Sunday, 29 March 2026

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

Teachers recommend Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय for mastering important definitions and key concepts.

The Rise of Empires Class 7 Notes in Hindi

साम्राज्यों का उदय Class 7 Notes

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 नोट्स साम्राज्यों का उदय

→ प्रस्तावना
अध्याय की शुरुआत दो पात्रों-भविषा और ध्रुव से होती है जिन्होंने एक विशेष यंत्र ‘इतिहास’ बनाया है,जिससे वे अतीत की यात्रा कर सकते हैं। अपनी पहली यात्रा के लिए वे पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) जाते हैं। वहाँ इरा नाम की बालिका उन्हें नगर का भ्रमण कराती
Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 3
है। वह पाटलिपुत्र साम्राज्य की सैन्य शक्ति के बारे में बताती है। सैनिक अपने हथियारों के साथ नगर की रक्षा में तैनात हैं। वे घोड़ों और हाथियों पर सवार होकर नगर की सुरक्षा करते हैं। नगर में खास सेतु (पुल) है, जिसे संकट के समय ऊपर उठा लिया जाता है। इरा उन्हें पाटलिपुत्र के जंगलों, औषधियों, खनिजों, भिक्षुओं के लिए गुफाओं में हो रहे निर्माण कार्यों और नगर की भव्य इमारतों, राजमहल, मीनारों, सड़कों, कला व व्यापार के बारे में भी बताती है। इस प्रकार हम मौर्य और मगध साम्राज्य के समृद्ध और गौरवशाली इतिहास से परिचित होते हैं।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

→  साम्राज्य क्या होता है?

  • साम्राज्य का अर्थ है-एक ऐसा शासन जिसमें अनेक छोटे राज्यों पर एक सर्वोच्च शासक या सम्राट का अधिकार होता है। इन राज्यों के अपने-अपने राजा होते थे, लेकिन वे सम्राट के अधीन होते थे। सम्राट राजधानी से पूरे साम्राज्य का शासन चलाता था, जो आमतौर पर प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती थी। प्राचीन भारत में सम्राट के लिए समराज, अधिराज, अधिपति और राजाधिराज जैसे शब्दों का प्रयोग होता था।
  • भारतीय इतिहास में कई साम्राज्य हुए, जिन्होंने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज और भारतीय संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया।

→  साम्राज्य की विशेषताएँ

  • मजबूत सैन्य शक्ति
  • सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था
  • वित्त व कर प्रणाली और व्यापार पर नियंत्रण
  • संसाधनों का व्यवस्थित नियंत्रण और संचालन।
  • कला, साहित्य तथा ज्ञान केंद्रों को बढ़ावा देना।
  • संचार तंत्र और जनकल्याण निर्माण कार्य-नदियाँ, सड़कें, यातायात और लोक-हितकारी ढाँचों की स्थापना। व्यापार, व्यापारिक मार्ग और श्रेणियाँ (गिल्ड्स)।
  • प्राचीन भारत में आर्थिक गतिविधियाँ, उत्पादन और व्यापार साम्राज्य की मजबूती, प्रजा की समृद्धि के लिए जरूरी थी।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 1

  • व्यापारिक मार्गों की स्थापना और नियंत्रण से व्यापार की मात्रा और वस्तुओं की विविधता बढ़ती थी।
  • प्राचीन भारत में उत्तरापथ और दक्षिणापथ व्यापारिक मार्गों का उपयोग होता था। वस्त्र, कृषि उत्पाद, सुगंधित पदार्थ, हस्तशिल्प और पशुओं का व्यापार प्रमुखता से होता था। भारत का व्यापार केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के देशों तक जल और स्थल-मार्गों के जरिए होता था।
  • प्राचीन भारत में व्यापारी सामूहिक रूप से काम करते थे। व्यापारियों, शिल्पकारों, साहूकारों और किसानों के संगठनों से श्रेणियों (गिल्ड्स) का विकास हुआ।
  • हर श्रेणी का एक प्रमुख होता था और उन्हें खुद नियम बनाने की स्वतंत्रता प्राप्त थी। फलते-फूलते पारदर्शी व्यापार में राजकीय शासक का द्खल नहीं होता था। व्यापार श्रेणियाँ और वाणिज्यिक गतिविधियों का प्रभाव आज भी भारत में दिखता है। व्यापार संस्था भारतीय.समाज के स्व-संगठित होने का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

→ मगध का उदय

  • छठी से चौथी शताब्दी सा.सं.पू. में मगध (आधुनिक दक्षिण बिहार और आस-पास का क्षेत्र) भारत के प्रथम सास्राज्य की नींव का आधार बना। शक्तिशाली और प्रतापी शासक अजातशत्रु ने मगध को शक्ति के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 2
  • मगध साम्राज्य गंगा के उपजाऊ मैदानों में स्थित धा. जहाँ वन और हाथी और प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में थे। पर्वतीय क्षेत्रों से लोहे जैसे अयस्क और खनिज मिलते थे, जिससे युद्ध के हथियारों में वृद्धि हुई और लोहे के हलों से भूमि की जुताई से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई। गंगा और सोन नदियों के कारण व्यापार को भौगोलिक लाभ मिला।
  • पाँचवीं शताब्दी में मगध में शक्तिशाली और धनवान नंद वंश उभरा जिसकी स्थापना महाप्दूमनंद ने की थी।
  • धनानंद की अलोकप्रियता के कारण नंद वंश का पतन हुआ और मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 4

→ यवनों ( ग्रीक ) का आगमन

  • भारतीब उपमहाद्वीप के बत्तर-पश्चिम क्षेत्र को एक प्राचीन मार्ग भूमध्यसागरीय भू-भाग से जोड़ता था। इस क्षेत्र में कई राज्य विद्यमान थे. जिसमें पौरव वंश प्रमुख था।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 5

  • पौरव वंश के शासक राजा पुरु (पोरस) और एलेक्रेंडर के बीच प्रसिद्ध युद्ध लगभग 326 ईसा पूर्व में झ्रेलम नदी के किनारे हुआ। राजा पुरु की बीरता और मातृभूमि के प्रति प्रेम से प्रभावित होकर, एलेक्जेंडर ने उन्हें क्षत्रप (शासक) बनाए रखा और उनसे संधि कर .ली।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 6
  • एलेक्जेंडर को विद्रोह और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा। उसके निधन के बाद, उसके विशाल सास्राज्य का विभाजन हो गया।
  • प्राचीन भारतीय तपस्वी दार्शनिकों (जिम्नोसोफिस्ट) का वर्णन प्राचीन ग्रीक ग्रंथों में मिलता है। एलंक्जंडर ने भारतीय और ग्रीक दर्शन परंपराओं के मेल का बढ़ावा दिया।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

→ शब्तिशाली मौर्य साग्रान्य

  • नंद वंश के अंत के बाद लगभग 321 सा.सं.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साप्राज्य की स्थापना की। अपने गुरु कौटिल्य (चाणक्य) के कुशल मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति, शासन और अर्थव्यवस्था के ज्ञान का उपयोग करके एक शक्तिशाली और संगठित मौर्य साक्राज्य का विस्तार किया, जो भारतीय इतिहास के महानतम साम्राज्यां में से एक है।

→ कौटिल्य की कहानी

  • कौटिल्य जिन्हें चाणक्य या विण्गुगुप्त भी कहा जाता है, तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे। मगध के घमंडी शासक धनानंद ने दरबार में कौटिल्य का अपमान कर उन्हें निकाल दिया। तब कौटिल्य ने नंद के शासन को समाप्त करने की शापथ ली।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 7

→ चंद्रगुप्त मौर्य का उद्य

  • चंद्रगुप्त मौर्य ने कौटिल्य की सहायता से समृद्ध और सुदृढ़ मीर्य साप्राज्य की स्थापना की और पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया। उन्होंने ग्रीकों को हटाकर विशाल साम्राज्य बनाया और उनके साथ राजनयिक संबंध भी बनाए रखे। ग्रीक इतिहासकार मेगस्थनीज ने भारतीय यात्राओं और सभ्यता का वर्णन अपनी पुस्तक इडिका में किया।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 8

→ कौटिल्य की राग्ध संबधित अवधारणा

  • कौटिल्य ने अपनी प्रसिद्ध रचना अर्थशास्त्र में रक्षा, अर्धशाख्ब, प्रशासन, न्याय, नगर-नियोजन, कृषि व्यवस्था और लोक-कल्याण जैसे विषयों का वर्णन किया है।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 9
  • कौटिल्य ने अपने सप्तांग सिद्धांत में राज्य को सात अंगों से निर्मित बताया है। इस सात भागों के तालमेल से एक सुदृड़, संगठित और समृद्ध राज्य की स्थापना संभव होती है। कौटिल्य ने जन कल्याण को सर्वोपरि रख्या। और धार्मिक उपलब्धियों का श्रेय प्राप्त है। अशोक का साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण भाग को छोड़कर संपूर्ण भू-भाग तक फैला था जिसमें वर्तमान बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल थे।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

→ सम्राट अशोक : शांति का चयन

  • चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र अशोक (268-232 सा.सं.पू.) मौर्य साम्राज्य के महान शासक थे। उन्हें प्रशासनिक
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 10
  • कलिंग के भंयकर युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और महात्मा वुद्ध के संदेश/शिक्षाओं का प्रसार श्रीलंका, थाईलेंह व मध्य एशिया से आगे तक किया।
  • अशोक ने कई शिलालेख खुदवाए जिनमें जन-सामान्य के लिए प्रेरणादायक संदेश होते धो ये शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए जो भारत की क्षेत्रीय लिपियों की जननी मानी जाती है। इतिहासकार अशोक को ‘महान संचारक’ मानते हैं।
  • शिलालेखों में अशोंक को ‘देवानामपिय पियदसि’ कहा गया है। उसने स्वयं की दयालु शासक के रूप में छवि प्रस्तुत की उन्होंने प्रकृति व वन्यजीव संरक्षण और जनता के कल्याण के लिए लगातार प्रयास किया।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 11

→ मौर्यकाल में जीवन

  • नगर शासन और वाणिज्य के प्रमुख केंद्र थे।
  • नगरों में महल, घर, सार्वजनिक इमारतें और योजनाबद्ध सड़कें थीं।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 12
  • राजकोष (खजाना) व्यापार और कर प्रणाली सुव्यवस्थित थी जिससे साम्राज्य में खुशहाली बढ़ी।
  • जनसंख्या का बड़ा भाग कृषि से जुड़ा होता था और अन्न भंडार में पर्याप्त अन्न होता था। लोहार, जौहरी, कुम्हार, बढ़ई जैसे अनेक कारीगर नगरों में रहते थे।
  • प्रशासनिक अधिकारी, व्यापारी और कारीगरों की भूमिकाएँ महत्वपूर्ण थीं।
  • सड़कों पर पहचानसूचक (साइन बोर्ड) लगे होते थे। घर लकड़ी के बने होते थे और दो मंजिल तक ऊँचे हो सकते थे। आग से बचाव के लिए सड़कों पर व्यवस्थित रूप से थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पानी के बर्तन रखे जाते थे।
  • वेशभूषा-लोग सूती कपड़े पहनते थे जो घुटनों से नीचे तक होते थे। ऊपरी वस्त्र कंधे पर डाला जाता था। अलंकृत (सजे हुए) चमड़े के जूते पहनने का चलन था, जिनके तलवे मोटे होते थे।
  • मौर्य अत्यधिक पॉलिश किए गए चमकदार स्तंभों के लिए प्रसिद्ध थे।
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 13
    उदाहरण के लिए अशोक द्वारा बनखाया गया वाराणसी के पास सारनाथ का स्तंभ। इस स्तंभ का शीर्ष
    Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय 14
    भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। इसमें संस्कृत का आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ सत्य की सदैव विजय होती है. मुंडक उपनिषद से लिया गया है।
  • स्तंभ के चार सिंह राजकीय शक्ति के प्रतीक हैं और इस पर अंकित धर्मचक्र महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का प्रतीक है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में मध्य में भी धर्मचक्र अंकित है।

Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय

→ साप्राज्यों की दुर्बलताएँ
साम्राज्यों के पतन के कारण-

  • सुदूर क्षेत्रों में शासन का कमज़ोर हो जाना
  • आर्थिक संकट आना। बाढ़, सूखा और बढ़ते कर साम्राज्य के पतन के कारण बन जाते हैं।
  • कमजोर उत्तराधिकारी और नेतृत्व से साम्राज्य शासन का पतन होता है।
  • भ्रप्टाचार, जनता का शांपण और सैन्य अनुशासन की कमी साम्राज्य की व्यवस्था को कमजोर बना देते हैं और वे अस्थिर हो जाते हैं।

The post Class 7 SST Chapter 5 Notes in Hindi साम्राज्यों का उदय appeared first on Learn CBSE.



from Learn CBSE https://ift.tt/AHRxYnj
via IFTTT

No comments:

Post a Comment