hindi पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना
Class 7 Vocational Education Chapter 5 Question Answer in Hindi पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना
गतिविधि 1 (पृष्ठ 113-114)
प्रश्न 1.
वह कथा आपको किसने सनाई?
उत्तर:
मुझे यह कथा मेरी दादी ने सुनाई। वह हमेशा बहुत अच्छे से कहानियाँ सुनाती हैं। उनकी आवाज में एक खास जादू होता है, जिससे कहानी और भी मजेदार लगती है।
प्रश्न 2.
उन्होंने कथा कैसे सुनाई? क्या उन्होंने इसे काव्यात्मक ढंग से सुनाया या वे अपनी ध्वनि परिवर्तित करते रहे? क्या उन्होंने कथा सुनाते समय ध्वनि में आरोह-अवरोह किए या अपने हाव-भाव एवं चेहरे के भाव बदले?
उत्तर:
उन्होंने कथा काव्यात्मक ढंग से सुनाई। उनकी आवाज में आरोह-अवरोह था, जिससे कहानी में उत्साह बढ़ गया। उन्होंने अपने हाव-भाव और चेहरे के भाव भी बदलकर कहानी को जीवंत बना दिया।
![]()
प्रश्न 3.
आपको उनकी कथा सुनाने की विधि कैसी लगी?
उत्तर:
मुझे उनकी कथा सुनाने की विधि बहुत अच्छी लगी। उनकी शैली ने मुझे कहानी में पूरी तरह से शामिल कर लिया। मैं उनकी आवाज और हाव-भाव को देखकर बहुत आनंदित हुआ।
प्रश्न 4.
इस चर्चा के आधार पर आप श्रोताओं के लिए कथा को रुचिकर बनाने के लिए क्या करेंगे?
उत्तर:
कथा को रुचिकर बनाने के लिए हमें कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए :
- कथा का रोचक होना : कहानी का विषय ऐसा होना चाहिए जो श्रोताओं को आकर्षित करे। इसमें मजेदार घटनाएँ और पात्र शामिल करें।
- संवाद और हाव-भाव : पात्रों के संवाद में उत्साह और भावनाएँ होनी चाहिए। हाव-भाव से कहानी को जीवंत बनाएँ ताकि श्रोताओं का ध्यान बना रहे।
- दृश्य और संगीत : मंच पर दृश्य और संगीत का सही उपयोग करें। यह कहानी के माहौल को और भी रोचक बनाता है।
- सवाल-जवाब : श्रोताओं से सवाल पूछें या उनसे बातचीत करें। इससे वे कहानी में शामिल महसूस करेंगे और उनकी रुचि बनी रहेगी।
गतिविधि 2 (पृष्ठ 114-115)
प्रश्न 1.
पुतली-प्रदर्शन का नाम क्या था? आपने इसे कहाँ देखा?
उत्तर:
पुतली-प्रदर्शन का नाम “राजा और उसके मित्र” था। मैंने इसे स्कूल में देखा था।
![]()
प्रश्न 2.
प्रदर्शन में किस प्रकार की पुतलियों का उपयोग किया गया था (जैसे-राजा, शेर, पक्षी)? आपको क्या लगता है कि पुतलियाँ किन वस्तुओं से बनी थीं?
उत्तर:
प्रदर्शन में राजा, शेर और पक्षी जैसी पुतलियों का उपयोग किया गया। ये पुतलियाँ कपड़े और लकड़ी से बनी थीं।
प्रश्न 3.
पुतली-संचालक क्या कर रहे थे? वे पुतलियों को कैसे चला रहे थे? क्या पुतली संचालक ने वर्शकों या पुतली के साथ वार्तालाप किया? यदि हाँ, तो कैसे?
उत्तर:
पुतली-संचालक पुतलियों को चलाकर कहानी सुना रहे थे। उन्होंने दर्शकों से बातचीत भी की, जिससे मजा आया।
प्रश्न 4.
पुतली-प्रदर्शन में सबसे रोचक दृश्य कौन-सा था? आपको यह क्यों रोचक लगा?
उत्तर:
सबसे रोचक दृश्य राजा का शेर से लड़ना था। यह बहुत रोमांचक और मजेदार था।
प्रश्न 5.
क्या प्रदर्शन को रोचक बनाने के लिए ध्वनि, प्रकाश, पृष्ठभूमि या किन्हीं अन्य तत्वों का उपयोग किया गया था?
उत्तर:
हाँ, प्रदर्शन में ध्वनि और प्रकाश का उपयोग किया गया। इससे कहानी और भी रोचक बन गई।
गतिविधि 3 ( पृष्ठ 116)
प्रश्न 1.
आपने कौन-सी कथा का चयन किया है और क्यों?
उत्तर:
मैंने “गोपाल और हिल्सा मछली” की कथा का चयन किया है। यह कथा मजेदार और शिक्षाप्रद है। इसमें चुनौती और चतुराई है। गोपाल की बुद्धिमानी से कहानी रोचक बनती है। यह हमें सिखाती है कि बुद्धि से मुश्किलें हल की जा सकती हैं।

उत्तर:

गतिविधि 4 ( पृष्ठ 119)


उत्तर:

![]()
गतिविधि 5 (पृष्ठ 121)

प्रश्न 1.
आप कौन-सी पुतलियाँ बनाएँगे? नीचे दिए गए स्थान में उनका चित्र बनाएँ।
उत्तर:
आप विभिन्न प्रकार की पुतलियाँ बना सकते हैं जैसे-
- मछली की पुतली : इसे चित्र फलक से काटकर बनाया जा सकता है।
- गाय की पुतली : इसे कागज और रंगों से सजाकर बनाया जा सकता है।
- कुत्ते की पुतली : इसे ऊन और कागज से तैयार किया जा सकता है।
- आप इन पुतलियों के चित्र को स्वयं बनाए।
प्रश्न 2.
उनकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
पुतलियों की मुख्य विशेषताएँ हैं:
- रंग-बिरंगी : पुतलियाँ विभिन्न रंगों में होती हैं, जिससे वे आकर्षक लगती हैं।
- सामग्री : इन्हें कागज, लकड़ी, या थर्माकोल जैसी सामग्रियों से बनाया जात्रा है।
- आकार : पुतलियाँ विभिन्न आकारों में आती हैं, जैसे छोटी या बड़ी।
गतिविधि 6 (पृष्ठ 129)



उत्तर:

![]()
क्या आपको पहली बार में ही पुतलियाँ सही से मिल गईं या आपको पुतलियों में कोई सधुर करने और किसी पुतली को पुनः बनाने की आवश्यकता थी? यदि हाँ, तो बताएँ कि ऐसा क्यों हुआ और आपने क्या किया?
उत्तर:
जब मैंने पहली बार पुतलियाँ बनाई, तो मुझे कुछ सुधार करने की जरूरत पड़ी। कुछ पुतलियों के चेहरे सही नहीं थे। मैंने उन्हें फिर से रंगा और सही आकार दिया। इससे वे बेहतर दिखने लगीं।
गतिविधि 7 ( पृष्ठ 131)

(क)
प्रश्न 1. आप पुतली-प्रदर्शन कहाँ करेंगे?
उत्तर:
हम पुतली-प्रदर्शन एक शांत कमरे या छोटे मंच क्षेत्र में करेंगे। वहाँ इतना अँधेरा होना चाहिए कि पुतलियाँ स्पष्ट रूप से देखी जा सकें। हम एक आरामदायक वातावरण बनाने के लिए परदे का उपयोग कर सकते हैं।
प्रश्न 2.
प्रदर्शन के समय आप पुतलियों को कहाँ रख सकेंगे?
उत्तर:
प्रदर्शन के दौरान, हम पुतलियों को पर्दे के पीछे या एक मेज के पीछे रख सकते हैं। इस तरह, दर्शक उन्हें तब तक नहीं देखेंगे जब तक कि उनका प्रदर्शन करने का समय नहीं आता। यह आश्चर्य बनाए रखने में मदद करता है।

(ख) 1. आपने जो पृष्ठभूमि तैयार की है, उसका संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मैंने एक सुंदर पृष्ठभूमि तैयार की है जिसमें हरे-भरे पेड़, नीला आसमान और रंग-बिरंगे फूल हैं। यह दृश्य कहानी को जीवंत बनाता है।
![]()
(ग) 1. आपने जो रंगमंच की सामग्री तैयार की है, उसका संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
मैंने रंगमंच के लिए हल्की सामग्री जैसे- कागज, बाँस और कपड़े का उपयोग किया है। ये सामग्री आसानी से चलती हैं और दृश्य को आकर्षक बनाती हैं।
गतिविधि 8 ( पृष्ठ 136)
प्रश्न 1.
प्रदर्शन का कौन-सा भाग उन्हें सबसे अधिक अच्छा लगा?
उत्तर:
उन्हें प्रदर्शन में पुतलियों का नृत्य सबसे अच्छा लगा। यह बहुत रोचक और मजेदार था, जिससे सभी दर्शक खुश हुए।
प्रश्न 2.
इसे उत्कृष्ट बनाने के लिए उन्होंने क्या सुझाव दिए हैं?
उत्तर:
उन्होंने सुझाव दिया कि पुतलियों की सजावट और रंगों को और बेहतर बनाया जाए। साथ ही, कहानी को और दिलचस्प बनाने के लिए नए संवाद जोड़े जाएं। मैंने दूसरों से क्या सीखा?
(पृष्ठ 136)
प्रश्न 1.
आपने अपने समुदाय या सहपाठियों से सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया होगा। यह पुतली निर्माण, ध्वनि और प्रकाश प्रदर्शन, वेशभूषा या मंच की सजावट के लिए हो सकता है। कृपया वे तीन सबसे महत्वपूर्ण बातें लिखें जो आपने सीखी।
उत्तर:
- पुतलियों का निर्माण : पुतलियों को बनाने के लिए विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करना सीखा, जैसे कि गेंद, कागज, और लकड़ी। इससे हमें अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने का मौका मिंला।
- ध्वनि और प्रकाश का उपयोग : प्रदर्शनों में ध्वनि और प्रकाश का सही उपयोग कैसे किया जाता है, यह सीखा। इससे कहानी को और भी जीवंत और आकर्षक बनाया जा सकता है।
- मंच सजावट : मंच की सजावट के लिए विभिन्न सामग्रियों और रंगों का उपयोग कैसे किया जाता है, यह सीखा। एक अच्छे मंच से कहानी का प्रभाव बढ़ता है और दर्शकों का ध्यान आकर्षित होता है।
सोचिए और उत्तर दीजिए (पृष्ठ 137)
प्रश्न 1.
दी गईं गतिविधियों को करने में आपको क्या आनंद आया?
उत्तर:
मुझे पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाने में बहुत मजा आया। मैंने अपनी कल्पना का उपयोग किया और पुतलियों को जीवंत बनाने की कोशिश की। यह एक नई और रोचक अनुभव था, जिससे मुझे खुशी मिली।
प्रश्न 2.
आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर:
मुझे पुतलियों को सही तरीके से चलाने में कठिनाई हुई। कभी-कभी उनके हाव-भाव सही नहीं होते थे। इसके अलावा, कहानी को सही ढंग से प्रस्तुत करना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मैंने कोशिश की।
![]()
प्रश्न 3.
अगली बार आप क्या भिन्न करेंगे?
उत्तर:
अगली बार, मैं पुतलियों के हाव-भाव पर अधिक ध्यान दूँगा। मैं कहानी में और भी मजेदार संवाद और संगीत जोड़ने की कोशिश करूँगा। इससे कहानी और भी रोचक बन जाएगी।
प्रश्न 4.
अपनी पटकथा और पुतली-प्रदर्शन की तुलना किसी चलचित्र, टीवी प्रदर्शन, कार्टून एनीमेशन या कोई अन्य प्रस्तुति से करें। इनमें क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं?
उत्तर:
पुतली-प्रदर्शन और कार्टून में दोनों में कहानी सुनाई जाती है। लेकिन पुतलियों में हम खुद अभिनय करते हैं, जबकि कार्टून में सब कुछ पहले से तैयार होता है। दोनों में संवाद और दृश्य होते हैं, लेकिन प्रस्तुति का तरीका अलग होता है।
प्रश्न 5.
आपके द्वारा किए गए कार्य से संबंधित रोजगार अवसर के कुछ उदाहरण बताएँ। यथा-पटकथा लेखन, पुतली निर्माता, वेशभूषा अभिकल्पक ( कॉस्ट्यूम डिजाइनर ), ध्वनि आरोह-अवरोह, प्रकाश और ध्वनि तकनीशियन आदि। अपने आस-पास देखें, व्यक्तियों से बात करें और अपना उत्तर लिखें।
उत्तर:
मैंने देखा कि पटकथा लेखन, पुतली निर्माण, और वेशभूषा अभिकल्पक जैसे कार्यों में रोजगार के अवसर हैं। इसके अलावा, ध्वनि और प्रकाश तकनीशियन भी महत्वपूर्ण हैं। ये सभी काम कला और रचनात्मकता से जुड़े हैं।
पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना Class 7 Notes
→ पुतली-कला : यह एक कला है जिसमें कलाकार पुतलियों का उपयोग करके कहानियाँ सुनाते हैं। पुतलियाँ विभन्न आकारों और प्रकारों में होती हैं।
→ कंथा सुनाना : यह एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति एक कहानी को सुनाता है। इसमें भावनाएँ और संवाद शामिल होते हैं।
![]()
→ पुतलियाँ : ये छोटे-छोटे मानव या जानवर के आकार के खिलौने होते हैं, जिन्हें कलाकार अपने हाथों या धागों से चलाते हैं।
→ पटकथा लेखन : यह एक प्रक्रिया है जिसमें कहानी को संवाद और दृश्य के रूप में लिखा जाता है ताकि उसे मंच पर प्रस्तुत किया जा सके।
→ पृष्ठभूमि : यह वह सेटिंग या स्थान है जहाँ कहानी होती है। यह कहानी के माहौल को बनाने में मदद करती है।
→ पुतली : छोटी कठपुतली जो किसी कहानी में पात्र के रूप में उपयोग की जाती है। इसे हाथ से चलाया जाता है।
→ कथा : एक ऐसी कहानी जो पात्रों और घटनाओं के माध्यम से एक संदेश या अनुभव को दर्शाती है।
→ संचालक : वह व्यक्ति जो पुतलियों को चलाता है और कहानी को प्रस्तुत करता है।
→ प्रदर्शन : किसी कहानी या नाटक का मंचन, जिसमें पुतलियों का उपयोग किया जाता है।
→ दृश्य : कहानी का एक हिस्सा, जिसमें विशेष घटनाएँ और पात्र होते हैं।
→ पात्र : कहानी में शामिल व्यक्ति या जीव, जो घटनाओं में भाग लेते हैं।
→ पटकथा : कहानी का लिखित रूप, जिसमें संवाद और निर्देश होते हैं।
![]()
→ रूपरेखा : कहानी का संक्षिप्त विवरण, जिसमें मुख्य बिंदुओं का उल्लेख होता है।
→ प्रस्तुति : किसी विषय या कहानी को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने की प्रक्रिया।
The post Kaushal Bodh Class 7 Chapter 5 Question Answer in Hindi पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना appeared first on Learn CBSE.
from Learn CBSE https://ift.tt/CIVBaXD
via IFTTT
No comments:
Post a Comment