Teachers recommend Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 3 Notes in Hindi भारत की जलवायु for mastering important definitions and key concepts.
Climates of India Class 7 Notes in Hindi
भारत की जलवायु Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 नोट्स भारत की जलवायु
→ मौसम, ॠतुएँ और जलवायु:
- मौसम वह वायुमंडलीय दशाएँ हैं, जो एक निश्चित छोटी अवधि में किसी क्षेत्र विशेष में पाई जाती हैं। इसे हम प्रतिदिन या हर घंटे अनुभव करते हैं। यह समय-समय पर परिवर्तित होता रहता है।

- जलवायु मौसम का वह प्रतिरूप है, जो किसी क्षेत्र या प्रदेश में अनेक वर्षों अथवा दशकों तक मौसम और वायुमंडलीय दशाओं के आचरण का समग्र अनुभव है।
- पृथ्वी, सूर्य का परिक्रमण करती है, जिससे ऋतुओं का निर्माण होता है। प्रत्येक ऋतु कुछ महीनों तक रहती है और प्रतिवर्ष पुनः आती है।
- ॠतुओं का संबंध मौसम तथा जलवायु दोनों से होता है। विश्व के अधिकतर भागों में चार मुख्य ऋतुएँ होती हैं-वसंत, ग्रीष्म, शरद और शीत।
- भारत में चूँकि वर्षा ऋतु भी होती है। इसलिए पारंपरिक रूप से भारत के अनेक भागों में सम्पूर्ण वर्ष को छः ऋतुओं-वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत (शीत पूर्व) और शिशिर (शीत ऋतु) में विभाजित किया जाता है।
- भारत में विशिष्ट त्योहार एवं रीति-रिवाज़, भोजन, वस्त्र सभी मौसम के अनुसार बदलते रहते हैं। मौसम का यह परिवर्तन मनुष्य के साथ-साथ प्रकृति तथा पशु-पक्षियों पर भी दिखाई देता है।
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→ भारत में जलवायु के प्रकार
- अल्पाइन जलवायु-यह जलवायु हिमालय पर्वतों में पाई जाती है, जहाँ शीत ऋतु अत्यधिक ठंडी और बर्फीली होती है।

- समशीतोष्ण ( टेंपरेट ) जलवायु-इस प्रकार की जलवायु हिमालय के निचले क्षेत्रों में तथा भारत के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। यहाँ सर्दियाँ कम ठंडी होती हैं तथा गर्मियाँ
बहुत अधिक गर्म नहीं होती हैं। यहीं पर हमें अधिकांश पर्यटन स्थल मिलते हैं।

- उपोष्ण कटिबंधीय ( सब-ट्रॉपिकल) जलवायु-इस प्रकार की जलवायु भारत के उत्तरी मैदानों में पाई जाती है। यहाँ ग्रीष्मकाल अत्यधिक गर्म और शीत ऋतु ठंडी होती है।
- शुष्क जलवायु-इस प्रकार की जलवायु पश्चिमी राजस्थान (थार मरूस्थल) में पाई जाती है, यहाँ पर दिन अत्यधिक गर्म, रातें ठंडी और वर्षा बहुत ही कम होती है।
- अर्द्ध-शुष्क जलवायु-इस प्रकार की जलवायु मुख्यतः मध्य दक्कन पठार, पूर्वी राजस्थान तथा गुजरात, हरियाणा के कुछ भागों में पाई जाती है। यहाँ ग्रीष्मकाल गर्म, सर्दियाँ ठंडी और वर्षा ॠतु में सामान्य वर्षा होती है।
- उष्णकटिबंधीय (टूॉपिकल) आर्द्र जलवायुपश्चिमी तटीय पट्टी में मानसून के महीनों में भारी वर्षा होती है, जो चावल और मसालों की खेती के अनुकूल है।
- आर्द्र और शुष्क अवधियों के साथ उष्णकटिबंधीय जलवायु-पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में हल्की सर्दी और मानसूनी हवाओं द्वारा नियंत्रित जलवायु पाई जाती है।
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→ जलवायु को निर्धारित करने वाले कारक-किसी स्थान की जलवायु अनेक कारणों द्वारा प्रभावित होती है।
- अक्षांश-भूमध्य रेखा के निकट निम्न अक्षांशों पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ने के कारण तापमान अधिक होता है। ध्रुवों की ओर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ने के कारण अपेक्षाकृत कम सूर्यातप प्राप्त होता है। इस प्रकार भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर तापमान घटता जाता है।
- ऊँचाई ( एल्टीट्यूड )-सामान्य रूप से एक किलोमीटर की ऊँचाई पर 6.4{\circ} सेल्सियस तापमान कम हो जाता है। क्योंकि ऊँचाई बढ़ने के साथ वायुमंडलीय दबाव कम हो जाता है। परिणामस्वरूप वायु ठंडी हो जाती है। इसलिए ग्रीष्म ऋतु में मैदानों की गर्मी से बचने के लिए लोग पर्वतीय स्थानों पर जाना पसंद करते हैं।
- समुद्र से निकटता-जल, स्थल की तुलना में देर से गर्म होता है और देर से ही ठंडा होता है। जिसके कारण ग्रीष्म ॠतु में जल, स्थल भाग से ठंडा होता है और शीत ऋतु में स्थल की तुलना में गर्म रहता है। अतः समुद्र तट के निकट तापमान में अंतर कम पाया जाता है, किंतु समुद्र से दूरी बढ़ने के साथ ही यह अंतर बढ़ता जाता है।
- पवनें-ठंडी पवनें किसी क्षेत्र के तापमान को कम कर देती हैं जबकि गरम पवनें तापमान को बढ़ा देती हैं। पवनें तापमान के अतिरिक्त आर्द्रता और वर्षण को भी प्रभावित करती हैं।
- स्थलाकृति-
– पर्वत श्रेणियाँ भी ठंडी और गर्म पवनों को रोककर तापमान को नियंत्रित करने का कार्य करती हैं।
– ढाल की तीव्रता और सूर्य के सामने या विपरीत दिशा में होने से भी सूर्यातप की मात्रा कम या अधिक होती है। उदाहरणतः पश्चिमी घाट तथा असम के पवनाभिमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं।
→ मानसून:
- मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द ‘मौसिम’ से हुई है। मानसून से अभिप्राय ऐसी जलवायु से है,. जिसमें ॠतु के अनुसार पवनों की दिशा में उत्क्रमण हो जाता है।

- गर्मी का मौसम आरम्भ होने पर जब सूर्य उत्तरायण की स्थिति में आता है तब वहाँ निम्न वायुदाब की स्थिति बन जाती है।
- चूँकि पवन सदैव उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर प्रवाहित होती है। ये पवनें अपने साथ नमी लेकर आती हैं, जो गर्म भू-भाग पर संघनित होकर भारी मानसूनी वर्षा करती हैं।
- सर्दियों में यह प्रतिरूप विपरीत हो जाता है। स्थल भाग पर उच्च वायुदाब विकसित होने से पवनें विपरीत दिशा में चलती हैं जिससे अधिकांश भागों में शुष्क परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
- सर्दियों में पवनें स्थल से समुद्र की ओर प्रवाहित होने के कारण शुष्क हवाएँ दक्षिण भारत में ठंड प्रारम्भ कर देती हैं, लेकिन इनका एक भाग बंगाल की खाड़ी से गुजरते हुए नमी ग्रहण करता है और दक्षिण-पूर्व भारत के कुछ भागों में वर्षा करने में सक्षम होता है। इसे शीत या उत्तर-पूर्व मानसून कहा जाता है।
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(क) ग्रीष्म ऋतु

(ख) शीत ऋतु

→ जलवायु और हमारा जीवन

- सांस्कृतिक प्रभाव-भारत में मनाए जाने वाले अधिकांश त्योहार कृषि तथा ऋतु परिवर्तन से जुड़े हैं। ऋतुओं के अनुसार ही हमारा खान-पान, पहनावा तथा दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।
- आर्धिक प्रभाव-भारत एक कृषि प्रधान देश है। वर्षा का कम या बहुत अधिक होना हमारे कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है। औद्योगिक गतिविधि भी प्रायः पूर्वानुमानित मौसम और जल की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
- आपदाएँ-भारत में मौसम के विविध स्वरूप चरम परिस्थितियों जैसे-चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन और जलवायु संबंधी विकट आपदाओं को जन्म दे सकते हैं। इनसे बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होती है।
→ जलवायु और आपदाएँ
- चक्रवात-जब समुद्र का तापमान 27° से. तथा वायुदाब औसतन 1000 मिलीबार से कम होता है तब वहाँ चक्रवात बनने की संभावना अत्यधिक होती है। आस-पास के क्षेत्रों से पवनें इस निम्न वायुदाब की ओर आकर्षित होती हैं। वह अपने साथ नमी और वर्षा लेकर आती हैं। जब निम्न दबाव तंत्र तीव्र होता है और पवन की गति अधिक होती है, तो इसका परिणाम चक्रवात हो सकता है।

- बाढ़-बाढ़ आमतौर पर अचानक नहीं आती है। बाढ़ तब आती है जब नदी जल-वाहिकाओं में इसकी क्षमता से अधिक जल बहाव होता है और जल बाढ़ के रूप में मैदान के निचले हिस्सों में प्रवेश कर जाता है। प्रायः बाढ़ मानसून के दौरान आती है। हिमनदीय झीलें भी हिमालय क्षेत्र में बाढ़ का प्रमुख कारण हैं।

- भूस्खलन-पर्वतीय अथवा पहाड़ी क्षेत्रों में शैलों (चट्टानों), मिट्टी या मलबे का ढाल के अनुरूप ऊपर से नीचे गिरना भूस्खलन कहलाता है। भूस्खलन की अधिकांश घटनाएँ मानसून के दौरान होती हैं। प्राकृतिक कारणों के अतिरिक्त मानवीय गतिविधियाँ भी भूस्खलन के लिए उत्तरदायी हैं।

- दावानल-दावानल का अर्थ है जंगल की आग, जो तेज़ गति से फैलती है। मानवीय लापरवाही भी इसका एक प्रमुख कारण है। इससे वन्य जीवन, पेड़-पौधों, पर्यावरण आदि सभी का नुकसान होता है। इसके परिणाम पर्यावरणीय तथा आर्थिक दोनों होते हैं।

- जलवायु परिवर्तन-जलवायु परिवर्तन का तात्पर्य जलवायु में महत्वपूर्ण एवं दीर्घकालिक परिवर्तन है। यद्यपि जलवायु परिवर्तन के लिए प्राकृतिक तथा मानवीय दोनों कारक उत्तरदायी होते हैं, परंतु 19 वीं शताब्दी के बाद से जलवायु परिवर्तन मुख्यतः मानवीय गतिविधियों का परिणाम है। जिसके फलस्वरूप ग्रीन हाउस गैसों (कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, क्लोरोफ्लोरो कार्षन, नाइट्रस ऑक्साइड) का उत्सर्जन| बढ़ा है और वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन मौसम अथवा तापमान को अति की ओर ले जाता है। यह प्राकृतिक और मानवीय जीवन के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
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